Hanuman Jayanti 2021: मंगलवार को है हनुमान जयंती, जानें बजरंगबली की जन्मकथा

पवन पुत्र हनुमान जी को कई अन्य नामों से पुकारा जाता है. Image-shutterstock.com

पवन पुत्र हनुमान जी को कई अन्य नामों से पुकारा जाता है. Image-shutterstock.com

Hanuman Jayanti 2021: हनुमान जी की जयंती इस बार 27 अप्रैल (मंगलवार) को मनाई जाएगी. भक्त पूरी श्रद्धा से इस दिन का इंतजार करते हैं.

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  • Last Updated: April 25, 2021, 10:22 AM IST
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Hanuman Jayanti 2021: हनुमान जी (Hanuman Ji) एक ऐसे देवता हैं जो कलयुग में भी पृथ्वी पर विराजमान हैं. भगवान हनुमान की पूजा आराधना करने से मनुष्य हर प्रकार के भय से मुक्त हो जाता है. इनकी पूजा करने से आत्मविश्वास में वृद्धि होती है. आपको बता दें कि हनुमान जी की जयंती इस बार 27 अप्रैल (मंगलवार) को मनाई जाएगी. भक्त पूरी श्रद्धा से इस दिन का इंतजार करते हैं. इस दिन हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए भक्त, रामायण, रामचरित मानस का अखंड पाठ, सुंदरकांड का पाठ, हनुमान चालीसा, बजरंग बाण, हनुमान बाहुक का पाठ करते हैं.

हनुमान जी के विभिन्न नाम

पवन पुत्र हनुमान जी को कई अन्य नामों से पुकारा जाता है. हनुमान जी को चीरंजीवी, बजरंगबली, पवनसुत, महावीर, अंजनीसुत, संकटमोचन और अंजनेय नामों से भी जाना जाता है.

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हनुमान जयंती तिथि और शुभ मुहूर्त

हनुमान जयंती 2021 तिथि- 27 अप्रैल 2021 (मंगलवार)

पूर्णिमा तिथि प्रारंभ- 26 अप्रैल 2021 (सोमवार) की दोपहर 12:44 बजे से



पूर्णिमा तिथि समापित- 27 अप्रैल 2021 (मंगलावर) की रात्रि 9:01 बजे तक

हनुमान जी की जन्म कथा

पौराणिक कथा के अनुसार एक बार महान ऋषि अंगिरा स्वर्गलोक पहुंच गए. जहां पर इंद्र द्वारा पुंजिकस्थला नाम की एक सुंदर अप्सरा को नृत्य करने के लिए आमंत्रित किया गया था. लेकिन ऋषि ने इस नृत्य कार्यक्रम को लेकर कोई रूचि नहीं दिखाई और वह ईश्वर का स्मरण करने लगे. नृत्य समाप्त होने के बाद उस अप्सरा ने ऋषि से अपने नृत्य के बारे में पूछा तो, ऋषि ने सत्यता के साथ कह दिया कि उन्हें नृत्य में कोई रूचि नहीं है. इस पर अप्सरा क्रोधित हो गई. ऋषि ने अप्सरा के इस कृत्य पर नाराज होकर अप्सरा को बंदरिया होने का श्राप दे दिया.

अप्सरा को जब अपनी गलती का एहसास हुआ तो उसने ऋषि से क्षमा याचना की, लेकिन ऋषि ने अपना श्राप वापिस नहीं लिया. इसके बाद अप्सरा दूसरे ऋषि मुनि के पास पहुंची और पूरी घटना के बारे में बताया. ऋषि मुनि ने अप्सरा से कहा कि सतयुग में भगवान विष्णु का एक अवतार प्रकट होगा. इसके बाद अप्सरा ने सतयुग में वानर राज कुंजर की पुत्री अंजना के रूप में जन्म लिया. अंजना का विवाह वानर राज कपिराज केसरी से हुआ. इन दोनों से ही पुत्र के रूप में हनुमान जी ने जन्म लिया.

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बुद्धि और विद्या के भी दाता

हनुमान जी को परम राम भक्त माना गया है, इसलिए हनुमान जी भगवान राम की पूजा करने वालों को अपना विशेष आर्शीवाद प्रदान करते हैं. इसके साथ ही हनुमान जी बल, बुद्धि, विद्या और शौर्य के भी दाता हैं. हनुमान जी को संकट मोचन भी कहा जाता है.(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
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