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Hartalika Teej 2021: कब मनाई जाएगी हरतालिका तीज? जानें पूजन विधि और शुभ मुहूर्त

हरितालिका तीज की पूजा शाम के समय (प्रदोष काल) में की जाती है. Image-shutterstock.com

हरितालिका तीज की पूजा शाम के समय (प्रदोष काल) में की जाती है. Image-shutterstock.com

Hartalika Teej 2021: हरतालिका तीज का व्रत सुहागिन महिलाएं (Married Women) अपने पति की लंबी उम्र की कामना के लिए करती हैं. हालांकि इस व्रत से जुड़े कई अहम नियम और सावधानियां भी होती हैं, जिनका पालन अनिवार्य बताया गया है.

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    Hartalika Teej 2021: हरतालिका तीज हिन्दू धर्म में सुहागिन महिलाओं द्वारा किया जाने वाला बेहद ही कठिन और शुभ फलदायी व्रत माना गया है. भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की तृतीया को हरतालिका तीज मनाई जाती है. इस दिन मुख्य तौर पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विधान बताया गया है. हिन्दू धर्म के सभी व्रतों में हरतालिका व्रत को सबसे कठिन इसलिए माना गया है क्योंकि यह निर्जला और निराहार किया जाता है. अगले दिन पूजा के बाद ही महिलाएं अपने व्रत का पारण करती हैं.

    हरतालिका तीज 2021 मुहूर्त
    हरतालिका तीज 9 सितंबर (गुरुवार)
    प्रातःकाल मुहूर्त- 06:02:40 से 08:32:55 तक
    अवधि- 2 घंटे 30 मिनट
    प्रदोष काल मुहूर्त- 18:33:51 से 20:51:43 तक

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    हरतालिका तीज का धार्मिक महत्व
    हरतालिका तीज का व्रत सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र की कामना के लिए करती हैं. हालांकि इस व्रत से जुड़े कई अहम नियम और सावधानियां भी होती हैं, जिनका पालन अनिवार्य बताया गया है. इसके अलावा कुंवारी कन्याएं भी इस दिन का व्रत करती हैं जिससे उन्हें सुयोग्य और मनचाहा पति मिल सके. हरतालिका तीज का सबसे अहम नियम है कि यह व्रत निर्जला और निराहार रखना होता है. इस व्रत के अगले दिन ही व्रती को खाने-पीने की अनुमति होती है. इसके अलावा जिस किसी ने भी एक बार हरतालिका व्रत शुरू कर दिया उसे बीच में कभी भी यह व्रत छोड़ना नही होता है. प्रत्येक वर्ष नियमपूर्वक इस व्रत को करना अनिवार्य है. मुमकिन हो तो हरतालिका व्रत के दिन रात में सोना नहीं चाहिए. इस दिन बहुत से लोग रात्रि जागरण करते हैं.

    हरतालिका तीज पूजन विधि
    कहते हैं कोई भी पूजा तभी फलित होती है जब उसे सही विधि से किया जाए. आइए जानते हैं कि हरतालिका तीज की सही पूजन विधि क्या होती है-

    -हरितालिका तीज की पूजा शाम के समय (प्रदोष काल) में की जाती है. ऐसे में दिन भर का व्रत करने वाली महिलाएं शाम के समय स्नान करने के बाद पूजा करती हैं.
    -इस दिन की पूजा के लिए महिलाएं हाथों से रेत और मिट्टी की मदद से भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमा बनाती हैं.
    -इसके बाद पूजा वाली जगह को साफ़ करके वहां साफ़ चौकी स्थापित की जाती है जिसपर केले के पत्ते रखें और फिर इस पर मिट्टी के शिव, पार्वती और भगवान गणेश को स्थापित कर दें. भगवानों को फूल अर्पित करें.

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    -इसके बाद भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश का षोडशोपचार विधि से पूजन करें.
    -इस दिन की पूजा में मां पार्वती को सुहाग का पिटारा और भगवान शिव को धोती और अंगोछा अवश्य चढ़ाएं.
    -पूजा के बाद सुहाग का पिटारा अपनी सास के चरण स्पर्श करने के बाद इसे किसी ब्राहम्ण को दान कर दें.
    -इस दिन से संबंधित व्रत कथा अवश्य सुनें और रात्री जागरण करें.
    -अगले दिन पूजा करें और उसके बाद मां पार्वती को सिन्दूर चढ़ाने के बाद कुछ हल्का भोजन करके अपना व्रत खोल लें. (साभार-Astrosage.com)

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