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भगवान कार्तिकेय क्यों होते हैं मयूर पर सवार, जानें देवी-देवता पशु पक्षी की सवारी क्यों करते हैं?

भगवान कार्तिकेय की सवारी मयूर कैसे बनी

भगवान कार्तिकेय की सवारी मयूर कैसे बनी

Bhagwan ki Sawari Pashu Pakshi: पुराणों में हर भगवान की सवारी का उल्लेख मिलता है. देवी देवताओं ने अपनी सवारी के रूप में ...अधिक पढ़ें

    Bhagwan ki Sawari Pashu Pakshi: हिन्दू धर्म (Hinduism) में अनेक देवी देवता हैं जिनकी पूजा का विधान प्रथक प्रथक है. उन्हें सप्ताह के अलग अलग दिन भी समर्पित किए गए हैं. पुराणों में हर देवी देवता की पसंद और न पसंद का उल्लेख मिलता है. किस भगवान को कौनसा पुष्प चढ़ाना चाहिए (Which Flower Offer to God), कौनसा रंग उन्हे प्रिय है, भोग में क्या अर्पित किया जाए यहां तक की क्या किया जाए जिससे भगवान की कृपा अपने भक्तों पर बनी रहे. इसी तरह पुराणों में हर भगवान की सवारी का भी उल्लेख मिलता है. देवी देवताओं ने अपनी सवारी के रूप में पशु पक्षियों को ही क्यों चुना? आज हम जानेंगे कि भगवान कार्तिकेय (Lord Kartikey) और अन्य देवी देवताओं को उनकी सवारी पशु या पक्षी ही क्यों और कैसे मिली.

    देवी देवताओं को पशु पक्षियों के साथ जोड़ने क को जोडने के पीछे कई कारण हैं. देवी देवताओं के साथ पशुओं को उनके व्यवहार के अनुसार और पशुयों की रक्षा के लिए जोड़ा गया है. अगर ऐसा नहीं किया जाता तो शायद इंसान पशु के प्रति अदिक हिंसात्मक होता.

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    कैसे मिली कार्तिकेय को मोर की सवारी
    पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान विष्णु ने कार्तिकेय की तपस्या और साधक क्षमताओं से प्रसन्न होकर उन्हें यह वाहन भेंट किया था. ऐसा कहा जाता है कि मोर चंचलता का प्रतीक है और उसे भगवान कार्तिकेय का वाहन बनाना इस बात को दर्शाता है कि कार्तिकेय ने अपने मोर रूपी चंचल मन को अपने वश में कर लिया है.

    देवी सरस्वति की सवारी हंस
    ज्ञान की देवी सरस्वति को हंस सवारी में मिला क्योंकि हंस को जिज्ञासा और पवित्रता का प्रतीक कहा जा सकता है. मां सरस्वती का हंस पर विराजित होना इस बात संकेत है कि जिज्ञासा को ज्ञान के जरिए ही शांत किया जा सकता है.

    मां दुर्गा की सवारी शेर
    मां दुर्गा की सवारी शेर यानि सिंह है. दुर्गा जी को शक्ति का स्वरुप माना जाता है. शेर स्वयं शक्ति, बल, पराक्रम, और क्रोध का प्रतीक माना जाता है. मां दुर्गा का स्वभाव भी ऐसा ही है. मां दुर्गा की हुंकार भी शेर की दहाड़ की ही तरह इतनी तेज है, जिसके आगे कोई भी आवाज सुनाई नहीं देती.

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    भगवान शिव की सवारी नंदी
    भगवान भोलेनाथ का स्वभाव अत्यंत शांत और संयमित है. जिसके कारण नंदी यानि की बैल भगवान शिव का वाहन है. बैल अत्यंत शक्तिशाली और ताकतवर होने के बाद भी शांत रहता है. जो भोलेनाथ के स्वभाव से मिलता है. नंदी के चार पैर हिन्दू धर्म के चार स्तंभ, क्षमा, दया, दान और तप के प्रतीक हैं. सफेद रंग का नंदी जिसे स्वच्छता और पवित्रता का प्रतीक माना गया है.

    धन की देवी लक्ष्मी की सवारी उल्लू
    उल्लू को शुभता और संपत्ति का प्रतीक माना गया है. कहा जाता है कि अधिक धन संपत्ति पाने के बाद इंसान बुद्धीहीन हो जाता है. जिसके कारण माता लक्ष्मी उल्लू के साथ साथ चलती हैं. उल्लू को दिन में दिखाई नहीं देता, वह रात का जीव है. इससे प्रतीक होता है कि लक्ष्मी जी की कृपा व्यक्ति को अंधकार से मुक्त कर सकती है. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)

    Tags: Religion

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