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Jagannath Rath Yatra 2022: आज से जगन्नाथ रथ यात्रा प्रारंभ, यहां देखें कार्यक्रम का पूरा विवरण

पुरी के भगवान जगन्नाथ के रथ में कुल 16 पहिये होते हैं. भगवान जगन्नाथ का रथ लाल और पीले रंग का होता है. ये रथ अन्य दो रथों से थोड़ा बड़ा होता है. सबसे पहले बलराम फिर सुभद्रा का रथ होता है और सबसे आखिरी में भगवान जगन्नाथ का रथ होता है.

पुरी के भगवान जगन्नाथ के रथ में कुल 16 पहिये होते हैं. भगवान जगन्नाथ का रथ लाल और पीले रंग का होता है. ये रथ अन्य दो रथों से थोड़ा बड़ा होता है. सबसे पहले बलराम फिर सुभद्रा का रथ होता है और सबसे आखिरी में भगवान जगन्नाथ का रथ होता है.

प्रसिद्ध जगन्ना​थ रथ यात्रा (Jagannath Rath Yatra) आज 01 जुलाई से शुरु हो रही है. यह 09 दिन तक चलती है. आइए जानते हैं कि जगन्ना​थ रथ यात्रा के कार्यक्रम का पूरा विवरण.

प्रसिद्ध जगन्ना​थ रथ यात्रा (Jagannath Rath Yatra) आज 01 जुलाई शुक्रवार से शुरु हो रही है. यह 01 जुलाई से प्रारंभ होकर 12 जुलाई तक चलेगी. हिंदू कैलेंडर के अनुसार हर साल जगन्ना​थ रथ यात्रा का प्रारंभ आषाढ़ शुक्ल द्वितीया से होता है. यह यात्रा कुल 09 दिन की होती है, जिसमें 7 दिन भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलराम और बहन सुभद्रा के साथ गुंडिचा मंदिर में रहते हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार, वहां पर उनकी मौसी का घर है. पारंपरिक तौर पर रथ यात्रा के पहले दिन तीनों रथों को गुंडिया मंदिर ले जाया जाता है. इन रथों को मोटे रस्सों से खींचा जाता है. पुरी के ज्योतिषाचार्य डॉ. गणेश मिश्र से जानते हैं जगन्ना​थ रथ यात्रा से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें.

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जगन्नाथ रथ यात्रा 2022 कार्यक्रम
छेरा पहरा: 01 जुलाई, दोपहर 02:30 बजे से 03:30 बजे तक
जगन्ना​थ मंदिर पुरी के गजपति दिव्यसिंह देव दोपहर 02:30 बजे भगवान जगन्नाथ के रथ
नंदीघोष, बलराम के रथ तालध्वज और सुभद्रा जी के रथ दर्पदलन पर ‘छेरा पहरा’ की रस्म करेंगे. यह रस्म 03:30 बजे तक चलेगी. इसके बाद इन विशाल रथों पर लकड़ी के घोड़ों को लगाया जाएगा. उसी दौरान इन रथों के सारथी भी स्थापित होंगे.

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रथ यात्रा का शुभारंभ का समय
01 जुलाई को शाम 04:00 बजे से जगन्नाथ रथ यात्रा प्रारंभ हो जाएगी. भक्त 3 किलोमीटर तक इन रथों को खींचकर ले जाएंगे. सबसे आगे बलराम जी का रथ तालध्वज, उसके बाद सुभद्रा जी का रथ दर्पदलन और फिर भगवान जगन्नाथ का रथ नंदीघोष होगा.

रथ यात्रा की वापसी
गुंडीचा मंदिर में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा जी 09 जुलाई तक रहेंगे और उस दिन ही वापसी यात्रा शुरु होगी.

‘सुना बेशा’ रस्म
तीनों रथ जब पुरी के मंदिर के सिंह द्वार पर पहुंचेंगे तो 10 जुलाई को
देवशयनी एकादशी पर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा जी के लिए ‘सुना बेशा’ रस्म की जाएगी. इसमें इनको स्वर्ण आभूषण पहनाया जाता है.

‘अधर पना’ रस्म
अगले दिन 11 जुलाई को अधर पना भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा जी को पिलाया जाता है. अधर पना पुरी के कुएं से निकाले गए पानी, मक्खन, पनीर, शक्कर, केला, जायफल, काली मिर्च और अन्य मसालों को डालकर बनाया जाता है.

‘नीलाद्री बिजे’
12 जुलाई की देर रात में नीलाद्री बिजे रस्म होती है, जिसमें भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा जी को श्रीमंदिर के गर्भगृह के रत्नसिंहासन पर पुन: विराजमान कराया जाता है. इस प्रकार से जगन्नाथ रथ यात्रा का समापन होता है.

Tags: Dharma Aastha, Jagannath Rath Yatra

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