Janaki Jayanti 2021: धरती से हुआ था माता सीता का जन्म? जानें रहस्य, पढ़ें आरती

धरती से हुआ था माता सीता का जन्म? जानें

धरती से हुआ था माता सीता का जन्म? जानें

Janaki Jayanti 2021 Katha- सीता (Mata Sita Birth) का अवतरण धरती से हुआ था लेकिन राजा जनक एवं उनकी पत्नी सुनयना से सीता का पालन-पोषण किया था...

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  • Last Updated: March 6, 2021, 11:26 AM IST
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Janaki Jayanti 2021: आज जानकी जयंती है. महिलाओं ने आज मां सीता को प्रसन्न करने के लिए व्रत रखा है. आज महिलाएं जीवनसाथी और संतान की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं. शाम को पूजा पाठ के बाद व्रत खोलती हैं और माता सीता की पूजा करती हैं एवं आरती का पाठ करती हैं. मां सीता को मां लक्ष्मी का अवतार माना जाता है. लेकिन पुराणों में उनके जीवन का जो वर्णन है वो काफी कष्टप्रद है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सीता का अवतरण धरती से हुआ था लेकिन राजा जनक एवं उनकी पत्नी सुनयना से सीता का पालन-पोषण किया था. आइए जानते हैं धरती से सीता के जन्म की कथा एवं माता सीता की आरती...

धरती से सीता के जन्म की कथा :

वाल्मिकी रामायण के अनुसार, एक बार मिथिला में पड़े भयंकर सूखे से राजा जनक बेहद परेशान हो गए थे, तब इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए उन्हें एक ऋषि ने यज्ञ करने और धरती पर हल चलाने का सुझाव दिया.



ऋषि के सुझाव पर राजा जनक ने यज्ञ करवाया और उसके बाद राजा जनक धरती जोतने लगे. तभी अचानक उनका हल खेत में एक जगह फंस गया और काफी प्रयास के बाद भी नहीं निकला. उस जगह की जब मिट्टी हटवाई गई तो वहां से एक सुन्दर संदूक में एक छोटी बच्ची निकली. कन्‍या के बाहर निकलते ही राज्‍य में बारिश शुरू हो गई.
राजा जनक की कोई संतान नहीं थी, इसलिए उस कन्या को हाथों में लेकर उन्हें पिता प्रेम की अनुभूति हुई. राजा जनक ने उस कन्या को सीता नाम दिया और उसे अपनी पुत्री के रूप में अपना लिया. माता सीता के प्राकट्य की तिथि को ही उनके जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है.

माता सीता आरती:

आरति श्रीजनक-दुलारी की.
सीताजी रघुबर-प्यारी की..
जगत-जननि जगकी विस्तारिणि,
नित्य सत्य साकेत विहारिणि.

परम दयामयि दीनोद्धारिणि, मैया भक्तन-हितकारी की..
आरति श्रीजनक-दुलारी की.

सतीशिरोमणि पति-हित-कारिणि,
पति-सेवा-हित-वन-वन-चारिणि.
पति-हित पति-वियोग-स्वीकारिणि,
त्याग-धर्म-मूरति-धारी की..
आरति श्रीजनक-दुलारी की..

विमल-कीर्ति सब लोकन छाई,
नाम लेत पावन मति आई.
सुमिरत कटत कष्ट दुखदायी,
शरणागत-जन-भय-हारी की..
आरति श्रीजनक-दुलारी की.
सीताजी रघुबर-प्यारी की.. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)
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