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Jaya Ekadashi 2020: जया एकादशी आज, जानें शुभ मुहूर्त में पूजा की सटीक विधि

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Updated: February 5, 2020, 11:56 AM IST
Jaya Ekadashi 2020: जया एकादशी आज, जानें शुभ मुहूर्त में पूजा की सटीक विधि
एकादशी तिथि की सुबह स्नान आदि करने के बाद भगवान विष्णु का ध्यान करके व्रत का संकल्प करें.

जया एकादशी (Jaya Ekadashi 2020) : इस व्रत को पूरे विधि-विधान और श्रद्धा के साथ करता है मृत्यु के बाद उसे मुक्ति की प्राप्ति होती है और उसे नीच योनियों में भटकना नहीं पड़ता है.

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  • Last Updated: February 5, 2020, 11:56 AM IST
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जया एकादशी (Jaya Ekadashi 2020) : हिन्‍दू पांचांग में आज 05 फरवरी, बुधवार को जया एकादशी (Jaya Ekadashi 2020) है. इस व्रत का काफी धार्मिक महत्व है. इस व्रत को मंगलकारी फल देने वाला माना जाता है. यह भी मान्यता है कि इस व्रत को करने वाले जातक के सारे पाप कर्मों का नाश होता है. हिंदू धर्म में ब्रह्म हत्या को सबसे बड़ा पाप माना गया है. इस व्रत को करने से इस पाप से भी मुक्ति मिलती है. इस व्रत को लेकर यह मान्यता भी प्रचलित है कि जो भी जातक इस व्रत को पूरे विधि-विधान और श्रद्धा के साथ करता है मृत्यु के बाद उसे मुक्ति की प्राप्ति होती है और उसे नीच योनियों में भटकना नहीं पड़ता है. आइए जानते हैं कि क्या है आज जया एकादशी की पूजा का शुभ मुहूर्त.....

जया एकादशी शुभ मुहूर्त-
जया एकादशी आज बुधवार 5 फरवरी 2020 को मनाई जा रही है. भक्त आज भगवान विष्णु की पूजा करेंगे और व्रत रखेंगे.
एकादशी तिथि की शुरुआत: 4 फरवरी 2020 को रात 9 बजकर 49 मिनट से हो चुकी है. लेकिन हिंदू धर्म में रात के समय को पूजा-पाठ के लिए शुभ नहीं माना जाता है. इसलिए पूजा सुबह की जायेगी.

एकादशी तिथि का समापन आज 5 फरवरी 2020 को रात 9 बजकर 30 मिनट तक हो जाएगा।
एकादशी व्रत के पारण का समय: जो भक्त आज जया एकादशी का व्रत रखेंगे वो 6 फरवरी 2020 को सुबह 7 बजकर 7 मिनट से 9 बजकर 18 मिनट तक व्रत का पारण कर सकते हैं अर्थात व्रत खोल सकते हैं.
जया एकादशी की पूजा विधि:-जया एकादशी के दिन भक्त तड़के सुबह उठकर स्नान और नित्यकर्म निपटाने के बाद भगवान विष्णु का स्मरण करें और इसके साथ ही जया एकादशी के व्रत का संकल्प लें.

-पूजाघर की साफ़ सफाई के बाद भगवान विष्णु को नैवेद्य, धूप , दीप, चंदन, फल, तिल एवं पंचामृत अर्पित करें और उनकी पूजा करें.

-पूरे दिन भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए व्रत रखें और रात के समय में फलाहार ग्रहण करें.

-द्वादशी तिथि ब्राह्मण देवता का भोजन कराएं और दक्षिणा दें. इसके बाद पूरे विधि विधान के साथ व्रत का पारण करें.

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Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.

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First published: February 5, 2020, 7:48 AM IST
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