Kaal Bhairav Jayanti 2020: काल भैरव पूजा का सटीक मुहूर्त और संपूर्ण पूजा विधि, जानें

कालाष्टमी 2020 पर कल भैरव की पूजा की जाती है (pic credit: instagram/lamichhane.grishma)

Kaal Bhairav Jayanti 2020: कालाष्टमी के दिन भगवान भैरव की पूजा अर्चना करने से व्यक्ति भयमुक्त होता है और उसके जीवन की कई परेशानियां दूर हो जाती है.मान्यता यह भी है कि इस दिन भगवान भैरव की पूजा करने से रोगों से भी मुक्ति मिलती है...

  • Share this:
    Kaal Bhairav Jayanti 2020: काल भैरव जयंती साल 2020 में दिसंबर 7 तारीख को मनाई जाएगी.काल भैरव जयंती को कालाष्टमी के नाम से भी जाना जाता है.भगवान काल भैरव को भगवान शिव का ही एक रूप माना जाता है.कालाष्टमी के दिन भगवान भैरव की पूजा अर्चना करने से व्यक्ति भयमुक्त होता है और उसके जीवन की कई परेशानियां दूर हो जाती है.मान्यता यह भी है कि इस दिन भगवान भैरव की पूजा करने से रोगों से भी मुक्ति मिलती है.

    साल 2020 में कालाष्टमी मुहूर्त

    अष्टमी तिथि की शुरुआत
    7 दिसंबर, शाम 6:49 बजे से
    अष्टमी तिथि समाप्त
    8 दिसंबर, शाम 5:19 पर

    कालाष्टमी व्रत का महत्व

    काल भैरव को भगवान शिव का रौद्र रूप माना जाता है.वह समस्त पापों और रोगों का नाश करने वाले हैं.हिंदू शास्त्रों के अनुसार कालाष्टमी के दिन श्रद्धापूर्वक वर्त रखने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है.इस दिन व्रत रखकर कुंडली में मौजूद राहु के दोष से भी मुक्ति मिलती है.इसके साथ ही शनि ग्रह के बुरे प्रभावों से भी काल भैरव की पूजा करके बचा जा सकता है.तंत्र साधन करने वाले लोगों के लिए भी कालाष्टमी का दिन बहुत खास होता है.

    काल भैरव से जुड़ी पौराणिक कथा

    हमारे पौराणिक ग्रंथों के अनुसार काल भैरव का अवतरण बुरी शक्तियों के नाश के लिए हुआ था.काल भैरव को भगवान शिव का ही अवतार माना जाता है.एक कथा के अनुसार एक बार ब्रह्मा, विष्णु और महेश में बहस हो गई और बातों-बातों में भगवान ब्रह्मा ने शिवजी की निंदा कर दी, जिसके चलते भगवान शिव के रौद्र रूप काल भैरव की उत्पत्ति हुई.ऐसा माना जाता है कि अपने जिस मुख से ब्रह्मा जी ने भगवान शिव की निंदा की थी उस सिर को काल भैरव ने काट डाला.इसके बाद भगवान शिव ने ब्रह्मा हत्या के पाप से मुक्ति के लिए काल भैरव को पृथ्वी लोक में भेजा और उनसे कहा कि अपने हाथ में ब्रह्मा जी के सिर को ले जाओ और जहां भी यह गिरेगा वहीं पर तुम्हारे सारे पापों का नाश हो जाएगा.माना जाता है कि उनका सिर काशी में गिरा था.आज भी हिंदू धर्म में आस्था रखने वाले लोग जब भी काशी जाते हैं तो काशी विश्वनाथ के दर्शनों के साथ-साथ वहां काल भैरव के दर्शन भी करते हैं.काल भैरव का आशीर्वाद पाकर कई कष्टों से मुक्ति मिलती है. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.) (साभार-AstroSage.com)