कबीर के मशहूर दोहे: पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय...

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Updated: September 11, 2019, 3:06 PM IST
कबीर के मशहूर दोहे: पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय...
कबीर दास के दोहे

आज हम आपके लिए लेकर आए हैं संत कबीर के कुछ मशहूर दोहे जिन्हें पढ़कर आप जीवन, प्रेम, भक्त और सूफियाना एहसास से सराबोर हो जाएंगे...

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संत कबीर दास निर्गुण भक्ति काव्धारा के प्रमुख कवियों से एक हैं. अपने दोहों और रचनाओं में उन्होंने ईश्वर को प्रेमी और खुद को प्रेमिका माना और अपने दोहों के माध्यम से जीवन और संसार का सार समझाने की कोशिश की है. अपनी रचनाओं में कबीर ने कई भाषाओं का प्रयोग किया है. शायद यही वजह है कि उनकी भाषा को पंचमेल खिचड़ी कहा जाता है. कबीर के दोहों को पढ़कर मन एक सूफियाना एहसास में गोते लगाता है इसीलिए कहीं कहीं इनकी भाषा को सधुक्कड़ी भी कहा गया है. कबीर ने बीजक, कबीर ग्रंथावली, कबीर रचनावली, साखी ग्रंथ, अनुराग सागर की रचना की जोकि संसार भर में काफी प्रसिद्ध है. आज हम आपके लिए लेकर आए हैं संत कबीर के कुछ मशहूर दोहे जिन्हें पढ़कर आप जीवन, प्रेम, भक्त और सूफियाना एहसास से सराबोर हो जाएंगे...

कबीर के मशहूर दोहे:

1.दुख में सुमरिन सब करे, सुख में करे न कोय ।
जो सुख में सुमरिन करे, दुख काहे को होय ॥

कबीर के दोहे
कबीर के दोहे


2.छिन ही चढ़े छिन ही उतरे, सो तो प्रेम न होय ।
अघट प्रेम पिंजरे बसे, प्रेम कहावे सोय ॥
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कबीर दास के दोहे
कबीर दास के दोहे


3. .पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ ।
पंडित भया न कोय, ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय॥

कबीर दास के दोहे
कबीर दास के दोहे


4.दुर्बल को न सताइए, जाकि मोटी हाय ।
बिना जीव की हाय से, लोहा भस्म हो जाय ॥

कबीर दास के दोहे
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First published: September 11, 2019, 3:05 PM IST
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