Kalashtami 2021 Date: कालाष्टमी आज या कल? जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि एवं काल भैरव का स्वरुप

भगवान काल भैरव को शिव का रूप माना जाता है (credit: instagram/bhurtel)

भगवान काल भैरव को शिव का रूप माना जाता है (credit: instagram/bhurtel)

Kalashtami 2021 Date Shubh Muhurat Puja Vidhi Kaal Bhairav Swaroop- भगवान भैरव के भक्तों का अनिष्ट करने वालों को तीनों लोकों में कोई शरण नहीं दे सकता. कालाष्टमी के दिन भगवान भैरव की पूजा अर्चना करने से व्यक्ति भयमुक्त होता है

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 5, 2021, 10:09 AM IST
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Kalashtami 2021 Date Shubh Muhurat Puja Vidhi Kaal Bhairav Swaroop- कालाष्टमी हर माह की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है. फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि यानी कि आज 5 मार्च शुक्रवार को कालाष्टमी मनाई जाएगी. हालांकि, कालाष्टमी शाम को अष्टमी लगने के बाद ही शुरू होगी. ऐसे में व्रत कल यानी कि 6 मार्च को ही रखा जाएगा क्योंकि व्रत उदया तिथि में रखे जाते हैं. कालाष्टमी के दिन भगवान शिव का विग्रह रूप माने जाने वाले कालभैरव (Kaal Bhairav) की पूजा अर्चना की जाती है. कालभैरव को शिव (God Shiva) का पांचवा अवतार माना गया है. आइए जानते हैं कालाष्टमी का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि ...

कालाष्टमी का शुभ मुहूर्त:

कालाष्टमी का आरंभ- 5 मार्च, शुक्रवार शाम 7 बजकर 54 मिनट से (अष्टमी तिथि 5 मार्च शाम से शुरू हो रही है.)



फाल्गुन कृष्ण अष्टमी समाप्त- 6 मार्च, रविवार शाम 6 बजकर 10 मिनट पर.
भगवान काल भैरव का स्वरुप:
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, कालभैरव के दो रूप हैं- पहला बटुक भैरव जो भक्तों को अभय देने वाले सौम्य रूप में प्रसिद्ध हैं तो वहीं काल भैरव अपराधिक प्रवृतियों पर नियंत्रण करने वाले भयंकर दंडनायक हैं. भगवान भैरव के भक्तों का अनिष्ट करने वालों को तीनों लोकों में कोई शरण नहीं दे सकता. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, कालाष्टमी के दिन भगवान भैरव की पूजा अर्चना करने से व्यक्ति भयमुक्त होता है और उसके जीवन की कई परेशानियां दूर हो जाती है.मान्यता यह भी है कि इस दिन भगवान भैरव की पूजा करने से रोगों से भी मुक्ति मिलती है.

भगवान काल से काल भी भयभीत रहता है इसलिए इन्हें काल भैरव एवं हाथ में त्रिशूल, तलवार और डंडा होने के कारण इन्हें दंडपाणि भी कहा जाता है. कहते हैं काल भैरव की विधिवत पूजा करने से मन के भय दूर हो जाते हैं और सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. साथ ही कालभैरव की पूजा करने वालों से नकारात्मक शक्तियां भी दूर रहती हैं. काल भैरव की पूजा करने से शनि और राहू जैसे ग्रह भी शांत हो जाते हैं. कालभैरव की पूजा करने से शत्रु बाधा और दुर्भाग्य दूर होता है और सौभाग्य जाग जाता है.
काल-भैरव व्रत की विधि:

यह उपवास करने वालों को सुबह नहा-धोकर भगवान काल भैरव की पूजा अर्चना करनी चाहिए. व्रती को पूरे दिन उपवास करना चाहिए और रात्रि के समय धूप, दीप, धूप,काले तिल,उड़द, सरसों के तेल का दिया बनाकर भगवान काल भैरव की आरती गानी चाहिए.

मान्यता के अनुसार, भगवान काल भैरव का वाहन कुत्ता है इसलिए जब व्रती व्रत खोलें तो उसे अपने हाथ से कुछ पकवान बनाकर सबसे पहले कुत्ते को भोग लगाना चाहिए. ऐसा करने से भगवान काल भैरव की कृपा आती है. पूरे मन से काल भैरव भगवान के पूजा करने पर भूत, पिचाश, प्रेत और जीवन में आने वाली सभी बाधाएं अपने आप ही दूर हो जाती हैं. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
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