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Kalashtami 2021: कालाष्टमी पर पढ़ें कालभैरव चालीसा एवं आरती, हर दुख से मिलेगी मुक्ति

कालभैरव चालीसा एवं आरती पढ़ें (credit: instagram/mayank__.joshi)

कालाष्टमी 2021 (Kalashtami 2021 Date): कालभैरव भगवान शिव (God Shiva) का पांचवा अवतार हैं. उन्हें भगवान शिव का विग्रह रूप माना गया है. कालाष्टमी के दिन भगवान भैरव की पूजा अर्चना करने से जीवन में आने वाली बाधाओं का नाश हो जाता है और जातक सुखी और निरोगी रहता है.

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    कालाष्टमी 2021 (Kalashtami 2021 Date): कालाष्टमी कल यानी कि 4 फ़रवरी गुरुवार को पड़ रही है. कालाष्टमी भगवान कालभैरव (Kaal Bhairav) को समर्पित मानी जाती है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, कालभैरव भगवान शिव (God Shiva) का पांचवा अवतार हैं. उन्हें भगवान शिव का विग्रह रूप माना गया है. काल भैरवके दो रूप हैं पहला बटुक भैरव जो भक्तों को अभय देने वाले सौम्य रूप में प्रसिद्ध हैं तो वहीं काल भैरव अपराधिक प्रवृतियों पर नियंत्रण करने वाले भयंकर दंडनायक हैं.

    भगवान भैरव के भक्तों का अनिष्ट करने वालों को तीनों लोकों में कोई शरण नहीं दे सकता. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, कालाष्टमी के दिन भगवान भैरव की पूजा अर्चना करने से जीवन में आने वाली बाधाओं का नाश हो जाता है और जातक सुखी और निरोगी रहता है. काल भैरव की पूजा के बाद उनकी चालीसा और आरती का पाठ जरूर करना चाहिए. काल भैरव की चालीसा और आरती पढ़ें यहां....

    इसे भी पढ़ें: Kalashtami 2021 Date: कालाष्टमी कब है? जानें तारीख, शुभ मुहूर्त एवं पूजा विधि

    दोहा

    श्री गणपति गुरु गौरी पद प्रेम सहित धरि माथ।

    चालीसा वंदन करो श्री शिव भैरवनाथ॥

    श्री भैरव संकट हरण मंगल करण कृपाल।

    श्याम वरण विकराल वपु लोचन लाल विशाल॥

    जय जय श्री काली के लाला। जयति जयति काशी- कुतवाला॥

    जयति बटुक- भैरव भय हारी। जयति काल- भैरव बलकारी॥

    जयति नाथ- भैरव विख्याता। जयति सर्व- भैरव सुखदाता॥

    भैरव रूप कियो शिव धारण। भव के भार उतारण कारण॥

    भैरव रव सुनि हवै भय दूरी। सब विधि होय कामना पूरी॥

    शेष महेश आदि गुण गायो। काशी- कोतवाल कहलायो॥

    जटा जूट शिर चंद्र विराजत। बाला मुकुट बिजायठ साजत॥

    कटि करधनी घुंघरू बाजत। दर्शन करत सकल भय भाजत॥

    जीवन दान दास को दीन्ह्यो। कीन्ह्यो कृपा नाथ तब चीन्ह्यो॥

    वसि रसना बनि सारद- काली। दीन्ह्यो वर राख्यो मम लाली॥

    धन्य धन्य भैरव भय भंजन। जय मनरंजन खल दल भंजन॥

    कर त्रिशूल डमरू शुचि कोड़ा। कृपा कटाक्ष सुयश नहिं थोडा॥

    जो भैरव निर्भय गुण गावत। अष्टसिद्धि नव निधि फल पावत॥

    रूप विशाल कठिन दुख मोचन। क्रोध कराल लाल दुहुं लोचन॥

    अगणित भूत प्रेत संग डोलत। बम बम बम शिव बम बम बोलत॥

    रुद्रकाय काली के लाला। महा कालहू के हो काला॥

    बटुक नाथ हो काल गंभीरा। श्‍वेत रक्त अरु श्याम शरीरा॥

    करत नीनहूं रूप प्रकाशा। भरत सुभक्तन कहं शुभ आशा॥

    रत्‍न जड़ित कंचन सिंहासन। व्याघ्र चर्म शुचि नर्म सुआनन॥

    तुमहि जाइ काशिहिं जन ध्यावहिं। विश्वनाथ कहं दर्शन पावहिं॥

    जय प्रभु संहारक सुनन्द जय। जय उन्नत हर उमा नन्द जय॥

    भीम त्रिलोचन स्वान साथ जय। वैजनाथ श्री जगतनाथ जय॥

    महा भीम भीषण शरीर जय। रुद्र त्रयम्बक धीर वीर जय॥

    अश्‍वनाथ जय प्रेतनाथ जय। स्वानारुढ़ सयचंद्र नाथ जय॥

    निमिष दिगंबर चक्रनाथ जय। गहत अनाथन नाथ हाथ जय॥

    त्रेशलेश भूतेश चंद्र जय। क्रोध वत्स अमरेश नन्द जय॥

    श्री वामन नकुलेश चण्ड जय। कृत्याऊ कीरति प्रचण्ड जय॥

    रुद्र बटुक क्रोधेश कालधर। चक्र तुण्ड दश पाणिव्याल धर॥

    करि मद पान शम्भु गुणगावत। चौंसठ योगिन संग नचावत॥

    करत कृपा जन पर बहु ढंगा। काशी कोतवाल अड़बंगा॥

    देयं काल भैरव जब सोटा। नसै पाप मोटा से मोटा॥

    जनकर निर्मल होय शरीरा। मिटै सकल संकट भव पीरा॥

    श्री भैरव भूतों के राजा। बाधा हरत करत शुभ काजा॥

    ऐलादी के दुख निवारयो। सदा कृपाकरि काज सम्हारयो॥

    सुन्दर दास सहित अनुरागा। श्री दुर्वासा निकट प्रयागा॥

    श्री भैरव जी की जय लेख्यो। सकल कामना पूरण देख्यो॥

    दोहा

    जय जय जय भैरव बटुक स्वामी संकट टार।

    भगवान श्री कालभैरव की आरती:
    जय भैरव देवा, प्रभु जय भैंरव देवा।
    जय काली और गौरा देवी कृत सेवा।।

    तुम्हीं पाप उद्धारक दुख सिंधु तारक।
    भक्तों के सुख कारक भीषण वपु धारक।।

    वाहन शवन विराजत कर त्रिशूल धारी।
    महिमा अमिट तुम्हारी जय जय भयकारी।।

    तुम बिन देवा सेवा सफल नहीं होंवे।
    चौमुख दीपक दर्शन दुख सगरे खोंवे।।

    तेल चटकि दधि मिश्रित भाषावलि तेरी।
    कृपा करिए भैरव करिए नहीं देरी।।

    पांव घुंघरू बाजत अरु डमरू डमकावत।।
    बटुकनाथ बन बालक जन मन हर्षावत।।

    बटुकनाथ जी की आरती जो कोई नर गावें।
    कहें धरणीधर नर मनवांछित फल पावें।।

    कृपा दास पर कीजिए शंकर के अवतार॥ (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)
    Published by:Bhagya Shri Singh
    First published: