कालाष्टमी 2019: इसी दिन भैरव रूप में प्रकट हुए थे भगवान शिव, है विशेष महत्व

कालाष्टमी 2019: माना जाता है कि इसी दिन भगवान शिव भैरव के रूप में प्रकट हुए थे. भक्त इस दिन शिव की पूजा करने के साथ ही उनके लिए उपवास रखते हैं

News18Hindi
Updated: August 5, 2019, 1:11 PM IST
कालाष्टमी 2019: इसी दिन भैरव रूप में प्रकट हुए थे भगवान शिव, है विशेष महत्व
कालाष्टमी 2019: माना जाता है कि इसी दिन भगवान शिव भैरव के रूप में प्रकट हुए थे. भक्त इस दिन शिव की पूजा करने के साथ ही उनके लिए उपवास रखते हैं
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Updated: August 5, 2019, 1:11 PM IST
आज यानी 5 अगस्त को नागपंचमी और सावन के तीसरे सोमवार होने के अलावा कालाष्टमी भी है. ये संयोग पहली बार बना है जब ये तीनों ही शुभ दिन एक साथ आए हैं. हर महीने में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दौरान कालाष्टमी मनाया जाता है. कालाष्टमी को कालभैरव जयंती के रूप में भी जाना जाता है. माना जाता है कि इसी दिन भगवान शिव भैरव के रूप में प्रकट हुए थे. भक्त इस दिन शिव की पूजा करने के साथ ही उनके लिए उपवास रखते हैं. आज शिव भक्तों के लिए सचमुच ही बड़ा दिन है.

पूजा विधि

काल भैरव की पूजा करने से मनोवांछित फल मिलता है. भगवान शिव के भैरव रूप की उपासना करने वाले भक्तों को भैरवनाथ की पूजा षोड्षोपचार सहित करनी चाहिए. षोड्षोपचार यानी पूजन के सोलह अंगा या कृत्य आसन, स्वागत, अर्ध्य, आचमन, मधुपर्क, स्नान, वस्त्राभरण, यज्ञोपवीत, चंदन, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, तांबूल,परिक्रमा और वंदना. मान्यता के अनुसार इस दिन प्रात:काल किसी पवित्र नदी या सरोवर में स्नान करके पितरों का श्राद्ध करके भैरव जी की पूजा व व्रत करने से समस्त विघ्न समाप्त हो जाते हैं तथा दीर्घायु की प्राप्ति होती है.

कथा

एक समय भगवान विष्णु और ब्रह्मा के बीच इस बात को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ कि उनमें से श्रेष्ठ कौन है. यह विवाद इस हद तक बढ़ गया कि समाधान के लिए भगवान शिव ने एक सभा का आयोजन किया. सभा में महत्वपूर्ण ज्ञानी, ऋषि-मुनि, सिद्ध संत आदि उपस्थित थे. सभा में लिए गए निर्णय को भगवान विष्णु ने तो स्वीकार कर लिया, लेकिन ब्रह्मा इस निर्णय से संतुष्ट नहीं थे. वे महादेव का अपमान करने लगें.
भगवान शिव यह अपमान सहन न कर सके और ब्रह्मा द्वारा अपमानित किये जाने पर उन्होंने रौद्र रुप धारण कर लिया. भगवान शंकर प्रलय के रूप में नज़र आने लगे और उनका रौद्र रुप देखकर तीनों लोक भयभीत हो उठा. भगवान शिव के इसी रूद्र रूप से भगवान भैरव प्रकट हुए.

भैरव जी श्वान पर सवार थे, उनके हाथ में दंड था. हाथ में दंड होने के कारण वे 'दण्डाधिपति' कहे गए. काल भैरव का यह रूप अत्यंत भयंकर था. उनके रूप को देखकर ब्रह्मा जी को अपनी ग़लती का एहसास हुआ. वह भगवान भोलेनाथ और भैरव की वंदना करने लगे. तब जाकर भैरव ब्रह्मा एवं अन्य देवताओं और साधुओं द्वारा वंदना करने पर शांत हुए.
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Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.

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First published: August 5, 2019, 1:10 PM IST
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