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Karva Chauth 2019: क्या आप जानते हैं चांद को छलनी से क्यों देखा जाता है?

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Updated: October 15, 2019, 1:49 PM IST
Karva Chauth 2019: क्या आप जानते हैं चांद को छलनी से क्यों देखा जाता है?
चद्रंमा सुंदरता और प्रेम का प्रतीक होता है, यही कारण है कि करवा चौथ के व्रत में महिलाएं चांद की पूजा करती हैं.

करवा चौथ के अवसर पर महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखेंगी और चांद का दीदार करने के बाद ही अपना व्रत तोडेंगी.

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  • Last Updated: October 15, 2019, 1:49 PM IST
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करवाचौथ का दिन शादीशुदा महिलाओं के लिए बहुत ही खास दिन होता है. 17 अक्टूबर (गुरुवार) को करवा चौथ के अवसर पर महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखेंगी और चांद का दीदार करने के बाद ही अपना व्रत तोडेंगी. करवाचौथ पर मेहंदी लगाना सुहाग की निशानियों में से एक है. कहते हैं जिसकी मेहंदी जितनी ज्यादा रचती है उसका पति उसे उतना ज्यादा प्यार करता है. ऐसे में हर कोई पत्नी चाहती है कि उसकी मेहंदी गहरी चढ़े और बहुत दिनों तक टिकी रहे. इस विशेष दिन पर अच्छे से तैयार होने के साथ-साथ मेहंदी लगाना भी शुभ माना जाता है. इस दिन महिलाएं छलनी में दीपक रखकर चांद की पूजा भी करती है. क्या आप जानते हैं कि करवा चौथ के दिन महिलाएं चांद की पूजा क्यों करती हैं. इसके अलावा वह चांद को छलनी से ही क्यों देखती हैं. आइए आपको बताते हैं इसके पीछे का राज.

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धार्मिक आधार

धार्मिक आधार पर देखें तो कहा जाता है कि चंद्रमा भगवान ब्रह्मा का रूप हैं. एक मान्यता यह भी है कि चांद को दीर्घायु का वरदान प्राप्त है और चांद की पूजा करने से दीर्घायु प्राप्त होती है. साथ ही चद्रंमा सुंदरता और प्रेम का प्रतीक भी होता है, यही कारण है कि करवा चौथ के व्रत में महिलाएं चांद की पूजा करती हैं ताकि उनके पति को लंबी उम्र प्राप्त हो सके. वहीं चांद सुंदरता का प्रतीक है तो उसे किसी की नजर न लग जाए इसलिए ही उसे छलनी की आढ़ से देखा जाता है. पत्नी छलनी से चांद को देखकर अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती है.

पौराणिक कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार एक साहूकार की बेटी ने अपने पति की लंबी आयु के लिए करवा चौथ का व्रत रखा था पर अत्यधिक भूख की वजह से उसकी हालत खराब होने लगी थी. यह देखकर साहूकार के बेटों ने अपनी बहन से खाना खाने को कहा लेकिन साहूकार की बेटी ने खाना खाने से मना कर दिया. भाइयों से बहन की ऐसी हालत देखी नहीं गई तो उन्होंने चांद के निकलने से पहले ही एक पेड़ पर चढ़कर छलनी के पीछे एक जलता हुआ दीपक रखकर बहन से कहा कि चांद निकल आया है.

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बहन ने भाइयों की बात मान ली और दीपक को चांद समझकर अपना व्रत खोल लिया और व्रत खोलने के बाद उसके पति की मुत्यु हो गई. ऐसा कहा जाता है असली चांद को देखे बिना व्रत खोलने की वजह से ही उसके पति की मृत्यु हुई थी. तब से अपने हाथ में छलनी लेकर बिना छल-कपट के चांद को देखने के बाद पति के दीदार की परंपरा शुरू हुई है.

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.

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First published: October 15, 2019, 1:40 PM IST
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