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खाटूश्याम जी की पूजा करने से मनोकामनाएं होती हैं पूर्ण, जानें मंदिर से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण बातें

खाटूश्याम जी की पूजा करने से मनोकामनाएं होती हैं पूर्ण, जानें मंदिर से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण बातें

राजस्थान के सीकर जिले में स्थित है खाटूश्याम मंदिर.

राजस्थान के सीकर जिले में स्थित है खाटूश्याम मंदिर.

हिंदू धर्म के अनुसार, खाटूश्याम मंदिर का बहुत महत्व है. मान्यता है कि भगवान श्री कृष्ण से खाटूश्याम जी ने वरदान प्राप्त किया था कि वे कलियुग में उनके नाम श्याम से पूजे जाएंगे.

हाइलाइट्स

खाटूश्याम मंदिर खाटू गांव में स्थित है, जो जयपुर से लगभग 80 किलोमीटर दूर है.
बचपन से ही खाटूश्याम बहुत वीर योद्धा थे.
खाटूश्याम जी का बचपन में बर्बरीक नाम था.

Khatu Shyam Temple: राजस्थान के सीकर जिले में स्थित है खाटूश्याम मंदिर. यह कृष्ण भगवान के मंदिरों में सबसे अधिक प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है. आज सुबह इस मंदिर में भगदड़ मचने के कारण तीन लोगों की मौत और कुछ लोग घायल हो गए. बताया जा रहा है कि एकादशी के मौके पर खाटूश्याम के दर्शन करने हजारों की संख्या में यहां भक्त पहुंचे थे. हिंदू धर्म के अनुसार, इस मंदिर का बहुत महत्व है. मान्यता है कि भगवान श्री कृष्ण से खाटूश्याम जी ने वरदान प्राप्त किया था कि वे कलियुग में उनके नाम श्याम से पूजे जाएंगे. खाटूश्याम जी का बचपन में बर्बरीक नाम था और श्याम नाम उन्हें कृष्ण भगवान ने दिया था. कहा जाता है कि उनके बाल घुंघराले थे, इसी कारण उनका नाम बर्बरीक पड़ा. इसके अलावा, इन्हें श्याम बाबा, खाटू वाला श्याम, कलयुग का अवतार, दीनों का नाथ, खाटू नरेश आदि नामों से भी पुकारा जाता है. खाटू श्याम जी बाल अवस्था में वीर और बलशाली थे. उन्होंने युद्ध कला अपनी माता मोरवी और भगवान कृष्ण से सीखी थी.

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कौन हैं खाटूश्याम जी
खाटूश्याम जी का संबंध मध्यकालीन महाभारत से है. वे भीम के पुत्र घटोत्कच और दैत्य मूर की पुत्री मोरवी के पुत्र थे. बचपन से ही खाटूश्याम बहुत वीर योद्धा थे और उनकी इन्हीं क्षमताओं और शक्तियों से प्रसन्न होकर भगवान कृष्ण ने बाबा खाटूश्याम को कलियुग में श्याम नाम से पूजने का वरदान दिया था. खाटूश्याम मंदिर को राज्य के बेहद महत्वपूर्ण मंदिरों में से एक माना जाता है.

खाटूश्याम की पूजा करने से मनोकामनाएं होती हैं पूर्ण
भगवान श्री कृष्ण बर्बरीक के बलिदान को देखकर काफी प्रसत्र हुए थे और उन्हें वरदान दिया था कि कलियुग में वे श्याम के नाम से पूजे जाएंगे. मान्यता है कि जो भी भक्त यदि सच्चे भाव से खाटूश्याम का नाम उच्चारण करता है, तो उसका उद्धार संभव है. यदि भक्त सच्ची आस्था, प्रेम-भाव से खाटूश्याम की पूजा-अर्चना करता है, तो उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. जिदंगी के सभी दुख-दर्द दूर होते हैं. हर कार्य सफल हो सकते हैं.

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होली के मौके पर लगता है मेला
होली के पर्व के मौके पर यहां हर साल मेला भी लगता है और देश-विदेश से भक्त खाटूश्याम के दर्शन के लिए आते हैं. बताया जाता है कि फाल्गुन माह में खाटूश्याम मंदिर की स्थापना की गई थी. शुक्ल मास के 11वें दिन खाटूश्याम को मंदिर में विराजमान कराया गया था. कहा जाता है कि दीवान अभयसिंह ने 1720 ईस्वी में इस मंदिर का पुनर्निमाण करवाया था और तब से लेकर आज तक यह मंदिर वैसे ही दिखाई देती है. यहां पर एक कुंड भी स्थित है, जिसमें श्रद्धालु स्नान करते हैं.

कैसे जाएं खाटूश्याम मंदिर
खाटूश्याम मंदिर खाटू गांव में स्थित है, जो जयपुर से लगभग 80 किलोमीटर दूर है. आप यहां फ्लाइट से जाना चाहते हैं, तो जयपुर एयरपोर्ट तक जा सकते हैं और फिर वहां से टैक्सी भी ले सकते हैं. ट्रेन से आप जयपुर जा सकते हैं और टैक्सी से इस मंदिर तक पहुंच सकते हैं. दिल्ली से सड़क मार्ग से आप यहां 5-6 घंटे में पहुंच सकते हैं.

Tags: Dharma Aastha, Religion

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