Sawan 2021: सावन में शिव जी को प्रसन्न करने के लिए करें कांवड़ यात्रा, जान लें ये जरूरी बातें

कांवड़ यात्रा के दौरान कांवड़ियों को करना होता है कई नियमों का पालन-image/shutterstock

Kanwar Yatra 2021: भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए सावन के महीने में लोग व्रत-उपवास, पूजा-अर्चना, रुद्राभिषेक और जलाभिषेक जैसी चीजों की मदद लेते हैं. इसी क्रम में शामिल है कांवड़ यात्रा (Kanwar yatra), जिसकी शुरुआत सावन महीने के शुरु में होती है और इसका समापन सावन महीने के समाप्त होने के साथ होता है.

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    Sawan 2021 Kanwar Yatra Importance: हिन्दू धर्म में सावन के महीने (Shravan month) का बेहद ख़ास महत्त्व है क्योंकि ये महीना भगवान शिव (Lord Shiva) का बेहद प्रिय मास है. इसी वजह से भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए सावन के महीने में लोग व्रत-उपवास, पूजा-अर्चना, रुद्राभिषेक और जलाभिषेक जैसी चीजों की मदद लेते हैं. भगवान शिव को प्रसन्न करने के इसी क्रम में शामिल है कांवड़ यात्रा (Kanwar yatra), जिसकी शुरुआत सावन महीने के शुरु में होती है और इसका समापन सावन महीने के समाप्त होने के साथ होता है.

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    जानें कांवड़ यात्रा के बारे में

    कांवड़ यात्रा कई-कई दिनों तक चलती है. कांवड़ यात्रा में श्रद्दालु बांस की लकड़ी की टोकरी से बनी कांवड़ कंधे पर रखकर उसमें गंगा जल लेकर भगवान शिव को अर्पित करने जाते हैं. कांवड़ को किसी भी जगह पर रखना वर्जित होता है. कांवड़ ले जाने वाले इन भक्तों को कांवड़िया कहा जाता है और ये मंदिर तक नंगे पैर ही जाते हैं. अपनी शृद्धा के अनुसार कुछ कांवड़िये पैदल मंदिर तक की यात्रा करते हैं तो कुछ गाड़ियों से भी मंदिर तक जाते हैं.

    कांवड़ यात्रा का महत्त्व

    मान्यता के अनुसार जिस समय समुद्र मंथन हो रहा था उस दौरान भगवान शिव ने सृष्टि को बचाने के लिए विषपान किया था. लेकिन देवी पार्वती ने विष को भगवान शिव के शरीर में  जाने से रोक लिया था और विष उनके कंठ में ही रह गया था जिसकी वजह से भगवान का कंठ नीला पड़ गया था. (इसी वजह से भगवान शिव को  नीलकंठ भी कहा जाता है) लेकिन विष भगवान के कंठ में जाने के बाद उनका कंठ जलने लगा था, जिसको जलने से राहत देने के लिए सभी देवी-देवताओं ने उनको जल अर्पित करना शुरू कर दिया और तभी से भगवान शिव पर जल अर्पित करने और कांवड़ यात्रा निकालने के शुरुआत हुई.

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    कांवड़ यात्रा के ये होते हैं नियम

    कांवड़ यात्रा के दौरान कांवड़ियों को कुछ नियमों का पालन करना होता है. इसके तहत उनको यात्रा समूहों में करनी होती है. साथ ही यात्रा के दौरान सौंदर्य प्रसाधनों का कोई उपयोग नहीं करना होता है. कांवड़ियों को  यात्रा के दौरान फलाहार करना होता है. अगर कोई नार्मल खाना भी खाता है तो उसमें प्याज़ और लहसुन का उपयोग वर्जित होता है. साथ ही साफ़-सफाई का ध्यान भी रखना होता है. किसी तरह का नशा करना भी यात्रा के दौरान वर्जित होता है.(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

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