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Sakat Chauth 2020: कब है सकट चौथ? आखिर क्यों महिलाएं इस दिन रखती हैं निर्जला व्रत

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Updated: January 6, 2020, 6:44 AM IST
Sakat Chauth 2020: कब है सकट चौथ? आखिर क्यों महिलाएं इस दिन रखती हैं निर्जला व्रत
सकट चौथ (Sakat Chauth 2020): इस व्रत को कई नामों से जाना जाता है. इसे तिलकुटा चौथ, संकटा चौथ, माघी चतुर्थी भी कहा जाता है.

सकट चौथ (Sakat Chauth 2020): इस व्रत को कई नामों से जाना जाता है. इसे तिलकुटा चौथ, संकटा चौथ, माघी चतुर्थी भी कहा जाता है.

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  • Last Updated: January 6, 2020, 6:44 AM IST
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सकट चौथ कब है (Sakat Chauth 2020): सकट चौथ या संकष्टी चौथ हर महीने में पड़ता है, लेकिन माघ माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया को पड़ने वाले सकट चौथ का अपना अलग ही धार्मिक महत्व है. इस बार 13 जनवरी सोमवार के दिन सकट चौथ का व्रत पड़ रहा है. इस व्रत को कई नामों से जाना जाता है. इसे तिलकुटा चौथ, संकटा चौथ, माघी चतुर्थी कहा जाता है. इस दिन महिलाएं अपनी संतान की सलामती और लंबी उम्र के लिए गणेश भगवान की पूजा अर्चना करती हैं और पूरे दिन बिना कुछ खाए पिए निर्जला व्रत करती हैं. आइए जानते हैं व्रत का शुभ मुहूर्त और महत्व...

सकट चौथ का शुभ मुहूर्त:
सकट चौथ को चंद्रमा उदय होने का समय- रात 9 बजे
चतुर्थी तिथि की शुरुआत 13 जनवरी को शाम 5 बजकर 32 मिनट से

चतुर्थी तिथि का समापन- 14 जनवरी को दोपहर 2 बजकर 49 मिनट पर.

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सकट चौथ का धार्मिक महत्व:संकष्टी चतुर्थी के दिन गणेश की पूजा के लिए मान्यता है कि ऋषि भारद्वाज और माता पार्वती का पुत्र अंगारक एक महान ऋषि और भगवान गणेश के भक्त थे. उन्होनें भगवान गणेश की पूजा करके उनसे आशीर्वाद मांगा. माघ कृष्ण चतुर्थी के दिन भगवान गणेश ने उन्हें आशीर्वाद दिया और उनसे वरदान मांगने के लिए कहा. उन्होंने अपनी इच्छा जाहिर करते हुए कहा कि वो चाहते हैं कि उनका नाम हमेशा के लिए भगवान गणेश से जुड़ जाए.

सकट चौथ पूजा विधि:

हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा और व्रत करना फलदायी माना जाता है. इस दिन गणेश भगवान के साथ ही चंद्र देव की भी पूजा-अर्चना की जाती है. महिलाएं पूरा दिन निर्जला उपवास रहने के बाद रात में जब चंद्रमा दिखाई पड़ता है. तो उसे कुश से अर्घ्य देकर छोटा सा हवन करती हैं.

हवनकुंड की परिक्रमा के बाद महिलाएं चंद्र देव के दर्शन करते हुए हाथ जोड़ कर उनसे अपने बच्चों की सलामती के लिए प्रार्थना करती हैं. इसके बाद महिलाएं दूध और शकरकंद खाकर अपना व्रत खोलती हैं. हालांकि अनाज अलगे दिन सुबह पूजा के बाद ही ग्रहण किया जाता है. पूजा करते समय गणेश भगवान का मंत्र- 'ॐ गं गणपतयै नम:' बोलते हुए 21 दूर्वा घास अर्पित करें.गणेश भगवान को बूंदी के 21 लड्डुओं का भोग लगाएं.

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.

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First published: January 6, 2020, 6:44 AM IST
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