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Pitru Paksha 2021: पितृपक्ष में कौन कर सकता है श्राद्ध, जानें क्या हैं नियम

बेटी का बेटा यानी नवासा श्राद्ध कर्म करने का अधिकार रखता है.

बेटी का बेटा यानी नवासा श्राद्ध कर्म करने का अधिकार रखता है.

Pitru Paksha 2021: पितृ पक्ष (Pitru Paksha) में कुछ नियमों (Rules) का पालन करना भी जरूरी माना गया है. इनके तहत शास्त्रों में ये बताया गया है कि पितरों का श्राद्ध कौन कर सकता है.

  • News18Hindi
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    Pitru Paksha 2021: पितृपक्ष (Pitru Paksha) 20 सितंबर से शुरू हो चुके हैं. इनका समापन 6 अक्टूबर को अमावस्या (Amavasya) के दिन होगा. इस वर्ष 26 सितम्बर को पितृ पक्ष की कोई तिथि नहीं है. हमारे जो परिजन अपनी देह का त्याग कर इस दुनिया विदा हो जाते हैं, उनकी आत्मा की शांति के लिए पितृ पक्ष के इन दिनों में श्राद्ध-तर्पण कर्म किये जायेंगे. लेकिन इस  दौरान पितरों की श्राद्ध तिथि के दिन शास्त्रों में कुछ नियमों (Rules) का पालन करना भी जरूरी माना गया है. जिनके तहत ये बताया गया है कि पितृ पक्ष में पितरों का श्राद्ध कौन कर सकता है. जिससे श्राद्ध का उद्देश्य पूरा हो सके. आइये जानते हैं इनके बारे में.

    ये भी पढ़ें: Pitru Paksha 2021: पितरों की मुक्ति के लिए तर्पण के समय जपें ये मंत्र

    कौन कर सकता है श्राद्ध

    शास्त्रों के अनुसार श्राद्ध करने का पहला अधिकार बड़े पुत्र का है.

    बेटा शादी के बाद पत्नी संग मिलकर श्राद्ध तर्पण कर सकता है.

    बड़ा बेटा जीवित न होने की स्थिति में छोटा पुत्र श्राद्ध कर सकता है.

    बेटा न होने की स्थिति में बेटे का बेटा यानी पोता श्राद्ध कर्म कर सकता है.

    जिसके बेटा न हो तो उसके भाई-भतीजे श्राद्ध कर्म कर सकते हैं.

    अगर किसी व्यक्ति के केवल बेटी ही हो, तो ऐसे में बेटी का बेटा यानी नवासा श्राद्ध कर्म करने का अधिकार रखता है.

    ये भी पढ़ें: Pitru Paksha 2021: पितरों को प्रसन्न करने के लिए पितृ पक्ष में लगाएं ये पौधे

    इन बातों का भी रखें ध्यान

    पितरों की श्राद्ध तिथि के दिन ब्राह्मणों को यथाशक्ति भोजन करवाएं.

    अगर आप जनेऊ धारण करते हैं, तो पिंडदान के समय इसको बाएं की जगह दाएं कंधे पर रखें.

    हमेशा पिंडदान चढ़ते सूर्य के समय में करें, बहुत सुबह या अंधेरे में ये कर्म नहीं किया जाता है.

    पिंडदान कांसे, तांबे या चांदी के बर्तन में या फिर प्लेट या पत्तल में करें.

    ध्यान रखें कि श्राद्ध कर्म करते समय आपका मुख दक्षिण दिशा की ओर होना चाहिए.

    श्राद्ध कर्म में पंचबली भोग लगाना ज़रूरी है, इसके तहत देव, गाय, कुकुर, कौआ चींटी को भोग ज़रूर खिलाएं.

    इस बात का भी ध्यान रखें कि श्राद्ध के दौरान घर में किसी तरह का कलेश न हो.

    पितृपक्ष के दिनों में किसी भी तरह का शुभ कार्य न करें.

    इन दिनों में जेवर, कपड़े, वाहन, दुकान और मकान जैसी कोई भी चीज न खरीदें.(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

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