लाइव टीवी

Kumbh Sankranti 2020: कुंभ संक्रांति पर करें ये काम, बढ़ेगा मान, सम्मान, मिलेगा शुभ फल

News18Hindi
Updated: February 13, 2020, 7:29 AM IST
Kumbh Sankranti 2020: कुंभ संक्रांति पर करें ये काम, बढ़ेगा मान, सम्मान, मिलेगा शुभ फल
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कुंभ संक्रांति का काफी महत्व होता है.

कुंभ संक्रांति (Kumbh Sankranti 2020): कुंभ संक्रांति के दिन हिंदू धर्म के सभी देवता पवित्र नदियों गंगा, यमुना, सरस्वती, गोदावरी, शिप्रा में स्नान का पुण्य लेने आते हैं. यही वजह है कि इस संक्रांति का महत्व हिंदू धर्म के लोगों के लिए काफी बढ़ जाता है...

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 13, 2020, 7:29 AM IST
  • Share this:
कुंभ संक्रांति (Kumbh Sankranti 2020): हिंदू पंचांग के अनुसार आज 13 फरवरी को कुंभ संक्रांति है. हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कुंभ संक्रांति का काफी महत्व होता है. हर साल सूर्य की गति में बदलाव के कारण ही कुंभ संक्रांति लगती है. मान्यता है कि कुंभ संक्रांति के दिन हिंदू धर्म के सभी देवता पवित्र नदियों गंगा, यमुना, सरस्वती, गोदावरी, शिप्रा में स्नान का पुण्य लेने आते हैं. यही वजह है कि इस संक्रांति का महत्व हिंदू धर्म के लोगों के लिए काफी बढ़ जाता है. संक्रांति पर कुंभ मेला भी लगता है. आइए जानते हैं इस बारे में...

कुंभ संक्रांति का शुभ मुहूर्त:
कुंभ संक्रांति की तारीख: 13 फ़रवरी गुरुवार को कुंभ संक्रांति मनाई जा रही है.
कुंभ संक्रांति की शुरुआत: सुबह 9 बजकर 22 मिनट से संक्रांति लग जाएगी.

कुंभ संक्रांति का समापन: दोपहर 3 बजकर 18 मिनट तक रहेगी.
इसकी कुल अवधि 5 घंटे 56 मिनट है.

कुंभ संक्रांति पर गंगा स्नान का शुभ मुहूर्त जानें
कुंभ संक्रांति पर गंगा स्नान का शुभ मुहूर्त जानें
कुंभ संक्रांति का महा पुण्य काल:
कुंभ संक्रांति का महापुण्य काल: दोपहर 1 बजकर 27 मिनट से शुरू होगा.
कुंभ संक्रांति का महापुण्य काल समापन: दोपहर 3 बजकर 18 मिनट पर खत्म हो जाएगा.

कुंभ संक्रांति पर करें ये काम:
कुंभ संक्रांति पर गंगा स्नान का काफी महत्व है. इस दिन गंगा स्नान के बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें. हाथ जोड़कर उनकी उपासना करें और 'ॐ सूर्याय नमः' मंत्र का पाठ करें. इसके अलावा आदित्य ह्रदय स्रोत का भी पाठ कर सकते हैं.

सूर्य के एक राशि से दूसरी राशि में संक्रमण करने को संक्रांति कहते हैं
सूर्य के एक राशि से दूसरी राशि में संक्रमण करने को संक्रांति कहते हैं


पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जो जातक इस दिन शुद्ध मन से सूर्य की पूजा अर्चना करते हैं उनका स्वास्थ्य बेहतर रहता है और उनके परिवार में भी रोग दोष नहीं होते हैं. ऐसे जातकों पर सूर्य देव की कृपा बनी रहती है और उन्हें जीवन में मान, सम्मान, पद, प्रतिष्ठा भी प्राप्त होते हैं.

भगवद पुराण में भी है जिक्र:
भगवद पुराण में भी संक्रांति के दौरान कुंभ मेले का उल्लेख आता है. इस दिन लोग गंगा में स्नान कर पुण्य का लाभ लेते हैं. ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक़, जब सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में जाता है तो इसे संक्रमण कहते हैं. इसे संक्रांति कहा जाता है. जानकारी के अनुसार एक साल में 12 बार सूर्य राशि परिवर्तन करता है जिस वजह से 12 बार संक्रांति लगती है. लेकिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, केवल 4 संक्रांतियां ही धर्मिक महत्व वाली होती हैं.

इसे भी पढ़ें: ओशो: तुम्हें खुशी इसलिए अधिक रास आती है क्योंकि... 

इसे भी पढ़ें: February Panchang: यहां देखें फरवरी का पंचांग, जानें महीने के शुभ मुहूर्त, व्रत और त्यौहार की पूरी लिस्ट

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए धर्म से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: February 13, 2020, 7:28 AM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर