Shani Pradosh Vrat 2020: सावन महीने का अंतिम शनि प्रदोष व्रत आज, जानें पूजा विधि और महत्व

Shani Pradosh Vrat 2020: सावन महीने का अंतिम शनि प्रदोष व्रत आज, जानें पूजा विधि और महत्व
शनि दोषों से मुक्ति पाने के लिए और भगवान शिव की कृपा के लिए यह शनि प्रदोष व्रत बहुत ही शुभ फलदायी है.

प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat) में भगवान शिव (Lord Shiva) की पूजा आराधना की जाती है. सावन महीने में प्रदोष व्रत पड़ने को बहुत ही शुभ माना जाता है. सावन का महीना भगवान शिव का महीना होता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 1, 2020, 10:44 AM IST
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आज यानी 1 अगस्त को सावन महीने (Sawan Month) का अंतिम शनि प्रदोष व्रत (Shani Pradosh Vrat) मनाया जा रहा है. हिंदू कैलेंडर के अनुसार शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत रखा जाता है. प्रदोष व्रत में भगवान शिव (Lord Shiva) की पूजा आराधना की जाती है. सावन महीने में प्रदोष व्रत पड़ने को बहुत ही शुभ माना जाता है. सावन का महीना भगवान शिव का महीना होता है. आज सावन महीने का दूसरा और अंतिम शनि प्रदोष है. शनि (Shani) दोषों से मुक्ति पाने के लिए और भगवान शिव की कृपा के लिए यह शनि प्रदोष व्रत बहुत ही शुभ फलदायी है. इससे पहले सावन के महीने में शनि प्रदोष 18 जुलाई को था. सावन महीने में एक साथ 2 शनि प्रदोष का संयोग 10 वर्षों के बाद बना है.

प्रदोष व्रत का महत्व
प्रदोष व्रत का हिंदू धर्म में बहुत अधिक महत्व होता है. प्रदोष व्रत कई तरह के होते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव प्रदोषकाल में कैलाश पर्वत पर प्रसन्न मुद्रा में नृत्य करते हैं. इसलिए इस दिन भगवान शिव की विशेष आराधना की जाती है. उनकी पूजा से भक्तों को भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है. भक्तों की सभी मनोकामनाएं भी पूरी होती हैं. भगवान शिव और पार्वती की पूजा से जुड़ा यह पावन व्रत का फल प्रत्येक वार के हिसाब से अलग-अलग मिलता है. सोमवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष व्रत को सोम प्रदोष या चन्द्र प्रदोष कहा जाता है. इस दिन साधक अपनी अभीष्ट कामना की पूर्ति के लिए शिव की साधना करते हैं. मंगलवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष व्रत को भौम प्रदोष कहा जाता है और इसे विशेष रूप से अच्छी सेहत और बीमारियों से मुक्ति की कामना से किया जाता है. बुधवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष व्रत को बुध प्रदोष व्रत कहते हैं. इस दिन किया जाने वाला प्रदोष व्रत सभी प्रकार की कामनाओं को पूरा करने वाला होता है. गुरुवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष व्रत को गुरु प्रदोष व्रत कहते हैं. इस दिन शत्रुओं पर विजय पाने और उनके नाश के लिए इस व्रत को किया जाता है.

शुक्रवार के दिन पड़ने वाले व्रत को शुक्र प्रदोष व्रत कहते हैं. इस दिन किए जाने वाले प्रदोष व्रत से सुख-समृद्धि और सौभाग्य का वरदान मिलता है. शनिवार के दिन किए जाने वाले प्रदोष व्रत को शनि प्रदोष कहा जाता है. इससे सारे कष्ट दूर होते हैं. सावन के महीने में शनि प्रदोष का संयोग बहुत ही फलदायी है. सावन के महीने में एक साथ भगवान शिव और शनिदेव की पूजा करने से सारे कष्ट दूर हो जाते हैं. सावन के महीने में जिन लोगों को शनि दोष की पीड़ा है, जो लोग शनि की साढ़ेसाती, महादशा और ढैय्या से परेशान रहते हैं उनके लिए यह संयोग बहुत ही लाभदायक होता है. इस दिन शनि पूजा और शिवलिंग का जलाभिषेक करने से सभी तरह की परेशानियां दूर हो जाती हैं.
प्रदोष व्रत की पूजा विधि 


प्रदोष व्रत करने के लिए जल्दी सुबह उठकर सबसे पहले स्नान करें और भगवान शिव को जल चढ़ाकर भगवान शिव का मंत्र जाप करें. इसके बाद पूरे दिन निराहार रहते हुए प्रदोषकाल में भगवान शिव को शमी, बेल पत्र, कनेर, धतूरा, चावल, फूल, धूप, दीप, फल, पान, सुपारी चढ़ाएं. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
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