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Lathmar Holi 2022: बरसाना की लट्ठमार होली आज, जानें इसका इतिहास एवं पौराणिक महत्व

बरसाना की लट्ठमार होली दुनियाभर में अपने अनोखे प्रेम और परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है.

बरसाना की लट्ठमार होली दुनियाभर में अपने अनोखे प्रेम और परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है.

Lathmar Holi 2022: ब्रज की होली (Holi) अपनी अनोखी छटा, प्रेम और परंपराओं के लिए जानी जाती है. इसमें बरसाना (Barsana) की लट्ठमार होली का तो अपना ही उल्लास है. लट्ठमार होली आज है, आइए जानते हैं कि इसका इतिहास (History) और पौराणिक महत्व क्या है?

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Lathmar Holi 2022: भारत में फाल्गुन माह का अर्थ उमंग, उल्लास और प्रेम से है. फाल्गुन माह में मथुरा और ब्रज की होली (Holi) दुनियाभर में अपनी अनोखी छटा, प्रेम और परंपराओं के लिए जानी जाती है. इसमें बरसाना की लट्ठमार होली का तो अपना ही उल्लास है. बरसाना (Barsana) की लट्ठमार होली हर साल फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाई जाती है और नंदगांव की लट्ठमार होली अगली तिथि यानी फाल्गुन शुक्ल दशमी को मनाई जाती है. लट्ठमार होली में गोपिंया हुरयारों का रंग गुलाल और लट्ठ से स्वागत करती हैं. जो एक बार यहां की होली के उत्सव में शामिल होता है, वह हमेशा के लिए उन क्षणों को अपने मन में संजो कर रख लेता है. इस साल लट्ठमार होली आज है, आइए जानते हैं कि इसका इतिहास (History) और पौराणिक महत्व (Importance) क्या है?

लट्ठमार होली 2022

इस साल लट्ठमार होली आज 11 मार्च दिन शुक्रवार को है. इस दिन बरसाना में लट्ठमार होली खेली जाएगी. अगले दिन 12 मार्च दिन शनिवार को नंदगांव में लट्ठमार होली का उत्सव मनाया जाएगा. 10 मार्च को बरसाना के लाडली जी के मंदिर से होली निमंत्रण नंदगांव के नंदमहल जाएगा, शाम को वहां से पांडा निमंत्रण स्वीकृति का संदेशा लाएगा और लाडली जी के मंदिर में लड्डू होली खेली जाएगी.

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लड्डू होली के अगले दिन बरसाना के होली ​खेलने के निमंत्रण पर नंदगांव के हुरयारे सजधज करके बरसाना जाएंगे. वहां पर गोपियां उनका स्वागत रंग, गुलाल और लट्ठ से करेंगी. लट्ठमार होली राधाजी और भगवान श्रीकृष्ण के प्रेम एवं लीलाओं का ही एक प्रतीक है. जो द्वापर युग से चला आ रहा है.

लट्ठमार होली का इतिहास और महत्व

द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने कई लीलाएं की हैं. बाल्यकाल में राधा और गोपियों के साथ श्रीकृष्ण की लीलाएं प्रसिद्ध हैं. कहा जाता है कि बाल श्रीकृष्ण जब बरसाना में राधाजी और गोपियों के संग होली खेलते थे, तो उनको तंग भी किया करते थे. राधाजी और गोपियां भगवान श्रीकृष्ण और ग्वालों को डंडा लेकर दौड़ाती थीं. श्रीकृष्ण के प्रेम में सराबोर रा​धाजी और गोपियां उनका रंग गुलाल और डंडों से स्वागत करती थीं. तब से यह परंपरा चली आ रही है.

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हर साल फाल्गुन माह में लट्ठमार होली का आयोजन किया जाता है. नंदगांव के हुरयारे होली खेलने के लिए बरसाना जाते हैं. भगवान श्रीकृष्ण, राधाजी और गोपियों की लीलाएं आज भी लट्ठमार होली से हमारी स्मृतियों में बनी हुई हैं.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news 18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)

Tags: Dharma Aastha, Holi

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