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हनुमान चालीसा का पाठ करने से दूर होते हैं सभी कष्ट, बजरंगबली बरसाते हैं कृपा

News18Hindi
Updated: February 11, 2020, 1:28 PM IST
हनुमान चालीसा का पाठ करने से दूर होते हैं सभी कष्ट, बजरंगबली बरसाते हैं कृपा
हनुमान चालीसा की प्रत्येक पंक्ति में एक आदिशक्ति विराजमान है.

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa) का पाठ बेहद प्रभावशाली होता है. मंगलवार के दिन शाम के वक्त हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa) का पाठ करने से सेहत अच्छी रहती है

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  • Last Updated: February 11, 2020, 1:28 PM IST
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राम भक्त हनुमान (Hanuman) की भक्ति को अन्य देवी-देवाओं से ज्यादा सरल और फलदायी माना जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मंगलवार के दिन हनुमान जी (Hanuman Chalisa) की पूजा करने से कई तरह के दोष दूर होते हैं. मंगलवार को विशेष मुहूर्त पर हनुमान चालीसा का पाठ करने से भगवान खुश होते हैं और भक्तों के सभी कष्टों को खत्म करते हैं.

नकारात्मक प्रभाव होता है कम

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa) का पाठ बेहद प्रभावशाली होता है. मंगलवार के दिन शाम के वक्त हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa) का पाठ करने से सेहत अच्छी रहती है और घर में सुख-समृद्धि आती है. इसके साथ ही जीवन में नकारात्मक प्रभाव कम होता है. पंडितों के अनुसार, मंगलवार रात को 8 बार हनुमान चालीसा का पाठ करने से शनि के साढ़े साती खत्म हो जाती है.

हनुमान चालीसा का पाठ करने के लाभ

- मंगलवार के दिन प्रातः काल स्नान करके हनुमान चालीसा का पाठ करने से घर में सुख समृद्धि आती है.

- हनुमान चालीसा पढ़ने से शनि ग्रह और साढे़ साती का प्रभाव कम होता है.

- मान्यताओं के अनुसार, हनुमान चालीसा को डर, भय, संकट या विपत्ति आने पर पढ़ने से सारे कष्ट दूर हो जाते हैं.- हनुमान चालीसा पढ़ने से मन शांत होता है, जिससे तनाव जैसी समस्या से छुटकारा मिलता है.

 मंगलवार के दिन शाम के वक्त हनुमान चालीसा का पाठ करने से सेहत अच्छी रहती है
मंगलवार के दिन शाम के वक्त हनुमान चालीसा का पाठ करने से सेहत अच्छी रहती है


दोहा :

श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।।
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।

चौपाई :

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुं लोक उजागर।।

रामदूत अतुलित बल धामा।
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।

महाबीर बिक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी।।

कंचन बरन बिराज सुबेसा।
कानन कुंडल कुंचित केसा।।

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।
कांधे मूंज जनेऊ साजै।

संकर सुवन केसरीनंदन।
तेज प्रताप महा जग बन्दन।।

विद्यावान गुनी अति चातुर।
राम काज करिबे को आतुर।।

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
राम लखन सीता मन बसिया।।

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
बिकट रूप धरि लंक जरावा।।

भीम रूप धरि असुर संहारे।
रामचंद्र के काज संवारे।।

लाय सजीवन लखन जियाये।
श्रीरघुबीर हरषि उर लाये।।

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।
अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।।

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।
नारद सारद सहित अहीसा।।

जम कुबेर दिगपाल जहां ते।
कबि कोबिद कहि सके कहां ते।।

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
राम मिलाय राज पद दीन्हा।।

तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना।
लंकेस्वर भए सब जग जाना।।

जुग सहस्र जोजन पर भानू।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।
जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।।

दुर्गम काज जगत के जेते।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।

राम दुआरे तुम रखवारे।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।

सब सुख लहै तुम्हारी सरना।
तुम रक्षक काहू को डर ना।।

आपन तेज सम्हारो आपै।
तीनों लोक हांक तें कांपै।।

भूत पिसाच निकट नहिं आवै।
महाबीर जब नाम सुनावै।।

नासै रोग हरै सब पीरा।
जपत निरंतर हनुमत बीरा।।

संकट तें हनुमान छुड़ावै।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।।

सब पर राम तपस्वी राजा।
तिन के काज सकल तुम साजा।

और मनोरथ जो कोई लावै।
सोइ अमित जीवन फल पावै।।

चारों जुग परताप तुम्हारा।
है परसिद्ध जगत उजियारा।।

साधु-संत के तुम रखवारे।
असुर निकंदन राम दुलारे।।

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।
अस बर दीन जानकी माता।।

राम रसायन तुम्हरे पासा।
सदा रहो रघुपति के दासा।।

तुम्हरे भजन राम को पावै।
जनम-जनम के दुख बिसरावै।।

अन्तकाल रघुबर पुर जाई।
जहां जन्म हरि-भक्त कहाई।।

और देवता चित्त न धरई।
हनुमत सेइ सर्ब सुख करई।।

संकट कटै मिटै सब पीरा।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।

जै जै जै हनुमान गोसाईं।
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।

जो सत बार पाठ कर कोई।
छूटहि बंदि महा सुख होई।।

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।
होय सिद्धि साखी गौरीसा।।

तुलसीदास सदा हरि चेरा।
कीजै नाथ हृदय मंह डेरा।।

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इस विधि से करें हनुमान जी की पूजा

मान्यताओं के अनुसार, हनुमान चालीसा की प्रत्येक पंक्ति में एक आदिशक्ति विराजमान है. मंगलवार को हनुमान चालीसा का पाठ करने से पहले राम जी और हनुमान जी की मूर्ति की स्थापना करें. इसके बाद हनुमान चालीसा का पाठ करें.
Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.

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First published: February 11, 2020, 4:21 AM IST
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