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भगवान शिव ने कौन-कौन से अवतार लिए? यहां जानें

भगवान शिव ने कौन-कौन से अवतार लिए? यहां जानें

रामभक्त हनुमान भी शिव के अंश थे. (Image-Canva)

रामभक्त हनुमान भी शिव के अंश थे. (Image-Canva)

श्रीहरि विष्णु की तरह शिवजी ने भी अनेक अवतार लिए. महावीर हनुमान उनके 11वें रुद्र अवतार माने गए हैं. उनका पहला स्वरूप 'महाकाल' को माना गया है. यही वह रूप है, जो संहार का प्रतीक है. इन्‍हें काल भी कहा जाता है.

हाइलाइट्स

महावीर हनुमान शिव जी के 11वें रुद्र अवतार माने गए हैं
शिव के अंशों के बारे में शिव महापुराण में बताया गया है.

Lord Shiva’s Incarnations: शिवजी त्रिदेवों में से एक हैं. ब्रह्मदेव जहां सृष्टि के रचयिता माने गए हैं, वहीं विष्णु पालक और शिव संहारक माने गए हैं. विष्णु को हरि और शिव को हर कहा जाता है. धर्मशास्त्रों में हरि के 24 अवतारों का वर्णन है, उसी प्रकार ‘हर’ के 19 अवतारों का उल्लेख है. यहां आज हम आपको शिव महापुराण में बताए गए शिव जी के कुछ अंश अवतारों का उल्लेख करेंगे.

शिवजी ने कई रुद्रावतार लिए, जिनमें 11वें रुद्र अवतार महावीर हनुमान माने गए हैं. शिवजी का पहला स्वरूप ‘महाकाल’ को माना गया है. यही वह रूप है, जो संहार का प्रतीक है. इन्‍हें काल भी कहा जाता है. जब कोई भी प्राणी देह त्यागता है तो ‘काल’ का नाम आता है. बहुत सारे भक्तजन शिवजी को ‘महाकाल’ ही कहते हैं.

शिवजी के अवतार

  •  महाकाल
  •  तारा
  •  भुवनेश
  •  षोडश
  •  भैरव
  •  छिन्नमस्तक गिरिजा
  •  धूम्रवान
  •  बगलामुख
  •  मातंग
  •  कमल

महाकाल समेत ये दसों अवतार तंत्रशास्त्र से संबंधित हैं.

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शिवजी के 11 रुद्रावतार जो हुए, वे इस प्रकार हैं-

1. कपाली
2. पिंगल
3. भीम
4. विरुपाक्ष
5. विलोहित
6. शास्ता
7. अजपाद
8. आपिर्बुध्य
9. शम्भू
10. चण्ड
11. हनुमानजी

शिव के अनेक अंशावतार भी हुए
शिव के अंश ऋषि दुर्वासा, महेश, वृषभ, पिप्पलाद, वैश्यानाथ, द्विजेश्वर, हंसरूप, अवधूतेश्वर, भिक्षुवर्य, सुरेश्वर, ब्रह्मचारी, सुनटनर्तक, द्विज, अश्वत्थामा, किरात, नतेश्वर आदि जन्मे. इन अंशावतार का उल्लेख ‘शिव पुराण’ में भी मिलता है.

वीरभद्र शिव की जटा से प्रकट हुए
वीरभद्र को भगवान शिव का गण माना जाता है, जो कि उनकी जटा से उत्पन्न हुए थे. सती के आत्मदाह से क्रोधित होकर शिवजी ने अपने सिर से एक जटा उखाड़कर पर्वत पर फेंकी थी. जिससे महाभंयकर वीरभद्र प्रगट हुए. वीरभद्र ने सती के पिता दक्ष प्रजापति का सिर काट दिया था और हवन कुंड में जला दिया था.

Tags: Dharma Aastha, Dharma Culture, Religious

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