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Shree Somnath Temple sringar live: सोमनाथ मंदिर में भगवान भोलेनाथ का प्रातः श्रृंगार, देखिए लाइव

श्री सोमनाथ महादेव मंदिर, प्रथम ज्योतिर्लिंग - गुजरात (सौराष्ट्र) (Image:twitter)

श्री सोमनाथ महादेव मंदिर, प्रथम ज्योतिर्लिंग - गुजरात (सौराष्ट्र) (Image:twitter)

Shree somnath temple sringar : सौराष्ट्र के सोमनाथ मंदिर में भगवान शिव का प्रातः श्रृंगार देखने से सारे कष्ट दूर हो जाते हैं. गुजरात में स्थित यह मंदिर विश्व का प्रथम ज्योतिर्लिंग है.

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    Shree somnath temple sringar : भगवान भोलेनाथ के प्रथम ज्योतिर्लिंग का दर्शन अपने आप में अलौकिक अनुभूति है. मान्यता है कि भगवान शिव के प्रथम ज्योतिर्लिंग के दर्शन से भक्तों के सारे पाप धूल जाते हैं. यह मंदिर गुजरात के सौराष्ट्र में स्थित है. सोमनाथ महादेव मंदिर भारतीय सभ्यता, संस्कृति, उत्थान और पतन का प्रतीक है. इसे भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में सर्वप्रथम ज्योतिर्लिंग के रूप में माना जाता है. इस मंदिर का निर्माण स्वयं चन्द्रदेव ने किया था. इस ज्योतिर्लिंग के बारे में मान्यता है कि यह हर सृष्टि काल में यहां पर मौजूद रहा है.‍ इस मंदिर का उल्लेख ऋग्वेद में किया गया है. हिंदू धर्म में इस स्थान को बहुत पवित्र माना गया है. प्रथम ज्योतिर्लिंग होने के कारण धार्मिक रूप से इसकी मान्यता बहुत अधिक है. इस मंदिर का इतिहास हिंदू धर्म के उत्थान और पतन का प्रतीक है. आप इस लिंक के माध्यम से सोमनाथ मंदिर में आज का प्रातः श्रृंगार लाइव देख सकते हैं.

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    इसी स्थान पर भगवान शिव अवतरित हुए थे
    पौराणिक मान्यता के अनुसार शिव के इस पावन धाम का संबंध चंद्रदेव से जुड़ा हुआ है. सोमदेव को सोम भी कहा जाता है.‍ चंद्रदेव राजा दक्ष के दामाद थे. राजा दक्ष ने एक बार नाराज होकर चंद्रदेव को श्राप दे दिया कि उनका प्रकाश दिन-प्रतिदिन क्षीण होता चला जाएगा.‍ इस श्राप से सृष्टि पर खतरा मंडराने लगा. चंद्रदेव ने राजा दक्ष से बहुत विनती की. उनसे माफी मांगी. राजा दक्ष ने कहा, मैं श्राप से मुक्त तो नहीं कर सकता, लेकिन इससे प्रभाव को कम करने का उपाय बता सकता हूं. उन्होंने चंद्रदेव को भगवान शिव की तपस्या करने के लिए कहा. उन्होंने कहा, यदि सरस्वती नदी के मुहाने पर समुद्र में स्नान करें तो वे इस श्राप के ताप से बच सकते हैं.‍ इसके बाद सोम यानि चंद्रदेव ने सरस्वती नदी के मुहाने पर स्थित अरब सागर में स्नान करके भगवान शिव की तपस्या की. इस भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने इसी स्थान पर अवतरित होकर उनका उद्धार किया और यहां पर वे सोमनाथ के नाम से प्रसिद्ध हुए.‍

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    सदियों से आकर्षण का केंद्र
    धन, संपत्ति, वैभव और प्रगाढ़ आस्था के कारण यह मंदिर देश ही नहीं बल्कि दुनिया के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है. यही कारण है कि इस मंदिर पर कई बार विदेशी आक्रमण भी हुआ है. भारत पर विदेशी आक्रमण के दौरान महमूद गजनवी से लेकर अलाऊद्दीन खिलजी तक ने इस मंदिर को 17 बार ध्वस्त किया है और हर बार उसी वैभव के साथ इसका पुनः निर्माण करवाया गया. स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल और के एम मुंशी ने इस मंदिर का पुननिर्माण करवाया और 11 मई 1951 को भारत के प्रथम राष्ट्रपित डॉ राजेंद्र प्रसाद ने इसका उद्घाटन किया.

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