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Shree Somnath Temple sringar live: गुजरात के सोमनाथ मंदिर में प्रथम ज्योतिर्लिंग का भव्य प्रातः श्रृंगार, देखिए लाइव

श्री सोमनाथ महादेव मंदिर, प्रथम ज्योतिर्लिंग - गुजरात (सौराष्ट्र) (Image: twitter)

श्री सोमनाथ महादेव मंदिर, प्रथम ज्योतिर्लिंग - गुजरात (सौराष्ट्र) (Image: twitter)

Shree Somnath temple sringar: गुजरात के सौराष्ट्र में प्रथम ज्योतिर्लिंग स्थित है. यह सोमनाथ मंदिर के नाम से विख्यात है. सोमनाथ मंदिर में भगवान शिव का प्रातः श्रृंगार देखने से सारे कष्ट दूर हो जाते हैं.

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    Shree Somnath temple Sringar: भगवान शिव देवों के देव हैं. यानी महादेव हैं. भगवान महादेव के जितने नाम है, उतने ही उनके रूप हैं. उतने ही रूप में भगवान शंकर भक्तों को वरदान देते हैं.गुजरात के सौराष्ट्र में भगवान शिव का प्रथम ज्योतिर्लिंग का दर्शन अलौकिक अनुभूति है. श्रृंगार का दर्शन करने से भगवान शिव की असीम अनुकंपा बरसती है. माना जाता है कि प्रथम ज्योतिर्लिंग के दर्शन मात्र से जन्म जन्मांतर के पाप धूल जाते हैं. प्रथम ज्योतिर्लिंग श्री सोमनाथ महादेव मंदिर गुजरात प्रांत के काठियावाड़ क्षेत्र में समुद्र के किनारे स्थित है. मान्यता के अनुसार इस मंदिर का निर्माण स्वयं भगवान चंद्रदेव ने कराया था. यह मंदिर देश के प्राचीनतम तीर्थ स्थानों में से एक है.पावन प्रभास क्षेत्र में स्थित इस सोमनाथ-ज्योतिर्लिंग की महिमा का वर्णन महाभारत, श्रीमद्भागवत तथा स्कंद पुराणा में है. वहीं ऋग्वेद में भी सोमेश्वर महादेव की महिमा का उल्लेख है. इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन से भक्त भगवान शिव और माता पार्वती की अक्षय कृपा का पात्र बन जाते हैं. उनके लौकिक-पारलौकिक सारे कृत्य स्वयमेव सफल हो जाते हैं. आप इस लिंक पर सोमनाथ मंदिर में आज का प्रातः श्रृंगार देख सकते हैं.

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    दर्शन से शिव भक्तों के सारे पाप दूर होते हैं
    मान्यता के अनुसार इसी स्थान पर शिव अवतरित हुए थे. राजा दक्ष के शाप से मुक्त होने के लिए भगवान चंद्रदेव ने यहीं भगवान शिव की तपस्या की थी. इस भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने इसी स्थान पर अवतरित होकर उनका उद्धार किया और यहां पर वे सोमनाथ के नाम से प्रसिद्ध हुए.‍भगवान शिव के इस पावन ज्योतिर्लिंग की ऊंचाई तकरीबन 155 फीट है.‍ मंदिर तीन भागों में विभाजित है, जिसमें नाट्यमंडप, जगमोहन और गर्भगृह शामिल हैं.‍लोक कथाओं के अनुसार यहीं पर भगवान श्रीकृष्ण ने देहत्यागा था. इस कारण इस क्षेत्र का महत्त्व और बढ़ जाता है. मान्यता है कि सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन, पूजन और स्मरण मात्र से शिव भक्तों के सारे संकट पल भर में दूर हो जाते हैं.‍ भगवान सोमनाथ की साधना-आराधना से भक्तों के जन्म-जन्मांतर के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं.‍ भगवान शिव की हमेशा उस पर कृपा बनी रहती है और उसे जीवन के सभी सुख प्राप्त होते हैं.

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    अनोखा है मंदिर का इतिहास
    ऐतिहासिक प्रमाणों के अनुसार ईसा पूर्व में ही इस मंदिर का उल्लेख है.इस मंदिर का इतिहास अनोखा है. अपनी अकूत धन संपदा और वैभव के कारण यह मंदिर दुनिया भर में प्रसिद्ध था. यह भारत के उत्थान और पतन का प्रतीक भी रहा है.इसी कारण इस मंदिर को 17 बार विदेशी आक्रांताओं ने लूटा. महमूद गजनवी ने सन 1024 में 5,000 सैनिकों के साथ सोमनाथ मंदिर पर हमला किया, उसकी संपत्ति लूटी और उसे नष्ट कर दिया. स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल और के एम मुंशी ने इस मंदिर का पुननिर्माण करवाया और 11 मई 1951 को भारत के प्रथम राष्ट्रपित डॉ राजेंद्र प्रसाद ने इसका उद्घाटन किया.

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