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पांडवों ने किया था भगवान शिव से युद्ध, जानें क्यों हुई थी है घटना

पांडवों ने किया था भगवान शिव से युद्ध, जानें क्यों हुई थी है घटना

शास्‍त्रों के मुताबिक सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित है. Image-shutterstock.com

शास्‍त्रों के मुताबिक सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित है. Image-shutterstock.com

Lord Shiva Puja: महाभारत (Mahabharat) युद्ध के अंत में अश्वत्थामा पांडव पुत्रों का वध कर देते हैं लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि पांडव अपने पुत्रों की हत्या के लिए भगवान शिव को दोषी मान उनसे युद्ध करने लगते हैं.

    Lord Shiva Puja: हिंदू धर्म में भगवान शिव (Lord Shiva) को सभी देवी देवताओं में सबसे बड़ा माना जाता है. ऐसा भी कहा जाता है कि भगवान शिव ही दुनिया को चलाते हैं. वह जितने भोले हैं उतने ही गुस्‍सै वाले भी हैं. शास्‍त्रों के मुताबिक सोमवार (Monday) का दिन भगवान शिव को समर्पित है. शिव जी को प्रसन्‍न करने के लिए लोग व्रत करते हैं. महाभारत युद्ध के अंत में अश्वत्थामा पांडव पुत्रों का वध कर देते हैं लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि पांडव अपने पुत्रों की हत्या के लिए भगवान शिव को दोषी मान उनसे युद्ध करने लगते हैं. आइए आपको बताते हैं पांडव और भगवान शिव से जुड़ी इस पौराणिक कथा के बारे में.

    पांडवों का भगवान शिव से युद्ध
    महाभारत युद्ध का अंतिम दिन था. युद्ध के अंतिम दिन दुर्योधन ने अश्वत्थामा को अपनी सेना का सेनापति नियुक्त किया था. अपनी मृत्यु का इंतजार कर रहे दुर्योधन ने अश्वत्थामा से कहा था- मुझे कैसे भी पांचों पांडवों का कटा हुआ शीश देखना है.

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    अश्वत्थामा ने रचा पांडवों की मृत्यु का षड्यंत्र
    दुर्योधन को वचन देकर अश्वत्थामा अपने बचे हुए कुछ सैनिकों के साथ पांडवों की मृत्यु का षड्यंत्र रचने लगे. दूसरी तरफ भगवान कृष्ण ये जानते थे कि महाभारत के अंतिम दिन, काल कुछ न कुछ चक्र जरूर चलाएगा. इस संकट से बचने के लिए श्रीकृष्ण ने भगवान शिव की विशेष स्तुति आरम्भ कर दी थी. स्तुति करते हुए श्रीकृष्ण ने भगवान शिव से कहा- हे जगत के पालनकर्ता, भूतों के स्वामी मैं आपको प्रणाम करता हूं. भगवान आप मेरे भक्त पांडवों की रक्षा करें.

    श्रीकृष्ण की स्तुति सुनकर भगवान शिव नंदी पर सवार होकर हाथ में त्रिशूल लेकर पांडवों की ओर रक्षा के लिए आ गए. सभी पांडव उस समय शिविर के नजदीक ही स्थित नदी में स्नान कर रहे थे. मध्यरात्रि में अश्वत्थामा, कृतवर्मा और कृपाचार्य तीनों पांडव शिविर के पास आए लेकिन जब तीनों ने शिविर के बाहर भगवान शिव को पहरा देते हुए देखा तो वह डर गए. फिर उन्होंने भी भगवान शिव की स्तुति वंदना आरम्भ कर दी. भगवान शिव तो अपने हर भक्त पर अति शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं. इसलिए वह उन तीनों पर भी प्रसन्न हो गए.

    वरदान के रूप में उन्होंने अश्वत्थामा को एक तलवार दी और उन्हें पांडवो के शिविर में जाने की आज्ञा भी दी. फिर अश्वत्थामा ने अपने दोनों साथियों के साथ पांडवों के शिविर में घुस कर धृष्टद्युम्न के साथ पांडवों के पुत्रों का वध कर दिया. इसके बाद वो तीनो पांडवों के कटे हुए शीश लेकर वापस लौट आए. उस समय शिविर में अकेले बचे पार्षदशुद ने इस जनसंहार की खबर पांडवों को दी.

    पांडवों के पुत्रों की हुई हत्या
    जब ये खबर पांडवों ने सुनी तो वह लोग शोक में डूब गए और ये सोचने लगे कि स्वयं महादेव के रहते हुए किसने शिविर मे घुसकर हमारे पुत्रों की हत्या की होगी? ये सब शिवजी का ही किया धरा है. क्रोध में मर्यादा भूलकर वह भगवान शिव को ही ललकारने लगे. इसके बाद पांडवों और भगवान शिव के बीच भयंकर युद्ध शुरू हो गया.

    पांडव जितने भी अस्त्र भगवान शिव पर चलाते वो सभी भगवान शिव के शरीर में समा जाते क्योंकि पांडव श्रीकृष्ण के शरण में थे और भगवान शिव हरि भक्तों की रक्षा में स्वयं तत्पर रहते हैं इसलिए शांत स्वरूप शिव ने पांडवों से कहा कि तुम लोग श्रीकृष्ण के उपासक हो इसलिए क्षमा करता हूं अन्यथा तुम सभी वध के योग्य हो. मुझ पर आक्रमण करने का अपराध फल तुम्हें कलियुग मे जन्म लेकर भोगना पड़ेगा. ऐसा कहकर भगवान शिव अदृश्य हो गए.

    पांडवों ने शिव जी से की क्षमा याचना
    दुखी पांडवों ने कृष्ण के साथ भगवान शिवजी की स्तुति की. पांडवों की स्तुति से प्रसन्न होकर भगवान शिव प्रकट हुए और उनसे वरदान मांगने को कहा. तब पांडवों की ओर से भगवान कृष्ण शिव से बोले हे प्रभु, पांडवों ने जो मूर्खता की थी उसके लिए वो क्षमाप्रार्थी हैं, उन्हें क्षमा करें और इस श्राप से मुक्ति दिलाएं. भगवान शिव बोले हे कृष्ण, उस समय मैं अपनी माया के प्रभाव में था इसलिए मैंने पांडवो को श्राप दे दिया और मैं अपना ये श्राप वापस तो नहीं ले सकता पर मैं मुक्ति का मार्ग बताता हूं.

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    पांडव अपने अंश से कलियुग में जन्म लेंगे और अपने पापों को भोग कर श्राप से मुक्ति पाएंगे. युधिष्ठिर, वत्सराज का पुत्र बन कर जन्म लेगा. उसका नाम बलखानी होगा और वो सिरीश नगर का राजा होगा. भीम वीरान के नाम से बनारस में राज करेगा. अर्जुन के अंश से ब्रम्हानंद जन्म लेगा, जो मेरा भक्त होगा. नकुल के अंश से जन्म होगा कनेकोच का, जो रत्ना बानो का पुत्र होगा. सहदेव, भीमसिंह के पुत्र देवसिंह के रूप में जन्म लेगा. दिए हुए श्राप से मुक्ति पाने का रास्ता जानने के बाद पांडवों ने भगवान शिव को हाथ जोड़कर प्रणाम किया और फिर भगवान शिव अंतर्ध्यान हो गए.(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)undefined

    Tags: Lord Shiva, Religion

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