Lunar Eclipse 2020: 5 जून के चंद्र ग्रहण में सूतक काल का नहीं पड़ेगा प्रभाव, जानें क्यों

Lunar Eclipse 2020: 5 जून के चंद्र ग्रहण में सूतक काल का नहीं पड़ेगा प्रभाव, जानें क्यों
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पहला चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse) 5 जून को लगेगा. ज्योतिष में उपच्छाया चंद्रग्रहण को वास्तविकता में कोई चंद्रग्रहण नहीं माना जाता क्योंकि जब भी कोई चंद्रग्रहण घटित होता है तो, उससे पहले चंद्रमा पृथ्वी की उपछाया में प्रवेश करता है, जिसे ज्योतिष में चंद्र मालिन्य कहते हैं.

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आगामी 5 जून यानी शुक्रवार को पड़ने वाला चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse) आम चंद्र ग्रहण से अलग होगा. यह एक प्रकार का उपछाया चंद्रग्रहण होगा. इसे ग्रहण की श्रेणी में नहीं रखा जाता है. ज्योतिष विज्ञान के मुताबिक इस महीने दो ग्रहण पड़ रहे हैं. पहला चंद्र ग्रहण और दूसरा सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse). पहला चंद्र ग्रहण 5 जून को लगेगा. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह ग्रहण, ग्रहण न होकर चंद्र ग्रहण की उपछाया होगा. चंद्र ग्रहण की उपछाया ग्रहण की श्रेणी में नहीं आता है. इसका मठ-मंदिरों में सूतक काल का असर नहीं होगा. बदरीनाथ धाम (Badrinath Dham) मंदिर सहित अन्य मठ-मंदिर बंद नहीं रहेंगे.

क्या होता है उपच्छाया चंद्रग्रहण?
ज्योतिष में उपच्छाया चंद्रग्रहण को वास्तविकता में कोई चंद्रग्रहण नहीं माना जाता क्योंकि जब भी कोई चंद्रग्रहण घटित होता है तो, उससे पहले चंद्रमा पृथ्वी की उपछाया में प्रवेश करता है, जिसे ज्योतिष में चंद्र मालिन्य कहते हैं. पृथ्वी की इस उपछाया से निकलने के बाद ही, चंद्रमा उसकी वास्तविक छाया के अंतर्गत प्रवेश करता है और इसी स्थिति में वास्तविक रूप से, पूर्ण अथवा आंशिक चंद्रग्रहण लगता है. हालांकि कई बार ऐसा होता है कि जब पूर्णिमा के दिन, चंद्रमा पृथ्वी की छाया में प्रवेश करने के बाद, वहीं से बाहर निकल जाता है. जिससे वो पृथ्वी की असली छाया तक प्रवेश नहीं कर पाता.

इस स्थिति में चंद्रमा की सतह पृथ्वी से देखने पर, कुछ धुंधली प्रतीत होती है और उसका बिम्ब भी सामान्य से धुंधला पड़ जाता है. यह बिम्ब इतना हल्का होता है कि, आप इसे पृथ्वी से अपनी नग्न आंखों से नहीं देख सकते. इसी स्थिति को उपच्छाया चंद्रगहण कहा जाता है. चूंकि इस दौरान चन्द्रमा का कोई भी भाग ग्रसित नहीं होता, इसलिए इसे ग्रहण की मुख्य श्रेणी में नहीं रखा जाता है. इस कारण इस उपच्छाया ग्रहण का सूतक भी माननीय नहीं होता.



एबीपी की खबर के अनुसार बदरीनाथ धाम के धर्माधिकारी ने पंचांग गणना के बाद बताया कि इस ग्रहण के सूतक का मंदिरों पर कोई असर नहीं होगा. मंदिरों की पूजा प्रक्रिया रोजाना की तरह ही होगी. वहीं उन्होंने बताया कि उपछाया ग्रहण को ग्रहण नहीं माना जाता है. 21 जून को सूर्य ग्रहण होगा जिसका असर बदरीनाथ सहित अन्य मंदिरों पर भी दिखेगा. सूर्यग्रहण सूतक काल के दौरान मंदिर बंद रहेंगे.



ये हैं ग्रहण के सूतक काल
5 जून को लगने वाला चंद्र ग्रहण 3 घंटे 18 मिनट का होगा. यह एक पेनुमब्रल चंद्र ग्रहण होगा जिसमें आमतौर पर एक पूर्ण चंद्रमा से अंतर करना मुश्किल होता है. यह चंद्र ग्रहण 5 जून को रात 11:15 बजे से शुरू होगा, रात 12:54 बजे इसका सबसे ज्यादा असर दिखाई देगा और 6 जून 02:34 बजे समाप्त हो जाएगा. हालांकि उपच्‍छाया चंद्र ग्रहण होने के कारण इसका सूतक काल मान्‍य नहीं होगा. वहीं, 21 जून के सूर्य ग्रहण का आंशिक ग्रहण सुबह 9:15 पर शुरू होगा. 12:10 पर अधिकतम ग्रहण और दोपहर 3:04 बजे आंशिक ग्रहण समाप्‍त होगा. इस ग्रहण का सूतक काल 12 घंटे पहले ही लग जाएगा.

सूर्य ग्रहण होगा प्रभावी
ज्योतिषियों के अनुसार इस साल लगने वाले ग्रहण काफी अहम हैं. खासकर सूर्य ग्रहण पर सबसे ज्‍यादा ज्योतिषियों की नजर है, क्योंकि यह ग्रहण मिथुन राशि में लगेगा. ज्योतिषियों के अनुसार इससे मिथुन राशि के जातकों पर विशेष प्रभाव पड़ेगा.

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.
First published: June 3, 2020, 2:32 PM IST
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