Guru Purnima 2020: गुरु पूर्णिमा पर लग रहा है चंद्रग्रहण, जानें कितना प्रभावशाली होगा ये ग्रहण

Guru Purnima 2020: गुरु पूर्णिमा पर लग रहा है चंद्रग्रहण, जानें कितना प्रभावशाली होगा ये ग्रहण
खगोल विज्ञान की मानें तो चंद्र ग्रहण उस स्थिति में लगता है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीधी रेखा में आते हैं.

आषाढ़ माह की पूर्णिमा तिथि को गुरु पूर्णिमा (Guru Purnima) के नाम से जाना जाता है. यह लगातार तीसरा वर्ष है जब गुरु पूर्णिमा के दिन चंद्रग्रहण (Lunar Eclipse) लग रहा है.

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गुरु पूर्णिमा (Guru Purnima) का पर्व 5 जुलाई को मनाया जाएगा. इस साल भी गुरु पूर्णिमा पर चंद्रग्रहण (Lunar Eclipse) का साया है. दरअसल चंद्र ग्रहण हमेशा पूर्णिमा (Full Moon) के दिन ही लगता है और सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse) अमावस्या के दिन. आषाढ़ माह की पूर्णिमा तिथि को गुरु पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है. यह लगातार तीसरा वर्ष है जब गुरु पूर्णिमा के दिन चंद्रग्रहण लग रहा है. हालांकि ये उपच्छाया चंद्रग्रहण होगा जो भारत में दिखाई नहीं देगा. इसलिए यहां पर ग्रहण का सूतक भी मान्य नहीं होगा.

गुरु पूर्णिमा के दिन चंद्रग्रहण का समय
गुरु पूर्णिमा के दिन चंद्रग्रहण सुबह 8 बजकर 38 मिनट से प्रारंभ होगा. 09 बजकर 59 मिनट में यह परमग्रास में होगा और 11 बजकर 21 मिनट पर समाप्त होगा. इस प्रकार चंद्रग्रहण की अवधि 2 घंटा 43 मिनट और 24 सेकंड की होगी. इस उपच्छाया चंद्रग्रहण को अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया के हिस्सों में देखा जा सकेगा.

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कितना प्रभावशाली होगा चंद्र ग्रहण


गुरु पूर्णिमा के दिन लगने वाला चंद्रग्रहण भारत के संदर्भ में बहुत ज्यादा प्रभावशाली नहीं होगा क्योंकि यह एक उपच्छाया चंद्रग्रहण है और यहां दिखाई भी नहीं देगा. वहीं ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यह चंद्र ग्रहण धनु राशि में लगेगा. धनु राशि में गुरु बृहस्पति और राहु मौजूद हैं. अतः ग्रहण के दौरान बृहस्पति पर राहु की दृष्टि धनु राशि को प्रभावित कर सकती है. धनु राशि के जातकों का मन अशांत रह सकता है. उनके मन में नकारात्मक विचार आ सकते हैं. मां की सेहत पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है. मन को एकाग्र रखने के लिए ध्यान लगाएं और मां का ख्याल रखें.

कैसे लगता है उपच्छाया चंद्रग्रहण
उपच्छाया चंद्रग्रहण में चांद के आकार में किसी भी प्रकार का कोई भी बदलाव देखने को नहीं मिलता है. इसमें सिर्फ चांद मटमैला जैसा हो जाता है. दरअसल उपच्छाया चंद्रग्रहण में पृथ्वी की छाया वाले क्षेत्र में चंद्रमा आ जाता है और चंद्रमा पर पड़ने वाली सूर्य की रोशनी बहुत ही कम प्रतीत होती है. इसे ही उपच्छाया चंद्रग्रहण कहते हैं. ठीक एक माह पहले 5 जून को भी उपच्छाया चंद्रग्रहण लगा था. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें).
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