Durga Navmi 2020 Date: दुर्गा नवमी को करें मां सिद्धिदात्री की पूजा, प्राप्त होंगी विशेष सिद्धियां

महानवमी पर मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है

Maha Navami 2020/ Durga Navmi 2020 Date: देवीपुराण में इस बात का उल्लेख है कि भगवान शिव ने सिद्धियां प्राप्त करने के लिए मां सिद्धिदात्री (Maa Siddhidatri) का तप किया तब जाकर कहीं उनका आधा शरीर स्त्री का हुआ. देवी के आशीर्वाद के कारण ही भगवान शिव अर्द्धनारीश्वर के रूप में जाने गए.

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    Maha Navami 2020/ Durga Navmi 2020 Date: आज नवरात्रि के 9वें दिन मां नव दुर्गा के नवमें रूप मां सिद्धिदात्री की पूजा अर्चना के बाद नवमी तिथि को नवरात्रि व्रत का पारण करने वाले लोग कन्या पूजन के बाद अपना व्रत खोल सकेंगे. आज नवरात्रि का अंतिम दिन यानी कि नवमी है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, नवमी के दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा अर्चना करने से भक्तों को विशेष सिद्धियों की प्राप्ति होती है. मान्यता तो यह भी है कि भोले शंकर महादेव ने भी सिद्धि प्राप्त करने के लिए मां सिद्धिदात्री तपस्या की थी. नवरात्रि की नवमी के दिन भी कुछ लोग कन्या पूजन करते हैं और व्रत का पारण करते हैं. अगर आप आज कन्या पूजन करें तो इस बात का ख़ास ख्याल रखें कि बाहर से या पड़ोस से किसी को भी कन्या खाने का न्योता न दें क्योंकि कोरोना वायरस से संक्रमण के बचाव के लिए लॉकडाउन चल रहा है. आप चाहें तो अपने घर की ही कन्याओं को भोग लगा सकते हैं या चाहें तो जरूरतमन्दों को ऑनलाइन दान कर सकते हैं. धार्मिक पुराणों में सुपात्र को दिए गए दान को महादान बताया गया है.

    मां सिद्धिदात्री का स्वरुप:
    मां सिद्धिभुजा दात्री का स्वरुप बेहद निराला और आभामंडल से युक्त है. मां सिद्धिदात्री लाल रंग की साड़ी पहने हुए कमल पर विराजमान हैं. मां की चार भुजाएं हैं. बाईं भुजा में मां ने गदा धारण किया है और दाहिने हाथ से मां कमल पकड़ा है और आशीर्वाद दे रही हैं. मां के हाथों में शंख और सुदर्शन चक्र भी है. मां पालथी मारकर कमल पर बैठी हैं. उनका एक चरण नीचे की तरफ है.

    मां सिद्धिदात्री-पौराणिक मान्यता:
    देवीपुराण में इस बात का उल्लेख है कि भगवान शिव ने सिद्धियां प्राप्त करने के लिए मां सिद्धिदात्री का तप किया तब जाकर कहीं उनका आधा शरीर स्त्री का हुआ. देवी के आशीर्वाद के कारण ही भगवान शिव अर्द्धनारीश्वर के रूप में जाने गए.

    मां सिद्धिदात्री का मंत्र:
    या देवी सर्वभू‍तेषु सिद्धिरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमो नम:. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

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