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Maa Durga Visarjan 2021: जानें क्यों किया जाता है मां दुर्गा का विसर्जन, क्या है इस दिन की खासियत

Maa Durga Visarjan 2021: जानें क्यों किया जाता है मां दुर्गा का विसर्जन, क्या है इस दिन की खासियत

दुर्गा विसर्जन के दिन भक्त माता के मस्तक पर सिन्दूर लगाकर उनकी पूजा कर आरती उतारते हैं. Image-shutterstock.com

दुर्गा विसर्जन के दिन भक्त माता के मस्तक पर सिन्दूर लगाकर उनकी पूजा कर आरती उतारते हैं. Image-shutterstock.com

Maa Durga Visarjan 2021: शारदीय नवरात्रि (Shardiya Navratri 2021) के मौके पर दुर्गा प्रतिमाएं पंडालों में स्थापित की जाती हैं और फिर उन्हें दशहरा के बाद विसर्जित कर दिया जाता है.

    Maa Durga Visarjan 2021: हिन्दू पंचांग के अनुसार मां दुर्गा का विसर्जन आश्विन शुक्ल दशमी को किया जाता है. शारदीय दुर्गा विसर्जन आज है. नवरात्रि (Navratri 2021) में मां दुर्गा (Maa Durga) के 9 स्वरूपों की पूजा की जाती है. नवरात्रि में मां दुर्गा को खुश करने के लिए उनके भक्त पूरे नौ दिनों तक व्रत रखते हैं. शारदीय नवरात्रि के मौके पर दुर्गा प्रतिमाएं पंडालों में स्थापित की जाती हैं और फिर उन्हें दशहरा के बाद विसर्जित कर दिया जाता है. वहीं बंगाल में दुर्गा विसर्जन के बाद महिलाएं सिन्दूर खेला खेलती हैं. आइए जानते हैं दुर्गा मूर्ति विसर्जन का महत्व और विधि.

    दुर्गा विसर्जन 2021 का उत्सव
    -मान्यता है कि विसर्जन के दिन मां दुर्गा अपने आध्यात्मिक निवास कैलाश पर्वत पर वापस लौटती हैं. इसी कारण से मां दुर्गा के भक्तों के लिए इस दिन का आध्यात्मिक महत्व है. इस दिन कई व्यक्ति अपने उपवास का पारण करते हैं.
    -दुर्गा विसर्जन के दिन भक्त माता के मस्तक पर सिन्दूर लगाकर उनकी पूजा कर आरती उतारते हैं.
    -इसके पश्चात मां दुर्गा की प्रतिमा की सज्जा कर जुलूस के साथ विसर्जन के लिए नदी तक ले जाया जाता है.
    -इस जुलूस में हजारों की संख्या में श्रद्धालू परंपरागत गीतों पर नृत्य करते हैं. हालांकि कोरोना के चलते इस पर रोक लगाई गई है.
    -भक्त ढोल की धुन पर धुनुची नृत्य करते हैं.
    -हाथ में धूप, कपूर और नारियल की भूसी से भरे मिट्टी के पात्र में धुंआ किया जता है और ढाकी की ताल पर लोग पारम्परिक नृत्य में सहभागी होते हैं.

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    दुर्गा मूर्ति विसर्जन का महत्व
    समस्त संसार को पंचतत्वों से बना हुआ माना जाता है. शास्त्रों में कहा भी गया है- क्षिति, जल, पावक, गगन, समीरा पञ्च तत्व ये अधम शरीर यानी कि शरीर आकाश, जल, अग्नि और वायु से मिलकर बना है. जल भी पंचतत्व है इसे काफी पवित्र माना गया है क्योंकि यह हर गुण दोष को अपने आप में विलीन कर लेता है. पूजा में भी पवित्र जल से पवित्रीकरण किया जाता है. हिंदू पुराणों में जल को ब्रह्म माना गया है. यह भी गया गया है कि सृष्टि की शुरुआत से पहले और इसके अंत के बाद संपूर्ण सृष्टि में सिर्फ जल ही जल होगा. जल आरंभ, मध्य और अंत बताया गया है. यह चिर तत्व है.

    इसी वजह से जल में त्रिदेवों का वास भी माना जाता है. यही वजह है कि पूजा पाठ में भी पवित्रीकरण के लिए जल का प्रयोग किया जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जल में देव प्रतिमाओं को विसर्जित करने के पीछे यह कारण है कि देवी देवताओं की मूर्ति भले ही विलीन हो जाए लेकिन उनके प्राण मूर्ति से निकलकर सीधे परम ब्रह्म में लीन हो जाते हैं.

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    हाथी पर होगा मां दुर्गा का प्रस्थान
    विजयादशमी (दशहरा) का पर्व 15 अक्टूबर दिन शुक्रवार को मान्य होगा. इसी दिन दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन श्रवण नक्षत्र युक्त दशमी तिथि में अति शुभ होगा. शुक्रवार की दशमी तिथि होने के कारण देवी का प्रस्थान गज यानी हाथी पर होगा, जो शुभ फलकारी होने के साथ उत्तम वर्षा का संकेत है. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

    Tags: Durga Puja 2021, Navratri 2021, Religion

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