विष्णु और मां लक्ष्मी के वियोग का कारण था नारद मुनि का श्राप, पौराणिक कथा से जानें रहस्य

नारद मुनि लक्ष्मी जी पर मोहित हो गए थे

नारद मुनि लक्ष्मी जी पर मोहित हो गए थे

Maa Lakshmi Vishnu And Narad Muni Katha- लक्ष्मीजी के लिए स्वयंवर का आयोजन हुआ. माता लक्ष्मी पहले ही मन ही मन विष्णुजी को पति रूप में स्वीकार कर चुकी थीं लेकिन नारद मुनि भी लक्ष्मीजी से विवाह करना चाहते थे.

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Maa Lakshmi Vishnu And Narad Muni Katha- शुक्रवार (Friday) की शाम को मां लक्ष्मी (Maa Lakshmi) की पूजा की जाती है. ऐसी मान्यता है कि शुक्रवार को विधिवत पूजन से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और जातकों पर धन वर्षा करती हैं. घर में सुख-शांति और समृद्धि बनाए रखने के लिए लोग शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं. कहते हैं कि मां लक्ष्मी की पूजा करने से पैसों (Money) की कमी कभी नहीं होती है. धर्मग्रंथों में धन समृद्धि की देवी लक्ष्मी को बताया गया है. इन्हें भगवान विष्णु की पत्नी और आदिशक्ति भी कहा जाता है. धन की देवी मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए लोग कई तरह के उपाय करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं मां लक्ष्मी के विवाह की ये अद्भुत कथा. आइए जानते हैं...

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पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार लक्ष्मीजी के लिए स्वयंवर का आयोजन हुआ. माता लक्ष्मी पहले ही मन ही मन विष्णुजी को पति रूप में स्वीकार कर चुकी थीं लेकिन नारद मुनि भी लक्ष्मीजी से विवाह करना चाहते थे. नारदजी ने सोचा कि यह राजकुमारी हरि रूप पाकर ही उनका वरण करेगी. तब नारदजी विष्णु भगवान के पास हरि के समान सुन्दर रूप मांगने पहुंच गए. विष्णु भगवान ने नारद की इच्छा के अनुसार उन्हें हरि रूप दे दिया. हरि रूप लेकर जब नारद राजकुमारी के स्वयंवर में पहुंचे तो उन्हें विश्वास था कि राजकुमारी उन्हें ही वरमाला पहनाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. राजकुमारी ने नारद को छोड़कर भगवान विष्णु के गले में वरमाला डाल दी. नारदजी वहां से उदास होकर लौट रहे थे तो रास्ते में एक जलाशय में उन्होंने अपना चेहरा देखा. अपने चेहरे को देखकर नारद हैरान रह गए, क्योंकि उनका चेहरा बंदर जैसा लग रहा था.

'हरि' का एक अर्थ विष्णु होता है और एक वानर होता है. भगवान विष्णु ने नारद को वानर रूप दे दिया था. नारद समझ गए कि भगवान विष्णु ने उनके साथ छल किया. उनको भगवान पर बड़ा क्रोध आया. नारद सीधे बैकुंठ पहुंचे और आवेश में आकर भगवान को श्राप दे दिया कि आपको मनुष्य रूप में जन्म लेकर पृथ्वी पर जाना होगा. जिस तरह मुझे स्त्री का वियोग सहना पड़ा है उसी प्रकार आपको भी वियोग सहना होगा. इसलिए राम और सीता के रूप में जन्म लेकर विष्णु और देवी लक्ष्मी को वियोग सहना पड़ा. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
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