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Maha Shivratri 2020: क्यों मनाई जाती है महाशिवरात्रि? क्या है इसके व्रत का महत्व?

News18Hindi
Updated: February 20, 2020, 8:19 PM IST
Maha Shivratri 2020: क्यों मनाई जाती है महाशिवरात्रि? क्या है इसके व्रत का महत्व?
मान्यता है कि इस रात, ग्रह का उत्तरी गोलार्द्ध इस प्रकार अवस्थित होता है कि मनुष्य के अंदर की ऊर्जा प्राकृतिक रूप से ऊपर की और जाती है.

पूरी रात मनाए जाने वाले इस उत्सव में इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता है कि ऊर्जाओं के प्राकृतिक प्रवाह को बाहर निकलने का पूरा अवसर मिले.

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  • Last Updated: February 20, 2020, 8:19 PM IST
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महाशिवरात्रि के अवसर पर भगवान शिव की पूजा-अर्चना की जाती है. फाल्गुन महीने की शिवरात्रि को महाशिवरात्रि कहते हैं. वहीं अमावस्या से पूर्व का एक दिन शिवरात्रि के नाम से जाना जाता है. हालांकि एक कैलेंडर वर्ष में आने वाली सभी शिवरात्रियों में से महाशिवरात्रि, को सर्वाधिक महत्वपूर्ण माना जाता है. मान्यता है कि इस रात, ग्रह का उत्तरी गोलार्द्ध इस प्रकार अवस्थित होता है कि मनुष्य के अंदर की ऊर्जा प्राकृतिक रूप से ऊपर की और जाती है.

यह एक ऐसा दिन है, जब प्रकृति मनुष्य को उसके आध्यात्मिक शिखर तक जाने में मदद करती है. इस समय का उपयोग करने के लिए इस परंपरा में एक उत्सव का आयोजन किया जाता है जो कि पूरी रात चलता है. पूरी रात मनाए जाने वाले इस उत्सव में इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता है कि ऊर्जाओं के प्राकृतिक प्रवाह को बाहर निकलने का पूरा अवसर मिले. लोग जागकर भगवान शिव की भक्ति में लीन हो सकें.

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महाशिवरात्रि का महत्व



महाशिवरात्रि आध्यात्मिक पथ पर चलने वाले साधकों के लिए बहुत महत्व रखती है. परिवार में शांति बनाए रखने के लिए भी महाशिवरात्रि पर भगवान शिव की अराधना करनी चाहिए. दरअसल लोग महाशिवरात्रि को शिव के विवाह के उत्सव की तरह मनाते हैं. वहीं कुछ लोग इसे शिव के द्वारा अपने शत्रुओं पर विजय पाने के दिवस के रूप में मनाते हैं. मान्यता है कि साधकों के लिए यह वह दिन है, जिस दिन वभगवान शिव कैलाश पर्वत के साथ एकात्म हो गए थे.

कहते हैं कि भगवान शिव एक पर्वत की भांति स्थिर व निश्चल हो गए थे. आपको बता दें कि यौगिक परंपरा में, शिव को किसी देवता की तरह नहीं पूजा जाता बल्कि उन्हें आदि गुरु माना जाता है जिससे परम ज्ञान की प्राप्ति होती है. कहते हैं कि भगवान शिव एक दिन पूर्ण रूप से स्थिर हो गए. वही दिन महाशिवरात्रि का था. उनके भीतर की सारी गतिविधियां शांत हुईं और वह पूरी तरह से स्थिर हो गए इसलिए साधक महाशिवरात्रि को स्थिरता की रात्रि के रूप में मनाते हैं.

महाशिवरात्रि व्रत का महत्व
'फाल्गुनकृष्णचतुर्दश्यामादिदेवो महानिशि ।
शिवलिङ्गतयोद्भूतः कोटिसूर्यसमप्रभ।।

ईशान संहिता के इस वाक्य के अनुसार ज्योतिर्लिंग का प्रादुर्भाव होने से यह पर्व महाशिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है. इस व्रत को सभी कर सकते हैं. इसे न करने से दोष लगता है. ये व्रतराज के नाम से विख्यात है. शिवरात्रि यमराज के शासन को मिटाने वाली है और शिवलोक को देने वाली है. शास्त्रोक्त विधि से जो इसका जागरण सहित उपवास करते हैं उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है. शिवरात्रि के समान पाप और भय मिटाने वाला दूसरा व्रत कोई और नहीं है. इसके करने मात्र से हर तरह के पाप खत्म हो जाते हैं.

महाशिवरात्रि- सबसे ज्यादा अंधेरे से भरा दिन
महाशिवरात्रि पर सबसे अंधकारपूर्ण रात होती है. ऐसा लगता है जैसे अंधकार का उत्सव मनाया जा रहा हो. कुछ ऐसे बिंदू जिन्हें हम आकाशगंगा कहते हैं, वह तो दिखाई देते हैं, लेकिन उन्हें थामे रहने वाली विशाल शून्यता सभी लोगों को दिखाई नहीं देती है. इस विस्तार, इस असीम रिक्तता को ही शिव कहा जाता है. आधुनिक विज्ञान ने भी साबित कर दिया है कि सब कुछ शून्य से ही उपजा है और शून्य में ही विलीन हो जाता है.

इसी संदर्भ में शिव यानी विशाल रिक्तता या शून्यता को ही महादेव के रूप में जाना जाता है. इस ग्रह के प्रत्येक धर्म व संस्कृति में, सदा दिव्यता की सर्वव्यापी प्रकृति की बात की जाती रही है. यदि हम इसे देखें, तो ऐसी एकमात्र चीज़ जो सही मायनों में सर्वव्यापी हो सकती है, ऐसी वस्तु जो हर स्थान पर उपस्थित हो सकती है, वह केवल अंधकार, शून्यता या रिक्तता ही है.

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मान्यता है कि जब लोग अपना कल्याण चाहते हैं, तो हम उस दिव्य को प्रकाश के रूप में दर्शाते हैं. जब लोग अपने कल्याण से ऊपर उठ कर, अपने जीवन से परे जाने पर, विलीन होने पर ध्यान देते हैं और उनकी उपासना और साधना का उद्देश्य विलयन ही हो, तो हम सदा उनके लिए दिव्यता को अंधकार के रूप में परिभाषित करते हैं.

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.

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First published: February 20, 2020, 6:34 PM IST
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