Kumbh 2021: जानें कैसे तय होता है कुंभ मेले का स्थान, क्या है इसके पीछे का कारण

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब सूर्य और बृहस्पति एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं तभी कुंभ मेले का आयोजन होता है.

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब सूर्य और बृहस्पति एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं तभी कुंभ मेले का आयोजन होता है.

Kumbh 2021: शास्त्रों के अनुसार नक्षत्र और राशियां यह निर्धारित करती हैं कि चार निश्चित स्थानों में से किस स्थान पर कुंभ का आयोजन होना है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 4, 2021, 4:24 PM IST
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Kumbh 2021: 14 जनवरी 2021 से कुंभ (Kumbh) मेले का आयोजन होने जा रहा है. हरिद्वार में मां गंगा के किनारे श्रद्धा से लाखों सिर झुकते हैं. आस्था और आध्यात्म का यह विश्व का सबसे बड़ा जमघट है जिसे कुंभ मेले (Kumbh Mela) के तौर पर जाना जाता है. शास्त्रों के अनुसार नक्षत्र और राशियां यह निर्धारित करती हैं कि चार निश्चित स्थानों में से किस स्थान पर कुंभ का आयोजन होना है. यह चार स्थान हैं हरिद्वार में गंगा तट, प्रयागराज में गंगा-यमुना-सरस्वती का संगम तट, नासिक में गोदावरी तट और उज्जैन में शिप्रा नदी का तट. प्राचीन काल से यह चारों स्थान संस्कृतियों के केंद्र रहे हैं. कुंभ मेले का आयोजन इन चारों में से किस स्थान पर होना है, इसका निर्धारण राशियों की स्थिति करती है. कुंभ के योग बनने के लिए सूर्य और बृहस्पति की गति राशियों की स्थिति का निर्धारण करती है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब सूर्य और बृहस्पति एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं तभी कुंभ मेले का आयोजन होता है. इसी आधार पर स्थान और तिथि निर्धारित की जाती है.

हरिद्वार में कुंभ

हरिद्वार के कुंभ का संबंध मेष राशि से है. जब कुंभ राशि में बृहस्पति और मेष राशि में सूर्य का प्रवेश होता है, तब यह पर्व हरिद्वार में आयोजित किया जाता है. हरिद्वार और प्रयाग में दो कुंभ पर्वों के बीच 6 वर्ष के अंतराल में अर्धकुंभ का भी आयोजन होता है.

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प्रयाग में कुंभ

प्रयाग कुंभ का विशेष महत्व इसलिए है क्योंकि यह गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम पर आयोजित किया जाता है. जब बृहस्पति वृषभ राशि में प्रवेश करते हैं और सूर्य मकर राशि में तब कुंभ मेले का आयोजन प्रयागराज में किया जाता है. इसे लेकर एक अन्य मान्यता भी है कि, मेष राशि के चक्र में बृहस्पति, सूर्य और चंद्र के मकर राशि में प्रवेश करने पर अमावस्या के दिन कुंभ का पर्व प्रयाग में आयोजित किया जाता है.

नासिक में कुंभ



12 वर्षों में एक बार सिंहस्थ कुंभ मेला नासिक और त्रयम्बकेश्वर में आयोजित होता है. सिंह राशि में बृहस्पति के प्रवेश होने पर कुंभ पर्व गोदावरी के तट पर नासिक में होता है. अमावस्या के दिन बृहस्पति, सूर्य और चंद्र के कर्क राशि में प्रवेश होने पर भी कुंभ पर्व गोदावरी तट पर आयोजित होता है.

उज्जैन में कुंभ

सिंह राशि में बृहस्पति और मेष राशि में सूर्य का प्रवेश होने पर यह कुंभ पर्व उज्जैन में आयोजित होता है. इसके अलावा कार्तिक अमावस्या के दिन सूर्य और चंद्र के साथ होने पर और बृहस्पति के तुला राशि में प्रवेश होने पर कुंभ उज्जैन में आयोजित होता है. इसे मोक्षदायक कुंभ कहते हैं. यह दीपावली के दिन पड़ने वाला विशेष स्नान विधान है.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
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