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ब्रह्मा जी ने इस दिन रची थी सृष्टि, भगवान राम से भी कुछ ऐसे जुड़ी है इस त्योहार की कहानी

News18Hindi
Updated: March 23, 2020, 3:16 PM IST
ब्रह्मा जी ने इस दिन रची थी सृष्टि, भगवान राम से भी कुछ ऐसे जुड़ी है इस त्योहार की कहानी
गुड़ी पड़वा के ही दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी.

शास्त्रों के अनुसार, गुड़ी का अर्थ होता है विजय और पड़वा का अर्थ होता प्रतिपदा. यह त्योहार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष के पहले दिन मनाया जाता है.

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  • Last Updated: March 23, 2020, 3:16 PM IST
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भारत में कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक कई तरह के त्योहार मनाएं जाते हैं. इन सभी त्योहारों का शास्त्रों में अलग-अलग महत्व बताया गया है. भारतीय त्योहारों की खास यह है की इनकी कथा किसी न किसी रूप में देवी-देवाओं से जुड़ी हुई होती है. ऐसे ही एक पर्व है गुड़ी पड़वा (Gudi padwa 2020).

गुड़ी पड़वा (Gudi padwa 2020) महाराष्ट्र, गोवा समेत दक्षिण भारत के कई हिस्सों में मनाया जाता है. इस साल गुड़ी पड़वा का त्योहार 25 मार्च को मनाया जाएगा. गुड़ी पड़वा को देश के कई हिस्सों में प्रतिप्रदा या युगादि नाम से भी जाना जाता है. इसी दिन से हिंदू नववर्ष का प्रारंभ होता है.

क्या है गुड़ी पड़वा का अर्थ

शास्त्रों के अनुसार, गुड़ी का अर्थ होता है विजय और पड़वा का अर्थ होता प्रतिपदा. यह त्योहार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष के पहले दिन मनाया जाता है. इस दिन महाराष्ट्र के हर घर में हिंदू नववर्ष का जश्न मनाने के लिए विजय का प्रतीक माने जाने वाला गुड़ी लगाया जाता है. इसी दिन शालिवाहन शक की शुरुआत भी होती है.



 

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ब्रह्मा जी ने की थी सृष्टि की रचना

पौराणिक कथाओं के अनुसार, गुड़ी पड़वा (Gudi padwa 2020) के ही दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी. ऐसा माना जाता है कि इसी दिन से सतयुग का आरंभ हुआ था. एक अन्य कथा के अनुसार, गड़ी पड़वा के ही दिन भगवान श्रीराम ने बालि का वध कर दक्षिण भारत के लोगों को बालि के आतंक से मुक्त कराया था. भगवान श्रीराम द्वारा बालि का वध करने के बाद लोगों ने अपने घरों में विजय पताका फहराया था, जिसे गुड़ी कहा जाता है.

गड़ी पड़वा (Gudi padwa 2020) के दिन महाराष्ट्र के लोग पूरे घर की विशेष प्रकार से साफ-सफाई करते हैं. इस दिन लोग श्रीखण्ड, पुरी और पूरन पोली विशेष तौर पर बनाते हैं. पूरन पोली एक प्रकार की मीठी रोटी होती है. गुड़ पड़वा के दिन मराठी महिलाएं 9 गज लंबी साड़ी जिसे नौवारी कहा जाता है वो पहनकर 16 श्रृंगार करती हैं और पुरुष धोती-कुर्ती के साथ लाल या केसरी रंग की पगड़ी बांधते हैं.

 
Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.

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First published: March 22, 2020, 5:25 PM IST
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