Mahashivratri 2021: कब है महाशिवरात्रि का त्योहार, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और व्रत विधि


Pradosh Vrat 2021 Date Shubh Muhurt And Puja Samagri- प्रदोष व्रत हर माह पड़ते हैं. हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का काफी महत्व है. प्रदोष व्रत भोलेशंकर भगवान शिव (God Shiva) को समर्पित माना जाता है. प्रदोष व्रत 10 मार्च बुधवार को पड़ रहा है. बुधवार को पड़ने के कारण इसे बुध प्रदोष व्रत (Budh Pradosh Vrat) कहा जाएगा.

Pradosh Vrat 2021 Date Shubh Muhurt And Puja Samagri- प्रदोष व्रत हर माह पड़ते हैं. हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का काफी महत्व है. प्रदोष व्रत भोलेशंकर भगवान शिव (God Shiva) को समर्पित माना जाता है. प्रदोष व्रत 10 मार्च बुधवार को पड़ रहा है. बुधवार को पड़ने के कारण इसे बुध प्रदोष व्रत (Budh Pradosh Vrat) कहा जाएगा.

Mahashivratri 2021: महाशिवरात्रि के दिन रात्रि में चार बार शिव पूजन (Lord Shiva Puja) की परंपरा है और ऐसा माना जाता है कि इस दिन इन चारों पहर पूजन करने से सभी पापों और कष्टों का निवारण होने के साथ ही घर में सुख समृद्धि भी आती है.

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Mahashivratri 2021: हिन्दू धर्म में अलग-अलग त्योहारों का अपना अलग महत्व है. हर त्योहार को किसी न किसी अलग रूप में मनाया जाता है. इन्हीं त्योहारों में से एक है महाशिवरात्रि. इस दिन भगवान शिव और देवी पार्वती के मिलन उत्सव को बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता है।. मान्यतानुसार शिवरात्रि के दिन ही भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था. इस दिन भगवान शिव की पूरे विधि-विधान के साथ पूजा अर्चना की जाती है और व्रत उपवास करने का विधान है. इस साल महाशिवरात्रि का त्योहार 11 मार्च 2021 (गुरुवार) को मनाया जाएगा. आइए जानते हैं क्या है महाशिवरात्रि की तिथि, पूजा विधि और पूजन का शुभ मुहूर्त.

महाशिवरात्रि की तिथि

हिन्दू पंचांग के अनुसार, महाशिवरात्रि का त्योहार प्रति वर्ष फाल्गुन माह कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है. यह त्योहार भगवान शिव और पार्वती माता के विवाहोत्सव के रूप में मनाया जाता है. इस साल फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 11 मार्च (गुरुवार) को पड़ रही है. इसलिए ये त्योहार उसी दिन मनाया जाएगा.

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महाशिवरात्रि का शुभ मुहूर्त

महाशिवरात्रि त्रयोदशी तिथि- 11 मार्च 2021 (गुरुवार)

चतुर्दशी तिथि प्रारंभ- 11 मार्च, दोपहर 2 बजकर 39 मिनट पर शुरू होगी



चतुर्दशी तिथि समाप्त- 12 मार्च, दोपहर 12 बजकर 23 मिनट पर

निशिता काल का समय- 11 मार्च, रात 12 बजकर 6 मिनट से 12 बजकर 55 मिनट तक

पहला प्रहर- 11 मार्च, शाम 06 बजकर 27 मिनट से 09 बजकर 29 मिनट तक

दूसरा प्रहर- 11 मार्च, रात 9 बजकर 29 मिनट से 12 बजकर 31 मिनट तक

तीसरा प्रहर- 11 मार्च, रात 12 बजकर 31 मिनट से 03 बजकर 32 मिनट तक

चौथा प्रहर- 12 मार्च, सुबह 03 बजकर 32 मिनट से सुबह 06 बजकर 34 मिनट तक

शिवरात्रि व्रत पारण का समय- 12 मार्च, सुबह 06 बजकर 34 मिनट से शाम 3 बजकर 02 मिनट तक

शिव पूजा का समय

मान्यतानुसार महाशिवरात्रि के दिन शुभ काल के दौरान ही भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करनी चाहिए. ऐसा करने से पूजा का सम्पूर्ण फल मिलता है. महाशिवरात्रि के दिन रात्रि में चार बार शिव पूजन की परंपरा है और ऐसा माना जाता है कि इस दिन इन चारों पहर पूजन करने से सभी पापों और कष्टों का निवारण होने के साथ ही घर में सुख समृद्धि भी आती है.

कैसे करें महाशिवरात्रि का व्रत

महाशिवरात्रि व्रत त्रयोदशी तिथि को शुरू होगा, जिसमें पूरे दिन का उपवास रखा जाएगा. महाशिवरात्रि के दिन भक्त भगवान शिव की पूजा करते हैं और अपना व्रत पूरा करने से पहले भोलेनाथ से आशीर्वाद मांगते हैं. हिंदू शास्त्रों के अनुसार, चतुर्दशी पर रात्रि के दौरान चार बार महाशिवरात्रि की पूजा की जाती है. इन चार समयों को चार पहर के रूप में भी जाना जाता है और यह माना जाता है कि इन समयों के दौरान पूजा करने से व्यक्ति अपने पिछले पापों से मुक्त हो जाता है और उन्हें मोक्ष का आशीर्वाद मिलता है. शिव पूजा को रात्रि के दौरान करना अनिवार्य माना जाता है और अगले दिन चतुर्दशी तिथि समाप्त होने से पहले सूर्योदय के बाद इस व्रत का पारण किया जाना चाहिए. यदि आप उपवास करते हैं तो पूरे दिन फलाहार ग्रहण करें और नमक का सेवन न करें. यदि किसी वजह से नमक का सेवन करते हैं तो सेंधा नमक का सेवन करें.

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कैसे करें शिव पूजन

-महाशिवरात्रि के दिन सुबह जल्दी उठें और नित्यकर्मों से निवृत्त होकर स्नान करके साफ वस्त्र धारण करें.

-पूजा वाले स्थान को अच्छी तरह साफ करके सभी देवताओं को स्नान करवाएं.

-इसके बाद जिस जगह पूजा करते हैं, वहां साफ कर लें.

-भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा को साफ चौकी पर स्थापित करके पंचामृत से स्नान कराएं.

-शिवलिंग को भी स्नान करवाकर बेलपत्र, भांग धतूरा, फल, मिठाई, मीठा पान इत्यादि अर्पित करें.

-शिवजी को चंदन का तिलक लगाएं फिर फलों का भोग लगाएं.

-पूरे दिन व्रत का पालन करते हुए शिव पूजन करें.

-दिन भर भगवान शिव का ध्यान करें, उनकी स्तुति करें.(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)
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