Mahavir Jayanti 2021: संकट काल में विचलित नहीं होने देते भगवान महावीर के ये सिद्धांत

Mahavir Jayanti 2021: भगवान महावीर ने दुनिया को सत्य और अहिंसा का पाठ पढ़ाया.

Mahavir Jayanti 2021: भगवान महावीर ने दुनिया को सत्य और अहिंसा का पाठ पढ़ाया.

Mahavir Jayanti 2021: जैन धर्म (Jainism) की प्राचीन मान्यताओं के अनुसार भगवान महावीर (Bhagwan Mahavir) ने 12 वर्षों तक कठोर तप करके अपनी इन्द्रियों पर विजय प्राप्त की थी. उन्होंने दुनिया को सत्य और अहिंसा का पाठ पढ़ाया.

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  • Last Updated: April 18, 2021, 3:08 PM IST
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Mahavir Jayanti 2021: हर साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष को महावीर जयंती मनाई जाती है. इस बार यह 25 अप्रैल, रविवार को होगी. भगवान महावीर जैन धर्म के 24 वें तीर्थंकर थे. जैन धर्म (Jainism) की प्राचीन मान्यताओं के अनुसार भगवान महावीर (Bhagwan Mahavir) ने 12 वर्षों तक कठोर तप करके अपनी इन्द्रियों पर विजय प्राप्त की थी. उन्होंने दुनिया को सत्य और अहिंसा (Truth And Non-Violence) का पाठ पढ़ाया. भगवान महावीर ने दूसरों के दुख दूर करने की धर्मवृत्ति को अहिंसा धर्म कहा है. 'अहिंसा परमो धर्म:' अर्थात अहिंसा सर्वोपरि है. उन्होंने पूरी दुनिया को यह संदेश दिया और संसार का मार्गदर्शन किया. साथ ही दुनिया को जैन धर्म के पंचशील सिद्धांत बताए. ये सिद्धांत अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह, अचौर्य (अस्तेय) और ब्रह्मचर्य हैं.

अहिंसा

जैन धर्म के 5 मूलभूत सिद्धांत हैं. ये जीवन जीना सिखाते हैं और भीतर तक अनंत शांति, आनंद की अनुभूति देते हैं. भगवान महावीर के अनुसार 'अहिंसा परमो धर्म' है. इसे तीन जरूरी नीतियों का पालन करके समन्वित किया जा सकता है. इसमें एक है कायिक अहिंसा यानी किसी को कष्ट न देना. अहिंसा को मानने वाले किसी को पीड़ा, चोट, घाव आदि नहीं पहुंचाते. इसके अलावा मानसिक अहिंसा यानी किसी के बारे में अनिष्ट नहीं सोचना आती है. इसमें किसी भी प्राणी के लिए अनिष्ट, बुरा, हानिकारक नहीं सोचना है. इसके अलावा बौद्धिक अहिंसा आती है. यानी किसी से भी घृणा न करना.

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सत्य

भगवान महावीर का यह सिद्धांत हमें हर स्थिति में सत्य पर कायम रहने की प्रेरणा देता है. इसे अपना कर सत्य के मार्ग पर चलना चाहिए. यानी अपने मन और बुद्धि को इस तरह अनुशासित और संयमित करना, ताकि हर स्थिति में सही का चुनाव कर सकें.

अपरिग्रह



भगवान महावीर का तीसरा सिद्धांत है अपरिग्रह. इसे अपने जीवन में उतारते हुए मानते हुए जैन साधु अपने पास पैसा नहीं रखते. इससे ये सीख मिलती है कि आपको जीवन में जितने की जरूरत है, उतना ही संचय करें. अपरिग्रह के तीन आयाम बताए गए हैं. इसमें से एक है, वस्तुओं का अपरिग्रह. यानी वस्तुओं की उपलब्धता या उनके न होने पर दोनों ही स्थितियों में समान भाव से रहना. मानसिक और शारीरिक रूप से व्याकुलता नहीं होना. इसके अलावा व्यक्तियों का अपरिग्रह. यानी व्‍यक्ति जहां भी रहे फिर चाहे वह जनसमूह हो या एकांत हो. हमेशा प्रसन्नचित रहे. वहीं इसके अंतर्गत माना जाता है कि कोई भी विचार संपूर्ण नहीं होता. केवल शुद्ध चैतन्य स्वरूप ही परम और संपूर्ण है.

अचौर्य (अस्तेय)

अचौर्य सिद्धांत का अर्थ केवल दूसरों की वस्तुएं चुराना नहीं है. यानी इससे चोरी का अर्थ सिर्फ भौतिक वस्तुओं की चोरी ही नहीं है, बल्कि यहां इसका अर्थ खराब नीयत से भी है. अगर आप दूसरों की सफलताओं से विचलित होते हों तो भी यह इसके अंतर्गत आता है. वहीं इसका गहन आध्यात्मिक अर्थ इस तरह बताया गया है कि शरीर-मन-बुद्धि को 'मैं' नहीं मानना.

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ब्रह्मचर्य

भगवान महावीर का पांचवां सिद्धांत ब्रह्मचर्य है. इसका अर्थ अविवाहित या कुंवारा रहना नहीं है, बल्कि इसका वास्‍तविक अर्थ यह है कि व्‍यक्ति का अपनी आत्मा में लीन हो जाना. दूसरे शब्‍दों में कह सकते हैं कि अपने अंदर छिपे ब्रह्म को पहचानना. भगवान महावीर का संपूर्ण जीवन प्रेरणादायी है. उनके सिद्धांतों का सार यही है कि व्यक्ति जन्म से नहीं, कर्म से महान बनता है. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)
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