कोविड 19 से बचाव एवं देश में शांति के लिए कृष्णगिरी में हो रहा अनोखा महायज्ञ

विश्व को इस कठिन त्रासदी से बचाने के लिए किया जाने वाला यह धार्मिक अनुष्ठान है. जो 40,000 वर्गफुट के यज्ञ मंडप में किया जाएगा.

Covid 19: श्रीवसंत विजयजी महाराज के अनुसार, विश्व को इस कठिन त्रासदी से बचाने के लिए किया जाने वाला यह धार्मिक अनुष्ठान है. जो 40,000 वर्गफुट के यज्ञ मंडप में किया जाएगा.

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    नई दिल्ली : भारत में कोविड 19 (Covid 19) महामारी का स्वरूप दिन प्रतिदिन विकराल होता जा रहा है. देश में एक के बाद आ रहे संकट से बचने के लिए श्रीपार्श्व पद्मावती शक्ति पीठ तीर्थ धाम कृष्णगिरी, तमिलनाडु की ओर से राष्ट्रसंत डॉ. श्रीवसंत विजय महाराज के सान्निध्य में 14 से 23 जुलाई 2021 की कालावधि में विश्व शांति एवं महालक्ष्मी कुबेर अर्थ धर्म समृद्धि कलश अनुष्ठान किया जा रहा है.

    श्रीवसंत विजयजी महाराज के अनुसार, इस यज्ञ में 5000 से अधिक कलश अभिमंत्रित किए जाएंगे, जिसे घर पर स्थापित करने पर सुख, शांति, समृद्धि और आरोग्य आएगा. यह छह लीटर का पीतल का अष्टलक्ष्मी युक्त व पीतल के नारियल एवं पान युक्त यह वृहद कलश बहुत ही पवित्र है. इस कलश अनुष्ठान में प्रयोग की जाने वाली सामग्री दुर्लभ है.

    उनके अनुसार, इसमें भारत के 106 वैष्णव मंदिरों का मां लक्ष्मी के चरण में पूजित कुमकुम का समावेश है. मूंगा, पन्ना, मोती, नीलम, आदि नवरत्नों का सामावेश है, विभिन्न रोग निवारक एवं समृद्धिदायक 32 प्रकार के ही लिंग जेम स्टोन का इस में उपयोग किया गया है, 99.99% शुद्ध चांदी का सिक्का, केसर, इलायची, कस्तूरी, कमलगट्टा, पीला व सफेद चंदन, देवदारु,अगर-तगर, आम की बेल की लकड़ी, बेलपत्र, जायफल आदि महत्वपूर्ण, पवित्र और विशेष 370 से अधिक दिव्य वस्तुएं, 32 उपरत्न, 10 लाख आहुतियों से सिद्ध यज्ञ भस्म, लक्ष्मी मंत्रों से अभिमंत्रित कुमकुम एवं अन्य पवित्र सामग्री का समावेश किया गया है.

    उन्‍होंने बताया कि इस कलश अनुष्ठान करने के लिए बड़े महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है. इस महायज्ञ से वातावरण शुद्ध एवं पवित्र होगा, वातावरण में फैले कीटाणु, बीमारियां नष्ट होंगी, मानव जाति को शांति और समृद्धि का मार्ग मिलेगा, देश पर आए इस संकट से देश की सुरक्षा होगी. मानवजाति के कल्याण के लिए, देश की सुरक्षा के लिए किया गया यह एक अलौकिक महायज्ञ, अलौकिक कलश अनुष्ठान होगा.

    उन्‍होंने आगे बताया कि विश्व को इस कठिन त्रासदी से बचाने के लिए किया जाने वाला यह धार्मिक अनुष्ठान है. जो 40,000 वर्गफुट के यज्ञ मंडप में किया जाएगा. देश की सुरक्षा के संकल्प को सिद्ध करने एवं कलशों को सिद्ध करने के लिए एक करोड़ बार महालक्ष्मी के चरणों में कुमकुम पूजा की जाएगी. प्रतिदिन पूर्णाहुति में रत्न, सोना, चांदी, जरी के वस्त्र दसों कुंडों में दस दिन तक डाले जाएंगे.

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