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Makar Sankranti 2022: मकर संक्रांति पर सूर्य देव के रथ में होगा यह परिवर्तन, बढ़ेगा वेग और प्रभाव

Makar Sankranti 2022: मकर संक्रांति पर सूर्य देव के रथ में होगा यह परिवर्तन, बढ़ेगा वेग और प्रभाव

मकर संक्रांति 2022

मकर संक्रांति 2022

Makar Sankranti 2022: मकर संक्रांति का पर्व आज मनाया जा रहा है. सूर्य देव (Surya Dev) जब धनु राशि (Dhanu Rashi) को छोड़कर मकर राशि (Makar Rashi) में आते हैं, तो उनके रथ में भी एक परिवर्तन होता है.

Makar Sankranti 2022: मकर संक्रांति का पर्व आज मनाया जा रहा है. सूर्य देव (Surya Dev) जब धनु राशि (Dhanu Rashi) को छोड़कर मकर राशि  (Makar Rashi) में आते हैं, तो उनके रथ में भी एक परिवर्तन होता है. मकर संक्रांति से सूर्य देव के वेग और प्रभाव में भी वृद्धि होती है. मकर संक्रांति से खरमास भी खत्म हो जाता है. शुभ कार्यों के लिए बृहस्पति ग्रह भी मजबूत स्थिति में आ जाता है. जब खरमास (Kharmas) लगता है तो सूर्य देव की गति धीमी हो जाती है और बृहस्पति की स्थिति कमजोर हो जाती है, इसलिए मांगलिक कार्य नहीं होते हैं. खरमास से जुड़ी एक पौराणिक कथा है, जिसमें बताया गया है कि इस समय में सूर्य देव के रथ के सातों घोड़े विश्राम करने लगते हैं और उनकी जगह रथ में खर यानी गधे जुड़ जाते हैं, इससे सूर्य देव का वेग कम हो जाता है. मकर संक्रांति पर सूर्य देव के रथ से ये खर निकल जाते हैं और फिर सातों घोड़े सूर्य देव के रथ में जुड़ जाते हैं. इससे सूर्य देव का वेग और प्रभाव बढ़ जाता है.

मकर संक्रांति पर खरमास खत्म, शुभ कार्य शुरू

16 दिसंबर 2021 को जब सूर्य देव धनु राशि में आए थे, तो खरमास लग गया था. आज मकर संक्रांति के दिन से खरमास का समापन हो गया है. आज से ही विवाह, सगाई, मुंडन, गृह प्रवेश आदि मांगलिक कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त देखे जाने लगे हैं. जनवरी 2022 के आखिरी सप्ताह में विवाह के मुहूर्त भी हैं.

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खरमास की कथा
पौराणिक कथा में बताया गया है कि सूर्य देव सात घोड़ों वाले रथ पर सवार होकर तीव्र गति से परिक्रमा करते हैं. इससे सृष्टि भी गतिशील रहती है. सबको ऊर्जा प्राप्त होती है. लगातार परिक्रमा करने के कारण सूर्य देव के रथ के घोड़े थक जाते हैं, तो वे रथ को एक तालाब पर रोक देते हैं. सभी घोड़े पानी पीकर आराम करने लगते हैं, लेकिन सूर्य की गति नहीं रू​क सकती है. तभी सूर्य देव को तालाब के पास खर दिख जाते हैं, वे उन दो खरों यानी गधों को रथ में जोड़कर परिक्रमा करने निकल जाते हैं.

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गधों की गति घोड़ों के समान नहीं होती है, इस वजह से सूर्य देव का वेग कम हो जाता है. वे एक माह तक ऐसे ही परिक्रमा करते हैं, इस वजह से इसे खरमास कहा जाता है. मकर संक्रांति वह क्षण होता है, जब उनके रथ से गधों को निकाल दिया जाता है और रथ में फिर से घोड़ों को जोड़ दिया जाता है. सूर्य देव फिर से पूरे वेग से परिक्रमा करने लगते हैं और उनका प्रभाव बढ़ जाता है. खरमास का समापन हो जाता है.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)

Tags: Dharma Aastha, Makar Sankranti

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