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जब गुरु नानक देव जी ने ज़मींदार को समझाया 'ईमानदारी की रोटी' का महत्व

जब गुरु नानक देव जी ने ज़मींदार को समझाया 'ईमानदारी की रोटी' का महत्व

गुरुनानक देव जी ने जमींदार को किसान की रोटी का महत्व समझाया. Image - Shutterstock.com

गुरुनानक देव जी ने जमींदार को किसान की रोटी का महत्व समझाया. Image - Shutterstock.com

Motivational Story: प्रेरक प्रसंग (Motivational Story) के इस क्रम में आज हम आपको सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी (Guru Nanak Dev ji) से जुड़े एक प्रेरक प्रसंग के बारे में बताते हैं.

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    Motivational Story: प्रेरक प्रसंग के इस क्रम में आज हम आपको सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी (Guru Nanak Dev ji) से जुड़े एक प्रेरक प्रसंग (Motivational Story) के बारे में बताते हैं. जग का कल्याण करने के लिए गुरु नानक देव जी अपने प्रिय शिष्य बाला और मरदाना के साथ भ्रमण करते रहते थे. इस दौरान वे लोगों को उपदेश देते थे साथ ही लोगों को बेहतर काम करने के लिए प्रेरित (Inspired) करते थे. ऐसा ही एक प्रेरक प्रसंग है “ईमानदारी की रोटी”, जिसके बारे में हम आपको बताते हैं.

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    प्रेरक प्रसंग-“ईमानदारी की रोटी”

    एक बार गुरु नानक देव जी और उनके शिष्य मरदाना किसी गांव में गए. वहां रहने वाले एक गरीब किसान लालू ने उन लोगों को अपने घर भोजन के लिए आमंत्रित किया. गुरु नानक देव जी और उनके शिष्य मरदाना जब उसके घर भोजन करने पहुंचे, तो उस किसान ने भोजन के दौरान अपने सामर्थ्य के अनुसार रोटी और साग परोसा. लेकिन जैसे ही गुरु नानक देव जी और उनका शिष्य भोजन शुरू करने वाले थे. उसी समय गांव के जमींदार मलिक भागु का सेवक वहां आया और कहने लगा कि आप दोनों को मेरे मालिक ने भोजन के लिए आमंत्रित किया है. वह चलने के लिए दोनों से बार-बार मिन्नत करने लगा. ये देख कर  गुरु नानक जी लालू की रोटी अपने साथ ले कर, मरदाना के साथ जमींदार के घर चले गए.

    गुरु नानक जी के पहुंचते ही जमींदार मलिक भागु ने उनका खूब आदर सत्कार किया और भोजन परोसने की शुरुआत की. भोजन के दौरान जमींदार ने दोनों के सामने कई तरह के पकवान परोसे लेकिन दोनों ने भोजन करने की शुरुआत नहीं की. इस पर जमींदार ने गुरु नानक जी से पूछा कि आप मेरे निमंत्रण पर आने में इतना संकोच क्यों कर रहे थे और अब भोजन करने में संकोच कर रहे हैं. उस गरीब किसान की सूखी रोटी में ऐसा क्या स्वाद है जो मेरे पकवान में नहीं?

    जमींदार की ये बात सुनकर गुरु नानक देव जी पहले कुछ नहीं बोले. फिर उन्होंने एक हाथ में उस रोटी को उठाया जो वह किसान के घर से लाये थे और दूसरे हाथ में जमींदार की रोटी को उठाया. इसके बाद उन्होंने अपने हाथों में ली हुई दोनों रोटी को दबाया. तभी किसान लालू की रोटी से दूध की धार बहने लगी और जमींदार मलिक भागु की रोटी से रक्त की धार बह निकली.

    इसको देखकर गुरु नानक देव जी बोले, लालू किसान के घर की सूखी रोटी में प्रेम और ईमानदारी मिली हुई है. लेकिन तुम्हारी रोटी में अप्रमाणिकता से कमाया हुआ धन और मासूम लोगों का रक्त मिला हुआ है. इस बात का प्रमाण सामने है. इसी वजह से मैं लालू किसान के घर भोजन करना चाह रहा था. गुरु नानक देव जी की यह बात सुनकर जमींदार उनके पैरों में गिर गया और बुरे कर्म त्याग कर अच्छा इन्सान बनने की राह पर चल पड़ा.

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    क्या सीख मिलती है

    इस प्रेरक प्रसंग से यह सीख मिलती है, कि ईमानदारी से कमाई हुई एक रोटी हज़ार तरह के पकवान से भी ज्यादा इज्जतदार, महत्वपूर्ण और स्वादिष्ट होती है. साथ ही यह प्रसंग इस बात के लिए प्रेरित करता है, कि इंसान किसी भी पद और प्रतिष्ठा पर क्यों न हो ईमानदार व्यक्ति को ही समाज में इज्जत मिलती है. इसलिए हमेशा ईमानदार बनकर ही रहना चाहिए. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

    Tags: Lifestyle, Motivational Story, Religion

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