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अपने दुखों की वजह आप खुद न बनें- गौतम बुद्ध

प्रेरित करते हैं गौतम बुद्ध के प्रसंग (Image-Shutterstock)

प्रेरित करते हैं गौतम बुद्ध के प्रसंग (Image-Shutterstock)

Motivational Story of Gautam Buddha: कई बार हमें कोई दूसरा दु:ख नहीं पहुंचाता बल्कि हम अपने दुखों की वजह खुद ही बन जाते हैं. इस बात से हमें खुद को बचाना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से हम खुद को परेशान करते हैं.

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    Gautam Buddha Motivational Story In Hindi: ज्यादातर लोग अपने दुखों की वजह (Reason) दूसरों को मानते हैं. जबकि कई बार ऐसा होता है कि हमें कोई दूसरा दुख नहीं पहुंचाता बल्कि हम अपने दुखों की वजह खुद ही बन जाते हैं. इस बात से हमें खुद को बचाना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से हम खुद को ही परेशान करते हैं और डिप्रेशन (Depression) में चले जाते हैं. ऐसा ही एक प्रेरक प्रसंग (Prerak prasang) गौतम बुद्ध (Gautam buddha) का भी है, जो हमें अपने दुखों की वजह खुद को न बनने देने के लिए प्रेरित करता है. आइए, जानते हैं इस प्रेरक प्रसंग के बारे में.

    अपने दुखों की वजह आप खुद न बनें

    एक बार गौतम बुद्ध नगर में घूम रहे थे. तभी बुद्ध ने सुना कि उस नगर में रहने वाले कुछ लोग बुद्ध को बुरा-भला कह रहे हैं और बद्दुआएं दे रहे हैं. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि उस नगर में रहने वाले कुछ बुद्ध विरोधियों ने आम नागरिकों के मन में ये बात बिठा दी थी कि गौतम बुद्ध एक ढोंगी व्यक्ति हैं और ये उनके धर्म को भ्रष्ट कर रहे हैं. इस वजह से उस नगर में रहने वाले लोग बुद्ध को पसंद नहीं करते थे और उनको अपना दुश्मन मानते थे.

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    गौतम बुद्ध ने जब नगरवासियों के इन उलाहनों को सुना तो वह एक कोने में शांति के साथ खड़े हो गए और उनकी बुरी बातों को आराम से सुनते रहे. इस दौरान बुद्ध ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. कुछ देर बाद जब नगरवासी बुद्ध को बुरा-भला कहते हुए थक गए और चुप हो गए तो गौतम बुद्ध ने उन नगरवासियों से कहा, क्षमा चाहता हूं लेकिन अगर आप लोगों की बातें खत्म हो गई हैं तो मैं यहां से जाऊं? ये सुनकर उनको बुरा कहने वाले लोग बहुत आश्चर्यचकित हुए. तभी वहां मौजूद लोगों में से एक व्यक्ति ने बोला, ‘हम लोग तुम्हारा गुणगान नहीं कर रहे हैं, तुमको उलाहने दे रहे हैं और तुम्हें बुरा बोल रहे हैं. क्या तुम पर इन बातों का कोई असर नहीं हो रहा?’

    उस व्यक्ति की बात का जवाब देते हुए गौतम बुद्ध ने कहा, आप सब चाहें मुझे कितनी भी गालियां दें या कितना भी बुरा कहें, मैं इनहें खुद पर नहीं लूंगा क्योंकि मैं जानता हूं कि मैं कुछ गलत नहीं कर रहा इसलिए इन बातों को जब तक मैं स्वीकार नहीं करता, तब तक इनका मुझ पर कोई असर नहीं पड़ रहा है. गौतम बुद्ध ने आगे कहा, जब मैं इन गालियों और बुराइयों को अपने ऊपर लूंगा ही नहीं तो ये निश्चित तौर पर आपके पास ही रह जायेंगी और मुझ पर असर नहीं करेंगी.

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    ये शिक्षा मिलती है

    गौतम बुद्ध का ये प्रेरक प्रसंग हमें ये शिक्षा देता है और इस बात के लिए प्रेरित करता है कि जब आप गलत नहीं हैं तो किसी की गलत और निगेटिव बातों का असर कभी भी खुद पर नहीं लेना चाहिए क्योंकि इससे आप अपने ही दुखों की वजह खुद बन सकते हैं.

    (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

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