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कैसे हुई नवरात्रि मनाने की शुरुआत, पढ़ें ये पौराणिक कथाएं

मां की प्रतिमा या चित्र के पास ज्वारे बोने की परम्परा है-Image/ Shutterstock.com

मां की प्रतिमा या चित्र के पास ज्वारे बोने की परम्परा है-Image/ Shutterstock.com

Navratri 2021: कई बार लोगों के मन में ये सवाल आता है कि नवरात्रि (Navratri) कब से और क्यों मनाई जाती है? तो बता दें कि इस बारे में कई पौराणिक कथाएं (Mythological Stories) प्रचलित हैं.

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    Navratri 2021: नवरात्रि पर्व हिन्दू धर्म में बेहद महत्व रखता है. इस पर्व को लेकर लोग काफी उत्साहित (Excited) रहते हैं और मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना में नतमस्तक हो जाते हैं. इस वर्ष शारदीय नवरात्रि (Shardiya Navratri) की शुरुआत 07 अक्टूबर, गुरुवार से हो चुकी है. नवरात्रि का समापन 14 अक्टूबर को होगा और 15 अक्टूबर, शुक्रवार के दिन दशहरे का पर्व मनाया जायेगा. इसी दिन नवरात्रि व्रत का पारण भी किया जायेगा. लेकिन कई बार लोगों के मन में ये सवाल आता है कि नवरात्रि कब से और क्यों मनाई जाती है? तो बता दें कि इस बारे में कई पौराणिक कथाएं (Mythological Stories) प्रचलित हैं. जिनमें से दो के बारे में आज हम आपको बताते हैं.

    ये भी पढ़ें: Navratri 2021: जानें नवरात्रि में देवी मां का क्यों किया जाता है 16 श्रृंगार, महिलाएं भी ऐसे होती हैं तैयार

    नवरात्रि पर्व मनाये जाने की पौराणिक कथा

    पहली पौराणिक कथा के अनुसार, महिषासुर नाम का एक राक्षस था जो ब्रह्माजी का बहुत बड़ा भक्त था. उसने अपने तप से ब्रह्माजी को प्रसन्न करके एक वरदान प्राप्त कर लिया था. जिसके तरह उसे कोई देव, दानव या पृथ्वी पर रहने वाला कोई मनुष्य मार नहीं सकता था. वरदान प्राप्त करते ही वह बहुत निर्दयी हो गया और तीनों लोकों में आतंक माचने लगा. उसके आतंक से परेशान होकर देवी देवताओं ने ब्रह्मा, विष्णु, महेश के साथ मिलकर मां शक्ति के रूप में दुर्गा देवी को जन्म दिया. जिसके बाद मां दुर्गा और महिषासुर के बीच नौ दिनों तक भयंकर युद्ध हुआ और दसवें दिन मां दुर्गा ने महिषासुर का वध कर दिया. तब से इस नौ दिनों को बुराई पर अच्छाई की विजय के रूप में मनाया जाता है.

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     ये भी पौराणिक कथा है प्रचलित

    नवरात्रि मनाये जाने की एक और पौराणिक कथा है. इसके अनुसार, भगवान श्रीराम ने लंका पर आक्रमण करने से पहले, रावण से युद्ध में जीत की कामना के साथ शक्ति की देवी भगवती मां की आराधना की थी. उन्होंने रामेश्वरम में नौ दिनों तक माता की पूजा-अर्चना की. श्रीराम की भक्ति से प्रसन्न होकर मां ने उनको लंका में विजय प्राप्ति का आशीर्वाद दिया था. जिसके बाद भगवान राम ने लंका नरेश रावण को युद्ध में हराकर उसका वध कर दिया और लंका पर विजय प्राप्त की. तब से इन नौ दिनों को नवरात्रि के रूप में मनाया जाता है. इसके साथ ही लंका पर विजय प्राप्त करने के दिन को दशहरे के रूप में मनाया जाता है.(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

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