125 साल बाद हुआ है ऐसा,सावन के पहले सोमवार के दिन ही बना नागपंचमी का योग

भगवान शिव को सर्प अत्यंत प्रिय हैं इसीलिए उनके प्रिय माह सावन में नाग पंचमी का त्योहार आता है

News18Hindi
Updated: July 23, 2019, 5:35 PM IST
125 साल बाद हुआ है ऐसा,सावन के पहले सोमवार के दिन ही बना  नागपंचमी का योग
भगवान शिव को सर्प अत्यंत प्रिय हैं इसीलिए उनके प्रिय माह सावन में नाग पंचमी का त्योहार आता है
News18Hindi
Updated: July 23, 2019, 5:35 PM IST
सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी के रूप में मनाया जाता है. इस बार नागपंचमी 22 जुलाई यानी सावन के पहले सोमवार के साथ पड़ा है. ऐसा संयोग 125 साल बाद बन रहा है, जब सावन के पहले सोमवार के दिन नाग पंचमी पड़ा है. हिन्दू धर्म में नाग पंचमी का अत्यंत महत्व माना जाता है. एक मान्यता के अनुसार इस दिन सर्पों के 12 स्वरूपों की पूजा की जाती है और दूध चढ़ाया जाता है. भगवान शिव को सर्प अत्यंत प्रिय हैं इसीलिए उनके प्रिय माह सावन में नाग पंचमी का त्योहार आता है.

क्यों नाग को देवी-देवताओं की तरह पूजा जाता है

नाग जहां भगवान शंकर के गले से लिपटे रहते हैं, वहीं भगवान विष्णु के शैय्या भी हैं. हमारे जीवन में भी लोगों का नागों से गहरा नाता है. कहा तो यह भी जाता है कि चूंकि सावन के महीने में काफी बारिश होती है, भू गर्भ से निकलकर नाग भू तल पर आ जाते हैं. ऐसी स्थिति में वह किसी को आहत ना करें इस कारण भी नाग पंचमी की पूजा की जाती है.

पूजन विधि

नाग पंचमी के दिन सर्प को देवता मान कर पूजा करते हैं. प्रातः काल नहाकर सोने, चांदी या तांबे के नाग-नागिन की मूर्ति बनवाएं. उनकी प्राण प्रतिष्ठा करें. फिर धूप, दीप नैवेद्य आदि से पंचोपचार या षोड़शोपचार पूजा करें. सर्पसूक्त से प्रतिष्ठित नाग-नागिन का दूध से अभिषेक करके पूजन करना चाहिए. उसके बाद शिव जी का रुद्राभिषेक कर के उनको अर्पण कर देना चाहिए. ऐसा न कर पाएं तो धातु के नाग-नागिन को नदी में बहा दें.

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए धर्म से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: July 22, 2019, 11:54 AM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...