Nag Panchami 2019: नागपंचमी पर बन रहा यह अद्भुत योग, सालों बाद सोमवार और सिद्ध योग साथ

नाग पंचमी २०१९, Nag Panchami 2019: धर्म शास्त्रों में नागपंचमी के दिन पूरे विधि विधान से नागदेवता की पूजा करने पर शुभ फल की प्राप्ति होती है.

News18Hindi
Updated: August 3, 2019, 11:53 AM IST
Nag Panchami 2019: नागपंचमी पर बन रहा यह अद्भुत योग, सालों बाद सोमवार और सिद्ध योग साथ
नागपंचमी पर बन रहा यह अद्भुत योग, सालों बाद सोमवार और सिद्ध योग साथ
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Updated: August 3, 2019, 11:53 AM IST
Nag Panchami 2019, नाग पंचमी २०१९: सावन माह के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली नागपंचमी का काफी धार्मिक महत्व है. नागपंचमी के दिन नागदेवता की पूजा करने का धार्मिक रिवाज है. इस बार नागपंचमी 5 अगस्त को पड़ रही है. हालांकि, पंचांग के मुताबिक़, 4 अगस्त रात 11.02 बजे से ही पंचमी तिथि लग जाएगी जोकि 5 अगस्त रात 8.40 बजे तक रहेगी. ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक़, इस बार की नागपंचमी कई मायनों में बेहद ख़ास है. वजह है कि इस बार की नागपंचमी सोमवार के दिन सिद्धयोग में पड़ रही है. ऐसा अद्भुत योग कई सालों बाद आता है. आइए जानते हैं नागपंचमी की पूजन विधि:

नागपंचमी पूजा विधि:
धर्म शास्त्रों में नागपंचमी के दिन पूरे विधि विधान से नागदेवता की पूजा करने पर शुभ फल की प्राप्ति होती है. इस दिन व्रत करने और पूजा करने वाले जातकों को घर के मुख्यद्वार के दोनों तरफ गाय के गोबर से नागदेवता का चित्र उकेर कर उनकी पूजा करनी चाहिए. चित्र बनाते समय ध्यान रखें कि पांच फन वाले नागदेवता का पूजन काफी शुभ माना जाता है. हिन्दू धर्म शास्त्रों के मुताबिक़, नागदेवता कुल 12 होते हैं. अनंत, वासुकी, शेष, पद्म, कंबल, करकोटक, उच्चतर, धृतराष्ट्र, शंखपाद, कालिय, तक्षक और पिंगल भी नागदेवता हैं जिनकी पूजा की जाती है.

नागदेवता की पूजा करते समय पंचोपचार या षोडशोपचार विधि अपनानी चाहिए. मान्यता है कि इस दिन नागदेवता को दूध, लावा और खीर का प्रसाद चढ़ाने पर उनकी कृपा प्राप्त होती है. नागदेवता की पूजा करते समय इन मन्त्रों का पाठ करना बेहद शुभ माना जाता है.

ॐ भुजंगेशाय विद्महे,
सर्पराजाय धीमहि,
तन्नो नाग: प्रचोदयात्।।
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अनंत वासुकी शेषं पद्मनाभं च मंगलम्
शंखपालं ध्रतराष्ट्रकंच तक्षकं कालियं तथा।
एतानी नव नामानि नागानां च महात्मना
सायंकाले पठे नित्यं प्रातःकाले विशेषतः
तस्य विषभयं नास्ति सर्वत्र विजयी भवेत्।।

सर्वे नागा: प्रीयन्तां मे ये केचित् पृथ्वीतले
ये च हेलिमरीचिस्था ये न्तरे दिवि संस्थिता:।
ये नदीषु महानागा ये सरस्वतिगामिन:
ये च वापीतडागेषु तेषु सर्वेषु वै नम:।

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन्हें प्रयोग में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क अवश्य करें.

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First published: August 1, 2019, 11:26 AM IST
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