Nag Panchami 2020: नाग पंचमी के दिन होती है इन 8 नाग देवताओं की पूजा, जानें इनकी कहानी

Nag Panchami 2020: नाग पंचमी के दिन होती है इन 8 नाग देवताओं की पूजा, जानें इनकी कहानी
आस्तिक मुनि ने सावन की पंचमी को ही नागों को यज्ञ में जलने से बचाया और इनके ऊपर दूध डालकर जलते हुए शरीर को शीतलता प्रदान की.

धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन नागदेव (Nag Dev) की पूजा करने से कुंडली के राहु और केतु से संबंधित दोष दूर होते हैं. सांप के भय और सर्पदंश से मुक्ति पाने के लिए नाग पंचमी के दिन कालसर्प योग की पूजा भी करवाई जाती है.

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आज नाग पंचमी (Nag Panchami) का त्योहार मनाया जा रहा है. हर साल यह पर्व सावन महीने (Sawan Month) में शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है. नाग पंचमी के दिन सांपों (नाग देवताओं) की पूजा की जाती है. धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन नागदेव (Nag Dev) की पूजा करने से कुंडली के राहु और केतु से संबंधित दोष दूर होते हैं. सांप के भय और सर्पदंश से मुक्ति पाने के लिए नाग पंचमी के दिन कालसर्प योग की पूजा भी करवाई जाती है. इस दिन महिलाएं सांप को भाई मानकर उनकी पूजा करती हैं और भाई से अपने परिजनों की रक्षा का आशीर्वाद मांगती हैं. नाग भगवान शिव के गले का हार भी हैं और भगवान विष्णु की शैय्या भी.

आम जीवन में भी नाग से लोगों का गहरा नाता रहा है. इन्ही कारणों से नाग देवता की पूजा-अराधना की जाती है. भक्त इस दिन दूध और धान का लावा चढ़ाकर सुख व समृद्धि का आशीर्वाद मांगते हैं. महाभारत में नागों की उत्पत्ति का वर्णन मिलता है. महाभारत आदि ग्रंथों में नागों की उत्पत्ति के बारे में बताया गया है. नागपंचमी के दिन आठ नागों की पूजा होती है. इनमें अनन्त, वासुकि, पद्म, महापद्म, तक्षक, कुलीक, कर्कट और शंख हैं.

अनंत (शेषनाग)
भगवान विष्णु के सेवक शेषनाग के सहस्र फन पर धरती टिकी हुई है. ब्रह्मा के वरदान से ये पाताल लोक के राजा हैं. रामायण काल में लक्ष्मण शेषनाग के अवतार थे और महाभारत काल में बलराम शेषनाग के अंश थे.
वासुकि


भगवान शिव के सेवक वासुकि हैं. समुद्र मंथन के दौरान मंदराचल पर्वत को मथनी तथा वासुकि को ही रस्सी बनाया गया था. महाभारत काल में उन्होंने विष से भीम को बचाया था.

पद्म
पद्म नागों का गोमती नदी के पास के नेमिश नामक क्षेत्र पर शासन था. बाद में ये मणिपुर में बस गए थे. कहते हैं असम में नागवंशी इन्हीं के वंशज हैं.

महापद्म 
विष्णुपुराण में सर्प के विभिन्न कुलों में महाद्म का नाम सामने आया है.

तक्षक नाग
तक्षक नाग का वर्णन महाभारत में मिलता है. तक्षक पाताल में निवास करने वाले आठ नागों में से एक हैं. यह माता कद्रू के गर्भ से उत्पन्न हुआ था तथा इसके पिता कश्यप ऋषि थे. तक्षक 'कोशवश' वर्ग का था. यह काद्रवेय नाग है. माना जाता है कि तक्षक  का राज तक्षशिला में था.

कुलिक
कुलिक नाग जाति में ब्राह्मण कुल की मानी जाती है. कुलिक नाग का संबंध ब्रह्मा जी से भी माना जाता है.

कर्कट नाग
कर्कट शिव के एक गण हैं. पौराणिक कथाओं के अनुसार, सर्पों की मां कद्रू ने जब नागों को सर्प यज्ञ में भस्म होने का श्राप दिया तब भयभीत होकर कंबल नाग ब्रह्माजी के लोक में, शंखचूड़ मणिपुर राज्य में, कालिया नाग यमुना में, धृतराष्ट्र नाग प्रयाग में, एलापत्र ब्रह्मलोक में और अन्य कुरुक्षेत्र में तप करने चले गए.

शंख
नागों के आठ कुलों में शंख एक हैं. शंख नाग जातियों में सबसे बुद्धिमान है. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
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