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कब है नरसिंह जयंती? जानें तिथि, पूजा मुहूर्त एवं पौराणिक महत्व

मई 2022 के दूसरे सप्ताह में नरसिंह जयंती जैसे कई व्रत एवं त्योहार आने वाले हैं.

मई 2022 के दूसरे सप्ताह में नरसिंह जयंती जैसे कई व्रत एवं त्योहार आने वाले हैं.

भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार धारण किया था. नरसिंह जयंती (Narasimha Jayanti) कब मनाई जाती है और पूजा का समय क्या है? आइए जानते हैं ​इसके बारे में.

नरसिं​ह जयंती को भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार के प्रकाट्य दिवस के रूप में मनाते हैं. नरसिं​ह जयंती को नृसिंह जयंती भी लिखते हैं. हर साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को नरसिंह जयंती मनाई जाती है. इस तिथि को ही भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार लिया था. नरसिं​ह अवतार शब्द को देखेंगे तो, आपको पता चलता है कि नरसिंह अवतार में भगवान विष्णु का आधा शरीर नर का और आधा शरीर सिंह का था. शरीर का ऊपरी हिस्सा​ सिंह का था और नीचला हिस्सा मनुष्य का था. भगवान विष्णु ने अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए ही यह अवतार लिया था. श्री कल्लाजी वैदिक विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभागाध्यक्ष डॉ. मृत्युञ्जय तिवारी से जानते हैं नरसिंह जयंती (Narasimha Jayanti) की तिथि, पूजा मुहूर्त एवं महत्व के बारे में.

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नरसिंह जयंती 2022 ति​थि
पंचांग के अनुसार, वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि का प्रारंभ 14 मई शनिवार को दोपहर 03:22 बजे से होगा और इसका समापन 15 मई रविवार को दोपहर 12:45 बजे होगा. ऐसे में इस वर्ष नरसिंह जयंती 14 मई को मनाई जाएगी.

नरसिंह जयंती 2022 पूजा मुहूर्त
नरसिंह जयंती की पूजा का समय शाम 04 बजकर 22 मिनट से शाम 07 बजकर 04 मिनट तक है. इस दिन भगवान विष्णु के नरसिंह स्वरूप की विधि​ विधान से पूजा करते हैं. इस दिन आपको भगवान नरसिंह की पूजा के लिए करीब पौने तीन घंटे का शुभ समय प्राप्त हो रहा है.

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जो लोग नरसिंह जयंती के अवसर पर व्रत रखेंगे, वे व्रत का पारण 15 मई को दोपहर 12:45 बजे के बाद करेंगे.

नरसिंह जयंती का महत्व
इस दिन जो भगवान ​नरसिं​ह की पूजा करता है, उसे भय से मुक्ति मिलती है. हिरण्यकश्यप को वरदान प्राप्त था कि उसे कोई भी नर या पशु अस्त्र या शस्त्र से दिन में या रात में, घर के अंदर या घर के बाहर, न जमीन पर और न ही आसमान में मार सकता था. इस वजह से उसने स्वयं को भगवान समझ लिया.

उसने अपने पुत्र प्रह्लाद को भगवान विष्णु की भक्ति से दूर करने के लिए और उसे कई प्रकार से मारने की साजिश रची. लेकिन विष्णु कृपा से हर बार प्रह्लाद बच गए. वैशाख शुक्ल चतुर्दशी को भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार लिया और वे खंभा फाड़कर प्रकट हुए.

उन्होंने हिरण्यकश्यप को पकड़ कर घर के दहलीज पर अपने दोनों पैरों पर लिटा दिया और अपने तेज नाखूनों से उसका पेट फाड़कर उसका अंत कर दिया. इस प्रकार से उन्होंने भक्त प्रह्लाद की रक्षा की.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news 18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)

Tags: Dharma Aastha, Lord vishnu

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