Narsingh Jayanti 2021 Katha: नरसिंह जयंती आज, कथा से जानें भगवान विष्णु को क्यों लेना पड़ा अवतार

नरसिंह देव, ना पूरे पशु थे और ना पूरे मनुष्य

Narsingh Jayanti 2021 Katha: : नरसिंह देव, ना पूरे पशु थे और ना पूरे मनुष्य. जानें, आखिर क्यों भगवान विष्णु ने लिया शेर के मुंह और इंसान के शरीर वाला नरसिंह अवतार...

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    Narsingh Jayanti 2021 Katha: आज नरसिंह जयंती मनाई जा रही है. आज भक्त अपने घरों में भगवान विष्णु के रूप 'नरसिंह भगवान' की पूजा अर्चना कर रहे हैं. हर साल यह वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को बड़ी धूमधाम से मनाई जाती है.लेकिन इस बार लॉकडाउन के चलते भक्त अपने घरों में ही जयंती मना रहे हैं. मान्यता है कि इसी दिन भगवान विष्णु ने अपने अनन्य भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए नरसिंह अवतार लिया था और हिरण्यकश्यप का वध किया था. इतिहास में ऐसा कई बार हुआ है जब भक्तों पर अत्याचार बढ़ने पर भगवान विष्णु ने उनकी रक्षा के लिए अवतार लिया है. आइए जानते हैं भगवान नरसिंह के अवतार लेने की पौराणिक कथा...

    नरसिंह भगवान की कथा:
    पौराणिक कथा के अनुसार, हिरण्यकश्यप नाम का एक राक्षस था जो भगवान विष्णु का घोर विरोधी था. उसके राज्य में जो भी भगवान का नाम लेता उन पर बहुत अत्याचार किए जाते. हिरण्यकश्यप चाहता था कि उसकी प्रजा उसे ही भगवान् माने. उनका बेटा प्रह्लाद बहुत बड़ा विष्णु भक्त था. हिरण्यकश्यप ने उसे बहुत समझाया और डर दिखाया. लेकिन जब भक्त प्रह्लाद के सामने उसकी एक न चली तो उसने उन्हें पहाड़ी से नीचे फेंकने का आदेश दिया लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से भक्त प्रहलाद को कुछ भी नहीं हुआ. जब हिरण्यकश्यप ने यह देखा तो क्रोध से तिलमिला उठा और भगवान को ललकारने लगा. उसी समय उसके महल का खंभा फटा और नरसिंह भगवान अवतरित हुए. उनका रूप देख हिरण्यकश्यप कांप उठा. नरसिंह देव, ना पूरे पशु थे और ना पूरे मनुष्य, उन्होंने हिरण्यकश्यप का वध अस्त्रों या शस्त्रों से नहीं बल्कि अपनी गोद में बिठाकर अपने नाखूनों से उसकी छाती चीर कर किया था.

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    बता दें कि हिरण्यकश्यप ने ब्रह्मा जी की तपस्या कर उनसे वरदान मांगा था कि उसे न कोई इंसान मार पाए और न ही जानवर. न मैं रात में मारा जाऊं और न सुबह, न मेरी मौत घर के अन्दर हो न बाहर. इसलिए भगवान विष्णु को नरसिंह का अवतार लेना पड़े. नरसिंह देव, ना पूरे पशु थे और ना पूरे मनुष्य, उन्होंने हिरण्यकश्यप का वध अस्त्रों या शस्त्रों से नहीं बल्कि अपनी गोद में बिठाकर अपने नाखूनों से उसकी छाती चीर कर किया था. जिस समय हिरण्यकश्यप वध हुआ उस समय शाम का समय था और महल की देहरी पर बैठकर नरसिंह भगवान ने हिरण्यकश्यप का वध किया. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)
    Published by:Bhagya Shri Singh
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