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    Navratri 2020: मां सती की कोहनी से बना उज्जैन का हरसिद्धि माता मंदिर, जानें इस शक्तिपीठ के बारे में

    उज्जैन का हरसिद्धि माता मंदिर
    उज्जैन का हरसिद्धि माता मंदिर

    कहा जाता है कि आज जो उज्जैन का हरसिद्धि मंदिर हैं, वहां सती माता के हाथ की कोहनी (Elbow) आकर गिरी थी, जिसके कारण इस शक्तिपीठ (Shaktipeeth) की स्थापना हुई. शारदीय नवरात्रि (Navratri 2020) में नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में श्रद्धालु बड़ी संख्या में यहां माता के दर्शन के लिए आते हैं.

    • News18Hindi
    • Last Updated: October 19, 2020, 10:12 AM IST
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    प्रत्येक वर्ष श्राद्ध खत्म होते ही अगले दिन से नवरात्रि (Navratri 2020) की प्रतिपदा तिथि होती है और कलश स्थापना की जाती है, लेकिन इस साल ऐसा नहीं हुआ क्योंकि इस बार श्राद्ध समाप्त होते ही अधिकमास लग गया और इस वजह से नवरात्रि एक महीने की देरी से शुरू हुई. नवरात्रि पर्व हिन्दू धर्म के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण त्योहार है. इस पावन अवसर पर मां दुर्गा (Maa Durga) के नौ रूपों की आराधना की जाती है. नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है. इसलिए यह पर्व नौ दिनों तक मनाया जाता है. वेद-पुराणों में मां दुर्गा को शक्ति का रूप माना गया है जो असुरों से इस संसार की रक्षा करती हैं. नवरात्रि के समय देवी मां के भक्त उनसे अपने सुखी जीवन और समृद्धि की कामना करते हैं.

    शक्तिपीठों की कहानी
    भारतीय आध्यात्मिक इतिहास में शक्तिपीठों का बहुत महत्व है और इन शक्तिपीठों के बनने की एक पौराणिक कथा है. देवी पुराण में 51 शक्तिपीठों का वर्णन है. कहा जाता है कि दक्ष राजा ने अपने दामाद भगवान शिव का अपमान करने के लिए एक यज्ञ का आयोजन किया था और भगवान शिव के अलावा इस यज्ञ में सभी देवी-देवताओ को आमंत्रित किया. वहीं भगवान शिव की पत्नी माता सती यज्ञ में चली गई और हवन कुंड में सती हो गईं. भगवान शिव सती के शरीर को लेकर विनाश का दिव्य नृत्य करने लगे. भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र का इस्तेमाल किया. इसके बाद जहां-जहां माता सती के शरीर के टुकड़े, धारण किए वस्त्र या आभूषण गिरे, वहां-वहां शक्तिपीठ अस्तित्व में आया.

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    हरसिद्धि माता मंदिर, उज्जैन


    भारतीय उपमहाद्वीप में हरसिद्धि माता के कई प्रसिद्ध मंदिर है, लेकिन उज्जैन स्थित हरसिद्धि माता मंदिर सबसे प्राचीन है. कहा जाता है कि आज जो मंदिर हैं, वहां सती माता के हाथ की कोहनी आकर गिरी थी, जिसके कारण इस शक्तिपीठ की स्थापना हुई. शारदीय नवरात्रि में नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में श्रद्धालु बड़ी संख्या में यहां माता के दर्शन के लिए आते हैं.

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    मंदिर की विशेषता
    मुख्य गर्भगृह में माता हरसिद्धि के दाएं ओर महालक्ष्मी और माता हरसिद्धि के बाएं तरफ देवी महासरस्वती भी विराजित हैं. उज्जैन का प्रसिद्ध शक्तिपीठ हरसिद्धि माता मंदिर महाकाल ज्योतिर्लिंग मंदिर के पास ही स्थित है. उज्जैन की रक्षा के लिए आस-पास देवियों का पहरा है, उनमें से एक हरसिद्धि देवी भी हैं. इस देवी मंदिर का पुराणों में भी वर्णन मिलता है. मंदिर में दो विशाल दीप स्तंभ हैं. मंदिर परिसर में ही परमार कालीन बावड़ी है. गर्भगृह में देवी श्रीयंत्र पर विराजमान हैं. सभामंडप में ऊपर की ओर भी श्रीयंत्र बनाया गया है. इस यंत्र के साथ ही देश के 51 देवियों के चित्र बीज मंत्र के साथ चित्रित हैं. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
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