Navratri 2020: जानें कब से शुरू हो रही है शारदीय नवरात्रि, इस दिन होगी कलश स्थापना

नवरात्रि में मां शक्ति के 9 स्वरूपों की पूजा की जाती है.
नवरात्रि में मां शक्ति के 9 स्वरूपों की पूजा की जाती है.

मान्यता है कि शारदीय नवरात्रि (Navratri 2020) मां दुर्गा (Maa Durga) की आराधना का श्रेष्ठ समय होता है. नवरात्रि के इन पावन दिनों में हर दिन मां के अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है, जो अपने भक्तों को खुशी, शक्ति और ज्ञान प्रदान करती हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 6, 2020, 5:45 PM IST
  • Share this:
Navratri 2020 Date: इस बार अधिकमास (Adhik Maas 2020) लगने के कारण शारदीय नवरात्रि (Navratri) एक महीने की देरी से शुरू होगी. हिंदू पंचांग के अनुसार हर वर्ष पितृपक्ष के समाप्ति के बाद अगले दिन से ही शारदीय नवरात्रि शुरू हो जाती है लेकिन इस बार अधिक मास होने के कारण पितरों की विदाई के बाद नवरात्रि का त्योहार शुरू नहीं हो सका. इस बार नवरात्रि 17 अक्टूबर 2020 से शुरू होकर 25 अक्टूबर तक चलेगी. हिंदू धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व होता है. नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है. आइए आपको बताते हैं शारदीय नवरात्रि के विशेष संयोग, कलश स्थापना और मां शक्ति के स्वरूपों के बारे में.

नवरात्रि में मां शक्ति के 9 स्वरूपों की होती है पूजा
नवरात्रि में मां शक्ति के 9 स्वरूपों की पूजा की जाती है. इस दौरान शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धदात्री की पूजा की जाती है. ये सभी मां के नौ स्वरूप माने जाते हैं. नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना होती है. शैलपुत्री को प्रथम देवी के रूप में पूजा जाता है. 9 दिनों तक चलने वाले इस पर्व में व्रत और पूजा का विशेष महत्व बताया गया है.

इसे भी पढ़ें - अधिकमास, मलमास, खरमास और चतुर्मास में क्‍या है फर्क, जानें
जानें कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त


आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि यानी कि 17 अक्टूबर 2020 के दिन कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त है. कलश स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त का समय सुबह 06 बजकर 27 मिनट से 10 बजकर 13 मिनट तक है. कलश स्थापना के लिए अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 44 मिनट से 12 बजकर 29 मिनट तक रहेगा.

जानें कब किस देवी की होगी पूजा
17 अक्टूबर- मां शैलपुत्री पूजा, कलश स्थापना
18 अक्टूबर- मां ब्रह्मचारिणी पूजा
19 अक्टूबर- मां चंद्रघंटा पूजा
20 अक्टूबर- मां कुष्मांडा पूजा
21 अक्टूबर- मां स्कंदमाता पूजा
22 अक्टूबर- मां कात्यायनी पूजा
23 अक्टूबर- मां कालरात्रि पूजा
24 अक्टूबर- मां महागौरी दुर्गा पूजा
25 अक्टूबर- मां सिद्धिदात्री पूजा

जानें शारदीय नवरात्रि का विशेष महत्व
मान्यता है कि शारदीय नवरात्रि माता दुर्गा की आराधना का श्रेष्ठ समय होता है. नवरात्रि के इन पावन दिनों में हर दिन मां के अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है, जो अपने भक्तों को खुशी, शक्ति और ज्ञान प्रदान करती हैं. नवरात्रि का हर दिन देवी के विशिष्ठ रूप को समर्पित होता है और हर देवी स्वरूप की कृपा से अलग-अलग तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है. नवरात्रि का पर्व शक्ति की उपासना का पर्व है.

इसे भी पढ़ें - सप्‍ताह के सातों दिन करें इन देवी देवताओं की पूजा, बदल जाएगी किस्मत

कैसे करें कलश स्थापना व देवी आराधना
शारदीय नवरात्रि शक्ति पर्व है. हिन्दू धर्म में इस पर्व को विशेष महत्व बताया गया है. 17 अक्टूबर को सुबह 7 बजकर 45 मिनट के बाद शुभ मुहूर्त में कलश स्थापित करें. नौ दिनों तक अलग-अलग माताओं की विभिन्न पूजा उपचारों से पूजन, अखंड दीप साधना, व्रत उपवास, दुर्गा सप्तशती व नवार्ण मंत्र का जाप करें. अष्टमी को हवन व नवमी को नौ कन्याओं का पूजन करें. वैश्विक महामारी कोरोना के चलते अपनी और दूसरों की सुरक्षा का ख्याल जरूर रखें. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज