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Navratri First Day: प्रतिपदा को पढ़ें मां शैलपुत्री व्रत कथा और आरती, तभी पूरी होगी पूजा

News18Hindi
Updated: March 25, 2020, 11:01 AM IST
Navratri First Day: प्रतिपदा को पढ़ें मां शैलपुत्री व्रत कथा और आरती, तभी पूरी होगी पूजा
मां शैलपुत्री व्रत कथा और आरती

नवरात्रि पहला दिन (Navratri First Day): नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा के बाद उनकी आरती और कथा का पाठ किया जाता किया जाता है.

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  • Last Updated: March 25, 2020, 11:01 AM IST
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नवरात्रि पहला दिन (Navratri First Day): नवरात्रि के पहले दिन मां शक्ति के पहले स्वरुप मां शैलपुत्री की पूजा- अर्चना की जाती है. यह दिन मां शैलपुत्री को समर्पित माना जाता है. मां शैलपुत्री गाय की सवारी करती हैं और उनके एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे हाथ में कमल का फूल है. मां का यह स्वरुप बहुत ममतायी है. मां शैलपुत्री को ही भगवान शिव की पूर्व पत्नी मां सती एक रूप में जाना जाता है. पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा के बाद उनकी आरती और कथा का पाठ किया जाता किया जाता है. आइए पढ़ते हैं मां शैलपुत्री की पौराणिक कथा और आरती

मां शैलपुत्री की पौराणिक कथा:
बहुत समय पहले की बात है जब प्रजापति दक्ष ने एक बहुत बड़े यज्ञ का आयोजन किया. दक्ष ने इस यज्ञ में सारे देवताओं को निमंत्रित किया, लेकिन अपनी बेटी सती और पति भगवान शंकर को यज्ञ में नहीं बुलाया. सती अपने पिता द्वारा आयोजित यज्ञ में जाने के लिए बेचैन हो उठीं. इसपर भगवान शिव ने सती से कहा कि अगर प्रजापति ने हमें यज्ञ में नहीं आमंत्रित किया है तो ऐसे में वहां जाना उचित नहीं है.

लेकिन इसके बाद सती की जिद को देखकर शिवजी ने उन्हें यज्ञ में जाने की स्वीकृति दे दी. सती जब घर पहुंचीं तो उनकी बहनों ने उनपर कई तरह से कटाक्ष किए. साथ ही भगवान शंकर का भी तिरस्कार किया. दक्ष ने भी उनके प्रति अपमानजनक वचन कहे. इससे सती को काफी दुःख पहुंचा.



इस अपमान से दुखी होकर सती ने हवन की कूदकर अपने प्राण दे दिए. इसपर भगवान शिव ने यज्ञ भूमि में प्रकट होकर सबकुछ सर्वनाश कर दिया. सती का अगला जन्म देवराज हिमालय के यहां हुआ. हिमालय के घर जन्म होने की वजह से उनका नाम शैलपुत्री पड़ा.

मां शैलपुत्री की आरती :

शैलपुत्री मां बैल असवार. करें देवता जय जयकार.
शिव शंकर की प्रिय भवानी. तेरी महिमा किसी ने ना जानी.

पार्वती तू उमा कहलावे. जो तुझे सिमरे सो सुख पावे.
ऋद्धि-सिद्धि परवान करे तू. दया करे धनवान करे तू.

सोमवार को शिव संग प्यारी. आरती तेरी जिसने उतारी.
उसकी सगरी आस पुजा दो. सगरे दुख तकलीफ मिला दो.

घी का सुंदर दीप जला के. गोला गरी का भोग लगा के.
श्रद्धा भाव से मंत्र गाएं. प्रेम सहित फिर शीश झुकाएं.

जय गिरिराज किशोरी अंबे. शिव मुख चंद्र चकोरी अंबे.
मनोकामना पूर्ण कर दो. भक्त सदा सुख संपत्ति भर दो.

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.

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First published: March 25, 2020, 6:36 AM IST
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