Navratri 2020: नवरात्रि में घट स्थापना से पहले जौ बोने का क्या है महत्व, जानें

घट स्थापना से पहले जौ बोने का महत्व जानें (pic courtesy: instagram/rakhisinhatss)
घट स्थापना से पहले जौ बोने का महत्व जानें (pic courtesy: instagram/rakhisinhatss)

Navratri 2020 Date: नवरात्रि में (Navratri) घट स्थापित (Ghat Sthapna) करने से पहले साफ मिट्टी में जौ बोये (Barley Sowing) जाने की परंपरा है. पूरे नौ दिन के व्रत के दौरान इस बात का ख्याल रखा जाता है कि जौ अच्छे से बढ़ता रहे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 6, 2020, 5:40 PM IST
  • Share this:
Navratri 2020 Date: नवरात्रि इस बार 17 अक्टूबर से प्रारंभ होगी. नवरात्रि के नौ दिनों तक मां नव दुर्गा (Durga Puja) के विभिन्न 9 रूपों की पूजा अर्चना की जाती है. नवरात्रि की प्रतिपदा की शुरुआत जौ बोने उसके बाद इसपर कलश स्थापना के साथ होती है. घट स्थापित करने से पहले साफ मिट्टी में जौ बोये जाने की परंपरा है. पूरे नौ दिन के व्रत के दौरान इस बात का ख्याल रखा जाता है कि जौ अच्छे से बढ़ता रहे. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर घट स्थापना से पहली जौ बोये जाने का क्या धार्मिक महत्व है...

इसे भी पढ़ें: Mahabharat Katha: कृष्ण ने मोहिनी रूप धर किन्नरों के देवता अरावन से किया था विवाह, जानें पौराणिक कहानी

जौ बोने का धर्मिक महत्व:
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब परमपिता ब्रह्मा ने इस श्रृष्टि की रचना की तब सारी वस्तुएं अपनी मूलभूत प्रकृति में थी. ऐसे में वनस्पति के नाम पार पहली फसल जो विकसित हुई वो 'जौ' की थी. यही वजह है कि नवरात्रि के पहले दिन घट स्थापित करने से पहले पूरे विधि विधान के साथ जौ बोने की परंपरा चली आ रही है. दरअसल, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जौ को परमपिता ब्रह्मा जी का प्रतीक माना जाता है. इसीलिए सबसे पहले जौ की पूजा होती है और उसे कलश से भी पहले स्थापित किया जाता है.
इसे भी पढ़ें: Durga Puja 2020: नवरात्रि में अश्व पर होकर सवार मां दुर्गा पधारेंगी आपके द्वार



जौ की ग्रोथ का है महत्व:
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि में बोया गया जौ जितनी तेजी से बढ़ता है ठीक उसी तेजी के साथ जातक भी दिन दूनी रात चौगुनी उन्नति करता है.

अगर जौ ठीक से नहीं बढ़ रहा है तो करें ये:
यदि नवरात्रि के दौरान जौ ठीक से नहीं बढ़ रहा है तो पूजा के समापन यानी कि अष्टमी के दिन व्रत के पारण से पहले मां नवदुर्गा से प्रार्थना करें कि वो आपकी गलतियों को क्षमा करें और आपके जीवन में अपना आशीर्वाद बनाए रखें और आपको विपत्तियों से बचाएं. इसके साथ ही 1008 बार मां दुर्गा के बीज मंत्र का जाप करें. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज