Navratri 2020: अष्टमी, नवमी और दशमी तिथि को लेकर दूर करें कंफ्यूजन, जानें कन्या पूजा का महत्व

नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथियों पर मां महागौरी और सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है.
नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथियों पर मां महागौरी और सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है.

नवरात्रि (Navaratri 2020) की अष्टमी और नवमी तिथि पर घरों और मंदिरों में कन्या पूजन (Kanya Pujan) किया जाता है. नवरात्रि में अष्टमी और नवमी के दिन कन्या पूजन करने का विशेष महत्व माना गया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 23, 2020, 8:50 PM IST
  • Share this:
17 अक्टूबर 2020 से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत हो चुकी है.  वहीं नवरात्रि में अष्टमी और नवमी तिथि पर घरों और मंदिरो में कन्या पूजन किया जाता है. नवरात्रि के बाद कन्या पूजन का विशेष महत्व माना गया है. इस बार नवरात्रि पूरे नौ दिन की है. दरअसल इस बार नवरात्रि में अष्टमी, नवमी और दशमी तिथि को लेकर कुछ संशय की स्थिति बन रही है. लेकिन हिन्दू पंचांग के अनुसार सप्तमी तिथि 23 अक्टूबर 2020 (शुक्रवार) को पड़ रही है. वहीं अष्टमी तिथि भी 23 अक्टूकर (शुक्रवार) की सुबह 06 बजकर 57 मिनट पर शुरू हो जाएगी, जो कि बुधवार 24 अक्टूबर की सुबह 6 बजकर 58 मिनट तक रहेगी. उसके बाद नवमी तिथि लग जाएगी.

इसे भी पढ़ेंः Durga Puja 2020: जानें दुर्गा पूजा के सभी दिनों के शुभ मुहूर्त और तिथि

नवमी तिथि 24 अक्टूबर की सुबह 6 बजकर 58 मिनट से शुरू होकर 25 अक्टूबर की सुबह 7 बजकर 41 मिनट तक रहेगी. इसके बाद दशमी तिथि लग जाएगी. दशमी तिथि 25 अक्टूबर की सुबह 7 बजकर 41 मिनट से प्रारंभ होगी, जो 26 अक्टूबर के दिन सुबह 9 बजे समाप्त हो जाएगी. दशमी तिथि 25 अक्टूबर की सुबह लग जाने के कारण विजय दशमी पर्व इसी दिन मनाया जाएगा. वहीं बंगाल में विजय दशमी 26 अक्टूबर दिन सोमवार को मनााया जाएगा.



इसे भी पढ़ेंः Navratri 2020: शारदीय नवरात्रि पर मां दुर्गा के इन मंदिरों में जरूर करें दर्शन, पूरी होगी मनोकामना
अष्टमी और नवमी के दिन कन्या पूजन का महत्व
नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथि पर घरों और मंदिरों में कन्या पूजन किया जाता है. नवरात्रि में अष्टमी और नवमी के दिन कन्या पूजन करने का विशेष महत्व माना गया है. नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथियों पर मां महागौरी और सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है. इन तिथियों पर कन्याओं को घरों में बुलाकर भोजन कराया जाता है. नवरात्रि में नौ कन्याओं को भोजन करवाना चाहिए क्योंकि 9 कन्याओं को देवी दुर्गा के 9 स्वरुपों का प्रतीक माना जाता है. कन्याओं के साथ एक बालक को भी भोजन करवाना पड़ता है जिन्हें बटुक भैरव का प्रतीक माना जाता है. मां के साथ भैरव की पूजा जरूरी मानी गई है. अष्टमी और नवमी तिथियों पर 2 वर्ष से लेकर 10 वर्ष की आयु तक की कन्याओं का कंजक पूजन किया जाता है.(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज