Navratri 2020: आज है शारदीय नवरात्रि का पहला दिन, इस शुभ मुहूर्त पर करें घटस्थापना

नवरात्रि में घटस्थापना का विशेष महत्व होता है. ये नवरात्रि का पहला दिन होता है और इसी दिन से नवरात्रि पर्व का प्रारंभ माना गया है.
नवरात्रि में घटस्थापना का विशेष महत्व होता है. ये नवरात्रि का पहला दिन होता है और इसी दिन से नवरात्रि पर्व का प्रारंभ माना गया है.

नवरात्रि (Navatari 2020) के प्रथम दिन शुभ मुहूर्त अनुसार ही घटस्थापना करने के बाद मां शैलपुत्री की आराधना करने का विधान है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 17, 2020, 5:11 AM IST
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Navratri 2020: वर्ष 2020 में शरद नवरात्रि (Sharad Navratri) 17 अक्टूबर यानि आज से प्रारंभ हो रही है और 10 दिनों तक चलने वाला देवी शक्ति (Devi Shakti) को समर्पित ये पर्व 26 अक्टूबर, सोमवार तक देशभर में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा. इस बार अधिकमास (Adhik Maas 2020) लगने के कारण शारदीय नवरात्रि एक महीने की देरी से शुरू होगी. हिंदू पंचांग के अनुसार हर वर्ष पितृपक्ष के समाप्ति के बाद अगले दिन से ही शारदीय नवरात्रि शुरू हो जाती है लेकिन इस बार अधिक मास होने के कारण पितरों की विदाई के बाद नवरात्रि का त्योहार शुरू नहीं हो सका. इस बार नवरात्रि 17 अक्टूबर 2020 से शुरू होकर 25 अक्टूबर तक चलेगी. हिंदू धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व होता है. नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है. इस पावन पर्व की शुरुआत घटस्थापना के साथ होती है, जिसका महत्व विशेष माना गया है.

हिन्दू धर्म के अनुसार, नवरात्रि के प्रथम दिन शुभ मुहूर्त अनुसार ही घटस्थापना करने के बाद मां शैलपुत्री की आराधना करने का विधान है. हालांकि प्रथम दिन के अलावा शरद नवरात्रि में षष्टी, महा सप्तमी, महा अष्टमी, महा नवमी और विजयादशमी का भी विशेष महत्व रहता है. तो चलिए जानते हैं इस वर्ष की शरद नवरात्रि के घटस्थापना का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व. शरद नवरात्रि में घटस्थापना के नियम और मुहूर्त का समय.

घटस्थापना शुभ मुहूर्त
दिन- 17 अक्टूबर 2020, शनिवार
घटस्थापना मुहूर्त- 06:23:22 से 10:11:54 तक


अवधि- 3 घंटे 48 मिनट

घटस्थापना का महत्व
नवरात्रि में घटस्थापना (जिसे कलश स्थापना भी कहते हैं) का विशेष महत्व होता है. ये नवरात्रि का पहला दिन होता है और इसी दिन से नवरात्रि पर्व का प्रारंभ माना गया है. सनातन धर्म की मानें तो, किसी भी शुभ कार्य के लिए कलश स्थापना करना शुभ माना जाता है और इसी कलश को शास्त्रों में भगवान गणेश की संज्ञा दी गई है. इसी लिए हर पूजा या मंगल कार्य की शुरुआत सर्वप्रथम गणेश जी की वंदना से की जाती है, जिसमें कलश की स्थापना पूरे विधि-विधान अनुसार करने के पश्चात ही कोई भी कार्य किया जाता है.

नवरात्रि में घटस्थापना के दौरान इन बातों का रखें विशेष ध्यान-

-घटस्थापना शुभ मुहूर्त अनुसार ही किया जाना चाहिए, तभी आप इस दस दिवसीय पर्व से फलदायी परिणाम प्राप्त कर सकते हैं.

-इसके लिए सबसे पहले, एक मिट्टी के पात्र में जौ बो लें.

-इसके साथ ही एक मिट्टी का कलश लेकर, उस पर जल का छिड़काव करें.

-अब कलश पर स्वस्तिक बनाएं और कलश के गले में मौली बांधें.

-इसके बाद उसे, थोड़े गंगाजल और शुद्ध जल से पूरा भर दें.

-कलश को भगवान गणेश का स्वरूप मानते हुए, उस पर साबुत सुपारी, फूल और दूर्वा चढ़ाएं.

-इसके साथ ही कलश में इत्र, पंचरत्न और एक सिक्का डालते हुए, उसमें पांचों प्रकार के पत्ते भी डालें.

-अब एक ढक्कन में अक्षत भरकर, उसे कलश के ऊपर रखें.

-साथ ही एक नारियल को किसी स्वच्छ लाल कपड़े में या माता रानी की लाल चुन्नी में लपेटकर, उसपर भी मौली बांधकर, उसे कलश पर रखें.

-नारियल रखते हुए, ध्यान रखें कि उसका मुंह आपकी तरफ होना चाहिए.

-इस तरह कलश स्थापना करने के बाद, अब समस्त परिवार के साथ आप मां दुर्गा का आह्वान करते हुए, उनकी पूजा-अर्चना करें. (साभार- Astrosage.com)
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